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विनोद तावड़े और जगदीश पटेल हैं तुरूप का इक्का, 7.5 फीसदी वोटों से BJP साधेगी यूपी चुनाव

यूपी में बहुत प्रभावशाली है कुर्मी समुदाय उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति राजनीतिक रूप से प्रभावशाली एक महत्वपूर्ण ओबीसी समुदाय है। बीजेपी फरवरी-मार्च, 2027 में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले इस समुदाय में अपनी पहुंच बढ़ा…

Navbharat Times के अनुसार22 अगस्त 2026 को 08:55 am बजे
विनोद तावड़े और जगदीश पटेल हैं तुरूप का इक्का, 7.5 फीसदी वोटों से BJP साधेगी यूपी चुनाव

सौजन्य से:- Navbharat Times

यूपी में बहुत प्रभावशाली है कुर्मी समुदाय

उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति राजनीतिक रूप से प्रभावशाली एक महत्वपूर्ण ओबीसी समुदाय है। बीजेपी फरवरी-मार्च, 2027 में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले इस समुदाय में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है। विनोद तावड़े और जगदीश पटेल कुर्मी समुदाय से हैं। यही कारण है कि इनकी नियुक्तियां संगठन में सामान्य फेरबदल से कहीं ज्यादा आगामी चुनाव को लेकर अहम मानी जा रही हैं। इस कदम को बीजेपी की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह उस जातीय समूह पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जिसका समर्थन उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों में चुनावी नतीजों को तय करने में अहम माना जाता है।पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से

बीजेपी कुर्मी समुदाय पर लगातार ध्यान केंद्रित किए है। इससे पहले बीजेपी ने पार्टी की यूपी इकाई की कमान केंद्रीय मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी को सौंपी थी। चौधरी कुर्मी समुदाय का एक प्रमुख चेहरा हैं। हाल ही में पार्टी ने अपने केंद्रीय संगठन में बदलाव के दौरान पूर्व सांसद रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा। वे भी इसी समुदाय से हैं। कुर्मी बहुल अपना दल (एस) के साथ बीजेपी का गठबंधन भी उसकी ओबीसी केंद्रित रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल राज्य के सबसे प्रमुख कुर्मी नेताओं में से एक हैं। वे मोदी कैबिनेट की सदस्य हैं।योगी सरकार में चार मंत्री कुर्मी

इस समुदाय का प्रभाव यूपी की योगी सरकार में भी दिखता है। चार कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राकेश सचान, संजय गंगवार और आशीष पटेल कुर्मी समुदाय से हैं। समदाय के नेताओं को यह अहमियत सामाजिक गठबंधन को लेकर बीजेपी की रणनीति को दर्शाने वाली है। यूपी विधानसभा के आंकड़े भी इस समुदाय के राजनीतिक दबदबे को उजागर करते हैं। उत्तर प्रदेश में अभी 40 कुर्मी विधायक हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 27 बीजेपी के हैं। समाजवादी पार्टी के 12 और कांग्रेस का एक कुर्मी विधायक है।ओबीसी आबादी में करीब 7.5 फीसदी

कुर्मी जातीय समुदाय उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावशाली ओबीसी समुदायों में से एक है। सन 2001 की सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के आधार पर अनुमान है कि कुर्मी उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी का लगभग 7.5 फीसदी हैं। यानी कुर्मी राज्य में यादवों के बाद सबसे बड़ा ओबीसी समुदाय है। इस समुदाय की मौजूदगी यूपी के मध्य, पूर्वी और अवध इलाकों में सबसे अधिक है। यह समुदाय इन इलाकों की विधानसभा सीटों के चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हुआ था नुकसान

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी कुर्मी समुदाय का समर्थन फिर से हासिल करने के लिए सावधानी से कदम उठा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि दो साल पहले सन 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में इस समुदाय का एक हिस्सा पार्टी से दूर हो गया था। इससे उत्तर प्रदेश में पार्टी की सीटें 2019 की 62 से घटकर 33 रह गईं।यूपी में कुर्मी वोटों के लिए होड़

लोकसभा चुनाव में यह भी स्पष्ट हुआ था कि यूपी में कुर्मी वोटों के लिए होड़ बढ़ती जा रही है। इस चुनाव में उत्तर प्रदेश से 11 कुर्मी सांसद चुने गए थे, जिनमें से सात समाजवादी पार्टी से हैं। अंबेडकर नगर से लालजी वर्मा, फतेहपुर से नरेश उत्तम पटेल, बस्ती से राम प्रसाद चौधरी, खीरी से उत्कर्ष वर्मा, प्रतापगढ़ से शिव पाल सिंह पटेल, बांदा से कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल और श्रावस्ती से राम शिरोमणि वर्मा समाजवादी पार्टी के सांसद बने थे।दूसरी तरफ बीजेपी से तीन कुर्मी सांसद चुने गए थे। महाराजगंज से पंकज चौधरी, बरेली से छत्रपाल सिंह गंगवार और फूलपुर से प्रवीण पटेल सांसद चुने गए थे। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सहयोगियों में अनुप्रिया पटेल अकेली कुर्मी सांसद थीं।

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