गंगा में आई बाढ़ ने रोका मोक्ष का मार्ग... वाराणसी में हरिश्चंद्र घाट डूबा, संकरी गलियों में शवदाह को मजबूर लोग
गंगा में आई बाढ़ की विभीषका ने न सिर्फ आम लोगों के जनजीवन पर असर डाला है, बल्कि मोक्ष के रास्ते भी एक बड़ी अड़चन बनकर खड़ी हो गई है. ऐ…

सौजन्य से:- AajTak
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गंगा में आई बाढ़ की विभीषका ने न सिर्फ आम लोगों के जनजीवन पर असर डाला है, बल्कि मोक्ष के रास्ते भी एक बड़ी अड़चन बनकर खड़ी हो गई है. ऐसा ही नजारा वाराणसी के शमशान घाट हरिश्चंद्र के पूरी तरह से बाढ़ के पानी में समा जाने के बाद उस समय देखने को मिला जब पक्के घाटों के ऊपर तंग गलियों में शवदाह होता हुआ दिखाई पड़ा. धूप गर्मी उमस तंग और संकरी गली के अलावा गंदगी का अंबार न सिर्फ शवयात्रियों की परीक्षा ले रहा था, बल्कि शवदाह कराने वालों ने भी कड़ी नाराजगी जाहिर की कि कई बार साफ सफाई और गंदगी की शिकायत के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी है.
पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों में एक बार फिर से दिखना शुरू हो गया है. वाराणसी में दो बार घटने के बाद गंगा के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से वृद्धि देखी जा रही है.
केंद्रीय जल आयोग की डेली फ्लड बुलेटिन के मुताबिक, वाराणसी में गंगा 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फिर से बढ़ना शुरू हो गई है. जिसके चलते चेतावनी बिंदु से गंगा एक मीटर तो खतरे के निशान से 2 मीटर नीचे ही रह गई है. यही वजह है कि जनजीवन को प्रभावित करने के बाद बाढ़ के पानी ने मोक्ष के मार्ग यानी श्मशान हरिश्चंद्र घाट को भी जकड़ लिया है. नतीजतन अब हरिश्चंद्र घाट के ऊपर गलियों में शवदाह करना पड़ रहा है.
बांदा से पहुंचे शवयात्री सुशील कुमार ने बताया कि तंग गली की वजह से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, तो वहीं शवयत्री आकाश ने बताया कि हर बार बाढ़ में यही परेशानी झेलनी पड़ती है. गंदगी, तंग रास्ता और सकरी गली ही बाढ़ के मौसम में शवयात्रियो की तकदीर बन जाती है.
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शवदाह करने वाले रामकरण चौधरी ने बताया कि कई बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम गलियों को साफ नहीं करता है. गंदगी के अंबार की वजह से जगह और छोटी हो जाती है. बार-बार कहने के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, तो वहीं बगल में बन रहा नया हरिश्चंद्र कॉरिडोर भी 3 साल से लंबित है.
उन्होंने बताया कि बाढ़ के चलते जहां अभी एक बार में गली में महज आधा दर्जन शव ही बमुश्किल जलाये जा रहे हैं, तो बाढ़ के पहले एक बार में नीचे घाट पर 30 से ज्यादा शव जलाएं जा रहे थे. इसकी वजह से अभी शवयात्रियों को घंटों इंतजार भी करना पड़ रहा है.
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