जयन्त चौधरी की हुंकार के बाद अखिलेश यादव की एंट्री, सहारनपुर के सियासी संग्राम में किसकी होगी जीत? - saharanpur political battle jayant chaudhary akhilesh yadav rallies
जयन्त चौधरी की हुंकार के बाद अखिलेश यादव की एंट्री, सहारनपुर के सियासी संग्राम में किसकी होगी जीत? सहारनपुर में सितंबर माह में सियासी सरगर्मी तेज होने वाली है, जहां जयन्त चौधरी 3 सितंबर को 'स्वाभिमान रैली' करेंगे। वहीं,…

सौजन्य से:- Jagran
जयन्त चौधरी की हुंकार के बाद अखिलेश यादव की एंट्री, सहारनपुर के सियासी संग्राम में किसकी होगी जीत?
सहारनपुर में सितंबर माह में सियासी सरगर्मी तेज होने वाली है, जहां जयन्त चौधरी 3 सितंबर को 'स्वाभिमान रैली' करेंगे। वहीं, अखिलेश यादव 6 सितंबर को 'युवा योद्धा महासम्मेलन' को संबोधित कर पश्चिमी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेंगे।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में सहारनपुर सितंबर में एक बार फिर बड़े राजनीतिक संदेशों का केंद्र बनने जा रहा है।
एक ओर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयन्त चौधरी तीन सितंबर को स्वाभिमान रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव छह सितंबर को युवा योद्धा महासम्मेलन को संबोधित करेंगे। दोनों नेताओं के कार्यक्रमों के बीच महज तीन दिनों का अंतर होने के कारण सहारनपुर का राजनीतिक तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में सितंबर की शुरुआत काफी गर्म रहने वाली है। सहारनपुर में महज तीन दिन के अंतर पर राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयन्त चौधरी और समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यक्रम होने जा रहे हैं।
तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान में जयन्त चौधरी स्वाभिमान रैली के मंच से अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे, जबकि छह सितंबर को चुन्हैटी फाटक पर अखिलेश यादव युवा योद्धा महासम्मेलन के जरिए युवाओं को साधने की कोशिश करेंगे।
दोनों कार्यक्रमों के बीच बना यह अंतराल महज संयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिमी यूपी की बदलती राजनीतिक बिसात से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश के तंज के बाद जयन्त की पहली बड़ी परीक्षा
जयन्त चौधरी और अखिलेश यादव के बीच हालिया बयानबाजी ने इन कार्यक्रमों की अहमियत और बढ़ा दी है। अखिलेश यादव ने हाल में जयन्त चौधरी का नाम लिए बिना चवन्नी जैसे शब्दों के जरिए निशाना साधा था। इसके जवाब में जयन्त ने भी पलटवार करते हुए कहा कि अगर सस्ते शब्द बोलने ही थे तो उनका नाम लेकर बोलते।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता ही नेताओं की हैसियत तय करती है। ऐसे में सहारनपुर की रैली जयन्त के लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने समर्थकों और पश्चिमी यूपी में अपनी पकड़ को लेकर बड़ा संदेश देने का मंच भी माना जा रहा है।
गुर्जर समाज के कार्यक्रम में होगा जयन्त का अभिनंदन
तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान स्थित गोचर कृषि इंटर कालेज मैदान में अखिल भारतीय गुर्जर विद्या प्रचारिणी सभा के कार्यक्रम में जयन्त चौधरी शामिल होंगे। रालोद ने इसी कार्यक्रम को स्वाभिमान रैली के रूप में बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की है।
पार्टी नेताओं की ओर से इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किया जा रहा है। जयन्त इस मंच से किसान, युवा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को लेकर कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं या नहीं, इस पर भी निगाहें रहेंगी।
छह सितंबर को अखिलेश साधेंगे युवाओं को
जयन्त की रैली के तीन दिन बाद छह सितंबर को अखिलेश यादव सहारनपुर में युवा योद्धा महासम्मेलन को संबोधित करेंगे। सपा इस कार्यक्रम के जरिए खासतौर पर युवा और पहली बार मतदान करने वाले वर्ग को जोड़ने की कोशिश में है। पार्टी की रणनीति में युवाओं को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का अहम केंद्र माना जा रहा है।
अखिलेश का सहारनपुर दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिमी यूपी में सपा के सामने एक तरफ भाजपा की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर रालोद का अपना सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव है।
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