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यूपी में आईपीएस अफसर की मां की हत्या, बदमाशों ने लूटे जेवर, घर के अंदर पड़ा मिला शव

यूपी में आईपीएस अफसर की मां की हत्या, बदमाशों ने लूटे जेवर, घर के अंदर पड़ा मिला शव अंबेडकरनगर जिले में आईपीएस अफसर आशुतोष मिश्र की मां की हत्या कर दी गई। बदमाशों ने महिला की हत्या के बाद जेवर लूट लिए। आईपीएस के पैतृक गा…

Hindustan के अनुसार16 अगस्त 2026 को 08:55 pm बजे
यूपी में आईपीएस अफसर की मां की हत्या, बदमाशों ने लूटे जेवर, घर के अंदर पड़ा मिला शव

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी में आईपीएस अफसर की मां की हत्या, बदमाशों ने लूटे जेवर, घर के अंदर पड़ा मिला शव

अंबेडकरनगर जिले में आईपीएस अफसर आशुतोष मिश्र की मां की हत्या कर दी गई। बदमाशों ने महिला की हत्या के बाद जेवर लूट लिए। आईपीएस के पैतृक गांव वाले घर के अंदर खून से लथपथ शव मिला है।

Ambedkar Nagar News: यूपी पुलिस मुख्यालय में तैनात एसपी (आईपीएस) आशुतोष मिश्र की 91 वर्षीय मां इंद्रावती की रविवार दोपहर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने उनके जेवर भी लूट लिए। वारदात आंबेडकर नगर जनपद के मालीपुर इलाके के रुढ़ा धमरुआ गांव स्थित उनके पैतृक आवास पर हुई। शव घर के अंदर खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। मुंह से खून निकल रहा था और कपड़ा ठुंसा हुआ था। आईपीएस की मां की हत्या की सूचना पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

एसपी प्राची सिंह समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। तफ्तीश शुरू हुई। पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही आईपीएस आशुतोष मिश्र भी आनन फानन पैतृक आवास पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिवारीजनों ने इंद्रावती की हत्या करक शरीर से गहने लूटे जाने का आरोप लगाया है। पुलिस घटना से जुड़े कई बिंदुओं पर तफ्तीश कर रही है। आशुतोष मिश्र यहां लखनऊ पुलिस मुख्यालय में एसपी हैं। उनकी मां इंद्रावती रुढ़ा गांव में रहती हैं।

शव देखते ही नौकरानी की निकली चीख

रविवार दोपहर वह घर के अंदर मृत अवस्था में पड़ी मिली। नौकरानी पहुंची तो शव पड़ा देखकर उनकी चीख निकल पड़ी। आनन फानन उन्होंने घटना की जानकारी परिवारीजनों को दी। नौकरानी ने बताया कि इंद्रावती के मुंह पर कपड़ा ठुंसा था। आशुतोष के चाचा सचिंद्र मिश्रा ने उन्हें फोन कर घटना की जानकारी दी। आशुतोष लखनऊ में थे। वह तत्काल पैतृक आवास के लिए रवाना हो गए। उधर, मालीपुर थाने की पुलिस और एसपी प्राची सिंह मौके पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। तफ्तीश शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

गायब थी सोने की चेन, माला, टॉप्स और कील

परिवारीजनों ने बताया कि चंद्रावती गले में सोने की चेन, तुलसी की माला सोने से जड़ित, नाक की कील, टॉप्स और पायल पहनती थी। यह जेवर उनके गायब हैं। परिस्थितिजन्य साक्ष्य लूटपाट के बाद हत्या की आशंका जता रहे हैं। दिन दहाड़े हुई सनसनीखेज वारदात से गांव के लोग भी दहशत में हैं।

तीन संदिग्धों से पूछताछ जारी

तफ्तीश में लगी पुलिस टीम ने तीन संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा सर्विलांस टीम घटनास्थल के आस पास एक्टिव मोबाइल नंबरों के आधार पर संदिग्धों को ट्रेस कर रही है। पुलिस की टीमें घटनास्थल को जाने वाले मार्ग पर लगे सीसी कैमरों की भी पड़ताल कर रही हैं।

अंबेडकरनगर एसपी प्राची सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के कारणों की पुष्टि होगी। लूट की बात अभी स्पष्ट नहीं है। संभव है कि इंद्रावती की मौत के बाद अगल-बगल के किसी व्यक्ति ने उनके जेवर निकाल लिए हों। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

लेखक के बारे में

Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट

पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर

यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका

(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर

आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और

डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।

लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल

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पत्रकारिता का सफर

हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब

एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो

उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने

करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में

प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी

है।

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