होमविकासलखनऊ- कानपुर एक्सप्रेस की सड़क दो नई जगह फिर धंसी, हल्की बारिश में साइड लेन तालाब बनी
विकास

लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेस की सड़क दो नई जगह फिर धंसी, हल्की बारिश में साइड लेन तालाब बनी

लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेस की सड़क दो नई जगह फिर धंसी, हल्की बारिश में साइड लेन तालाब बनी कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद रविवार को दो जगह सड़क धंस गई। 59 किमी पर करीब 50 मीटर सड़क बैठ गई, जबकि 62 किमी पर 70 मीटर हिस…

Hindustan के अनुसार16 अगस्त 2026 को 05:55 pm बजे
लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेस की सड़क दो नई जगह फिर धंसी, हल्की बारिश में साइड लेन तालाब बनी

सौजन्य से:- Hindustan

लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेस की सड़क दो नई जगह फिर धंसी, हल्की बारिश में साइड लेन तालाब बनी

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद रविवार को दो जगह सड़क धंस गई। 59 किमी पर करीब 50 मीटर सड़क बैठ गई, जबकि 62 किमी पर 70 मीटर हिस्से की मरम्मत चल रही है। 4200 करोड़ के एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ हफ्तों बाद ही खामियां सामने आने लगी हैं।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के धंसने का सिलसिला जारी है। दो दिन की हल्की बारिश में रविवार को एक्सप्रेसवे पर दो स्थानों पर और सड़क धंस गई। 59 किलोमीटर पर करीब 50 मीटर सड़क बैठ गई, जबकि 62 किलोमीटर पर करीब 70 मीटर हिस्से को उखाड़कर दोबारा बनाने का काम चल रहा है। बारिश के कारण मरम्मत कार्य कई बार रोकना पड़ा। 13 जुलाई को यातायात के लिए खोले गए 4200 करोड़ से बने करीब 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर रफ्तार और सुगम सफर का वादा किया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद यात्रियों को रोड रोलर, खुदाई मशीनों, बेरिकेडिंग और सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के काम के बीच से गुजरना पड़ रहा है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर मरम्मत जारी

शनिवार और रविवार को भी मरम्मत का सिलसिला जारी रहा। इसी बीच 59 किलोमीटर पर सड़क धंसने की सूचना मिलते ही पीएनसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के बाद प्रभावित हिस्से में बेरिकेडिंग कराई गई। डामर उखाड़कर करीब 30 मीटर हिस्से को दोबारा बनाने का काम शुरू किया गया। 62 किलोमीटर पर भी बारिश से काम प्रभावित रहा। यहां रविवार को करीब 70 मीटर सड़क उखाड़ने का काम कई बार रोकना पड़ा।

हल्की बारिश में साइड लेन बनी तालाब

28.9 और 31.2 किलोमीटर पर जलभराव की समस्या भी सामने आई। हल्की बारिश में ही साइड लेन पानी से लबालब दिखाई दी। कई जगह क्रैश बैरियर ने नालियों को बाधित कर दिया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हुई। 59 और 62 किलोमीटर पर खोदी गई सड़क में बारिश का पानी जमा दिखाई दिया। जानकारों के मुताबिक पानी की निकासी ठीक नहीं होने पर सड़क के किनारे की पट्टियां प्रभावित हो सकती हैं। पानी नीचे पहुंचने से मिट्टी कमजोर होने और इसका असर डामर की ऊपरी सतह पर पड़ने की आशंका रहती है।

किनारों की मिट्टी भी दे रही खतरे का संकेत

एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मिट्टी के ढलान कटे हुए मिले। बारिश के कारण मिट्टी बहने से किनारों की संरचना को दोबारा भरने की जरूरत पड़ रही है। यानी समस्या सिर्फ डामर की सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि जल निकासी, सड़क के किनारे और मिट्टी की मजबूती से भी जुड़ी दिखाई दे रही है।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें