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'ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान की साझेदारी': CM बोले- निवेश, रोजगार, पर्यटन, ग्रीन हाइड्रोजन और GCC का 2047 तक होगा विस्तार

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Dainik Bhaskar के अनुसार24 अगस्त 2026 को 03:55 pm बजे
'ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान की साझेदारी':  CM बोले- निवेश, रोजगार, पर्यटन, ग्रीन हाइड्रोजन और GCC का 2047 तक होगा विस्तार

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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'ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान की साझेदारी':CM बोले- निवेश, रोजगार, पर्यटन, ग्रीन हाइड्रोजन और GCC का 2047 तक होगा विस्तार

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उत्तर प्रदेश और जापान के रिश्ते अब सिर्फ निवेश और कारोबार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि युवा शक्ति, स्किल, पर्यटन, ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल बिजनेस तक साझेदारी का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जापान के प्रिसिजन और टेक्नोलॉजी को यूपी के स्केल, युवा शक्ति और टैलेंट से जोड़कर 2047 के ग्लोबल फ्यूचर की नींव तैयार की जाएगी।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान उत्तर प्रदेश के लिए केवल इन्वेस्टर नहीं, बल्कि को-क्रिएटर है। सरकार का लक्ष्य एमओयू को प्रोडक्शन, प्रोडक्शन को ग्लोबल एक्सपोर्ट और निवेश को रोजगार में बदलना है।

जापानी भाषा में स्वागत, रिश्तों में दिखा सांस्कृतिक जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत “कोनिचिवा मिनासान” कहकर किया और संबोधन का समापन “अरिगातो गोजाइमासु” के साथ किया। उन्होंने कहा कि जापान और उत्तर प्रदेश के संबंध अब लॉन्ग-टर्म और ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप का रूप ले रहे हैं। उन्होंने जापान की औद्योगिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि काइजेन, मोनोजुकुरी और ‘वा’ यानी सामाजिक सामंजस्य वहां की कार्यसंस्कृति के महत्वपूर्ण आधार हैं। शिंकानसेन जापान की तकनीकी दक्षता, समयबद्धता, सुरक्षा और विश्वसनीयता का उदाहरण है।

सीएम ने कहा कि जापान ने सीमित संसाधनों के बावजूद अनुशासन, हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड, इनोवेशन और विल पावर के जरिए खुद को वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनाया है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन, युवा प्रतिभा और तेजी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर है।

जापान की इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस और यूपी की युवा शक्ति का मेल

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और आधुनिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। लक्ष्य ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जो इंडस्ट्री को स्पीड, नागरिकों को सेफ्टी और इन्वेस्टर्स को रिलायबिलिटी दे।उन्होंने कहा कि यूपी के युवाओं को ऐसी स्किल, प्रिसिजन और वर्क कल्चर से जोड़ा जाएगा, जिसकी जरूरत टोक्यो से लेकर दुनिया के एडवांस मैन्युफैक्चरिंग हब तक है। जापानी भाषा, तकनीकी प्रशिक्षण और जापानी कार्यसंस्कृति के जरिए युवाओं को ग्लोबल इंडस्ट्री के लिए तैयार किया जाएगा।

यामानाशी के लिए इन्वेस्ट यूपी में बनेगा डेडिकेटेड डेस्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रान्त के बीच सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाएगा। इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क बनाया जाएगा, जो यामानाशी सरकार, वहां के उद्योगों और निवेशकों के साथ लगातार समन्वय करेगा। निवेश परियोजनाओं, अप्रूवल और उद्योगों की जरूरतों की समीक्षा दोनों पक्षों के बीच हर 90 दिन में की जाएगी। इसका उद्देश्य एमओयू से वास्तविक निवेश तक की प्रक्रिया में किसी भी तरह के गैप को खत्म करना है।

यामानाशी की एमएसएमई के लिए 600 करोड़ का फंड

सीएम योगी ने यामानाशी के गवर्नर को धन्यवाद देते हुए कहा कि वहां की एमएसएमई कंपनियों के उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित किया गया है। उन्होंने इसे यूपी में जापानी उद्योगों के बढ़ते भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यामानाशी के साथ तैयार होने वाले सहयोग मॉडल को जापान के दूसरे प्रीफेक्चर्स तक भी विस्तार दिया जाएगा।

जापानी कंपनियों की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे यूपी के युवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट को अब सिर्फ प्रशिक्षण की संख्या से नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के परिणामों से जोड़ा जाएगा। जापानी कंपनियों के साथ मिलकर उनकी सेक्टर-स्पेसिफिक मैनपावर जरूरतों को समझा जाएगा और उसी आधार पर ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, पॉलिटेक्निक, नर्सिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को जापानी भाषा और संबंधित तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण देने पर जोर होगा। लक्ष्य है- इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्किल और स्किल के अनुसार एंप्लॉयमेंट।

विश्वविद्यालयों के बीच भी बढ़ेगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने बताया कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने जापानी डेलिगेशन के साथ एमओयू किया है। इसी तर्ज पर यूपी के अन्य विश्वविद्यालयों और जापान के विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच साझेदारी विकसित की जाएगी। इससे शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, रिसर्च और युवाओं के एक्सचेंज प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और यूपी की युवा प्रतिभा का यह मेल नए स्टार्टअप, रिसर्च और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

बौद्ध सर्किट से जापानी पर्यटकों को यूपी लाएंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि बौद्ध सर्किट के जरिए जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में एक एमओयू भी हुआ है। उन्होंने यूपी को भारत का प्रमुख स्पिरिचुअल टूरिज्म हब बताते हुए कहा कि प्रदेश में बौद्ध, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और हेरिटेज टूरिज्म की बड़ी संभावनाएं हैं। जापान में होने वाले टूरिज्म फेस्टिवल में यूपी की भागीदारी के जरिए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और हॉस्पिटैलिटी को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे पर्यटन के साथ दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी।

ग्रीन हाइड्रोजन में यामानाशी के साथ पायलट प्रोजेक्ट

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी यूपी और यामानाशी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। इसी मॉडल पर नए सेंटर विकसित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जाएगा।

यामानाशी के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट विकसित करने पर सहमति बनी है। भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी और बिजनेस पार्टनरशिप विकसित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर यूपी के उद्यमियों और निवेशकों को यामानाशी भेजकर वहां की तकनीक और परियोजनाओं का अनुभव कराया जाएगा। सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर एक उपयुक्त ऑफ-टेकर की पहचान करेगी, ताकि पायलट प्रोजेक्ट को बड़े व्यावसायिक मॉडल में बदला जा सके। अक्टूबर 2026 में यामानाशी में होने वाले इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में यूपी का प्रतिनिधिमंडल भी भेजा जाएगा।

जापानी GCC कंपनियों को नोएडा-ग्रेटर नोएडा आने का न्योता

मुख्यमंत्री ने जापानी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) कंपनियों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निवेश और बिजनेस सेटअप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में GCC के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है और इस विषय में एक एमओयू भी हुआ है। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश हासिल करना नहीं, बल्कि जापान के साथ लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप तैयार करना है। जापानी कंपनियां यूपी में उत्पादन करें और यहां से भारत के साथ ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बनाएं, यही सरकार का प्रयास है।

‘ग्लोबल फ्यूचर उत्तर प्रदेश से बनाया’- सीएम

मुख्यमंत्री ने भारत और जापान की सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपनी परंपराओं और विरासत को आधुनिक जीवन और कार्यसंस्कृति से जोड़े रखा है। जापान की संस्कृति पर शिंतो और बौद्ध परंपराओं का प्रभाव है, जबकि भारत की जीवन पद्धति प्रकृति के सम्मान, सामाजिक दायित्व और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि 2047 में भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। उस समय उनकी आकांक्षा है कि यूपी में काम कर रही जापानी कंपनियां सिर्फ यह न कहें कि उन्होंने भारत में निवेश किया, बल्कि गर्व से कहें कि “हमने अपना ग्लोबल फ्यूचर उत्तर प्रदेश से बनाया है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जापान के साथ एक रिलायबल और लॉन्ग-टर्म पार्टनर के रूप में खड़ा है। निवेश, उद्योग और रोजगार से लेकर पर्यटन, शिक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्लोबल बिजनेस तक बढ़ता यह सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-जापान संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

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