यूपी में वन्य जीव सप्ताह; लखनऊ जू में रंगोली के जरिए खास संदेश दे रहे मासूम, बच्चों के लिये फ्री एंट्री!
यूपी में वन्य जीव सप्ताह; लखनऊ जू में रंगोली के जरिए खास संदेश दे रहे मासूम, बच्चों के लिये फ्री एंट्री! निदेशक संजय कुमार बिसवाल का कहना है कि दो से आठ अक्टूबर तक बच्चों के लिए चिड़ियाघर में मुफ्त एंट्री है. By ETV Bhar…

सौजन्य से:- ETV Bharat
यूपी में वन्य जीव सप्ताह; लखनऊ जू में रंगोली के जरिए खास संदेश दे रहे मासूम, बच्चों के लिये फ्री एंट्री!
निदेशक संजय कुमार बिसवाल का कहना है कि दो से आठ अक्टूबर तक बच्चों के लिए चिड़ियाघर में मुफ्त एंट्री है.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : October 7, 2026 at 11:38 PM IST
लखनऊ : अगर आप इस सप्ताह अपने बच्चों के साथ कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जेब से पैसे निकालने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है. उत्तर प्रदेश का वन विभाग दो अक्टूबर से आठ अक्टूबर तक पूरे राज्य में वन्य जीव सप्ताह मना रहा है. इस खास मौके पर यूपी के प्रमुख चिड़ियाघरों और अभ्यारण्य में स्कूली बच्चों के लिए एंट्री बिल्कुल फ्री है.
लखनऊ और कानपुर से लेकर गोरखपुर तक चिड़ियाघर को नए रंग रूप से सजाया गया है और कई मेहमान स्वागत के लिए तैयार हैं. बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे चिड़ियाघर घूमने आ रहे हैं और जानवरों का दीदार कर रहे हैं. विभिन्न तरह के प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही हैं जो दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही हैं. बड़ी संख्या में हर रोज स्कूल के बच्चे इन प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं जानवरों को देखकर तो उनका उत्साह चरम पर ही पहुंच रहा है.
क्या कहते हैं प्राणि उद्यान के निदेशक? : नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के निदेशक संजय कुमार बिसवाल का कहना है कि दो अक्टूबर से आठ अक्टूबर तक बच्चों के लिए चिड़ियाघर में मुफ्त एंट्री है. इस दौरान लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हम विभिन्न तरह के आयोजन कर रहे हैं.
"आयोजित की जा रही हैं प्रतियोगिताएं" : उन्होंने बताया कि विभिन्न तरह की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही हैं. पपेट शो कराया गया है. बुक स्टॉल लगाए गए हैं जिससे वन्य जीवों के प्रति लोग जागरुक हो सकें. इसके अलावा जहां तक भीड़ में वन्यजीवों की सुरक्षा का सवाल है या जो भी लोग आ रहे हैं उनकी सुरक्षा को लेकर जहां तक बात है तो कई विभाग मिलकर काम कर रहे हैं.
"साफ सफाई का ध्यान रखें" : उन्होंने बताया कि इनमें पुलिस विभाग, यातायात विभाग और नगर निगम को भी साथ लिया गया है. नगर निगम चिड़ियाघर तक पहुंचने में किसी तरह की दिक्कत न हो और साफ सफाई का ध्यान रखें, उसकी जिम्मेदारी है. सुरक्षा के लिए पुलिस मौजूद है, साथ ही जाम की स्थिति न पैदा होने पाए इसलिए यातायात पुलिस को भी साथ में लिया गया है. इसके अलावा हमारे जो कर्मचारी हैं उन्हें 10 दिन की छुट्टी के लिए पूरी तरह से मना किया गया है, जिससे यहां पर देखभाल बेहतर तरीके से हो सके.
"वन्य जीव लाने की तैयारी" : उन्होंने बताया कि जहां तक बात नए वन्य जीव को लाने की है तो अभी तो फिलहाल नए वन्य जीव नहीं लाए गए हैं. लेकिन हमारी बात चल रही है. व्हाइट मादा टाइगर जल्द लाएंगे. हिप्पो को लाने की तैयारी है. इसके अलावा हुक्कू बंदर के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह अभी संभव नहीं हो पाया है. प्रयास जारी है. गैंडा को लेकर अभी कोई बात नहीं बन पा रही है, इसलिए चिड़ियाघर में नहीं है. विदेश से जानवर लाने की भी कोई बात नहीं चल रही है.
क्या कहते हैं बाड़े के कीपर? : कीपर रामवीर का कहना है कि जब ज्यादा भीड़ हो जाती है तो जानवर भी परेशान होने लगते हैं. उनके स्वभाव में परिवर्तन आ जाता है. वे गुमसुम से होने लगते हैं. हालांकि अब जो लोग टिकट लेकर यहां आते हैं उनकी तो ख्वाहिश यही होती है कि उन्हें सभी जानवर देखने को मिलें, लेकिन भीड़ में जब जानवर छुप जाते हैं तो उन्हें भी मायूसी होती है.
"दर्शकों को मायूस नहीं होना पड़ता" : उन्होंने कहा कि जहां तक बात सुरक्षा की है तो लगातार बाड़े के आस-पास हम चक्कर लगाते रहते हैं, जिससे कोई भी दर्शक वन्यजीवों को छेड़ने न पाए. बच्चों में वन्यजीवों को देखने का खास क्रेज होता है. इन दिनों बड़ी संख्या में बच्चे आ रहे हैं. जानवरों को देख रहे हैं. मौसम भी थोड़ा अच्छा हुआ इसलिए अब जानवर भी बाड़े से बाहर बैठते हैं, जिससे दर्शकों को मायूस नहीं होना पड़ता.
ईटीवी भारत ने लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में वन विभाग की तरफ से बच्चों को दी गई. इस खास सौगात को लेकर तमाम छोटे बच्चों उनके अभिभावक से बात की. इसके साथ ही बच्चों ने सेव वाइल्डलाइफ थीम पर जानवरों की एक से बढ़कर एक अद्भुत कलाकृति बनाईं जिसे देख दर्शक आश्चर्यचकित रहे. "ईटीवी भारत" की इस स्टोरी में देखिए कि किस तरह से इस सप्ताह को वन्य प्राणि उद्यान प्रशासन खास बना रहा है.
नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान इन दिनों सामान्य दिनों की अपेक्षा बिल्कुल अलग नजर आ रहा है. रोजाना ही बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे चिड़ियाघर में नजर आ रहे हैं. ऐसा हो भी क्यों नहीं, वजह है कि वन विभाग ने दो अक्टूबर से आठ अक्टूबर तक वन्य प्राणि सप्ताह के तहत पांच से 12 साल तक के बच्चों को चिड़ियाघर में मुफ्त प्रवेश का तोहफा दिया है. ऐसे में विभिन्न स्कूलों के बच्चे बड़ी संख्या में चिड़ियाघर घूमने आ रहे हैं.
विभिन्न स्कूलों के बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं. कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. सेव वाइल्डलाइफ थीम पर आयोजित हुई प्रतियोगिता में बुधवार को कलाकारों की एक से एक आकर्षक कलाकृतियां देखने को मिलीं. चिड़ियाघर घूमने आ रहे दर्शक जानवरों की रंगोली देखकर आश्चर्यचकित हो जा रहे हैं. किसी स्कूल के बच्चे ने टाइगर बनाया है तो किसी ने दीवारों पर तितली की पेंटिंग की है तो कोई चिंपांजी बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है.
पुरस्कार के साथ ही सर्टिफिकेट दिये जा रहे सर्टिफिकेट : इसके बाद बच्चे चिड़ियाघर के हर बाड़े में मौजूद जानवरों को देखकर खुद रोमांचित हो रहे हैं. जानवरों की रंगोली बनाकर स्कूली बच्चे से वाइल्डलाइफ का संदेश दे रहे हैं और मानव जीवन के लिए वन्य जीव कितने जरूरी हैं यह भी बताने का प्रयास कर रहे हैं. विभिन्न प्रतियोगिता में जीतने वाले बच्चों को वन विभाग की तरफ से पुरस्कार के साथ ही सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जा रहे हैं. निबंध लेखन, पेंटिंग, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी कॉम्पटीशन में बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूलों के बच्चे पार्टिसिपेट कर रहे हैं.
टिकट की दर निर्धारित : नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में वयस्कों के लिए ₹100 और बच्चों के लिए ₹50 टिकट की दर निर्धारित है. 12 साल से अधिक को वयस्क की श्रेणी में रखा गया है, जबकि पांच से 12 वर्ष तक के आयुवर्ग को बच्चों की श्रेणी में. किसी स्कूल के 50 या उससे अधिक छात्र हैं तो टिकट में 10% तक की छूट प्रदान की जाती है, साथ ही 10 परसेंट की अतिरिक्त छूट भी मिलती है.
टॉय ट्रेन का भी ले सकते हैं लुत्फ : चिड़ियाघर में बच्चों के साथ ही वयस्कों के लिए भी टॉय ट्रेन मौजूद है. सुबह 9:00 बजे से ही ट्रेन चंद्रपुरी रेलवे स्टेशन से चलने लगती है और शाम 5:00 बजे तक चलती है. वयस्क का किराया ₹20 और बच्चे का किराया ₹10 तय है. अगर ग्रुप में ट्रेन की बुकिंग होती है तो 5100 रुपये में दो घंटे के लिए पूरी ट्रेन बुक की जा सकती है. अधिकतम 50 लोग इस ट्रेन में बैठ सकते हैं.
किस मौसम में कितने बजे खुलता और बंद होता है चिड़ियाघर? : लखनऊ का प्राणी उद्यान फरवरी से लेकर अप्रैल माह तक सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुलता है. मई से जुलाई तक सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 तक, अगस्त से अक्टूबर सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे तक और नवंबर से जनवरी तक सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुलता है.
लखनऊ चिड़ियाघर का इतिहास : लखनऊ का नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान बेहद ही खूबसूरत है. शहर के बीचों बीच स्थित इस चिड़ियाघर में लखनऊ ही नहीं, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के पर्यटक वन्यजीवों का दीदार करने आते हैं. इस प्राणी उद्यान का खास इतिहास है. भले ही इसका नाम नवाब वाजिद अली शाह के नाम पर हो, लेकिन इसकी स्थापना एक अंग्रेज ने की थी. साल 1921 में अंग्रेजी शासन काल के दौरान प्रिंस ऑफ वेल्स का लखनऊ में आगमन हुआ था.
29 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है : वह वन्यजीवों से काफी प्यार करते थे. उनके इसी लगाव को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर ने 29 नवंबर 1921 में बनारसी बाग को वन्य जीव प्राणी उद्यान बना दिया था. उस समय इस चिड़ियाघर का नाम प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डन रखा गया था. 11 साल पहले इसका नाम बदलकर अवध के नवाब वाजिद अली शाह के नाम पर रख दिया गया. लखनऊ का वन्य जीव प्राणि उद्यान 29 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है. 105 साल से भी ज्यादा यह चिड़ियाघर पुराना हो चुका है.
152 बाड़ों में रखे गए 1000 से ज्यादा वन्यजीव : वन्यजीवों के रखरखाव के लिए इसमें 152 बाड़े हैं. 100 से अधिक प्रजातियां हैं और 1000 से ज्यादा वन्यजीवों को यहां रखा गया है. व्हाइट टाइगर, बंगाल टाइगर, शेर, मगरमच्छ, घड़ियाल, हिरण, लोमड़ी, गिलहरी, तोता, सांप, दरियाई घोड़ा, तेंदुआ, लकड़बग्घा चिंपांजी, तितली जैसे प्रजातियां यहां मौजूद हैं, जो दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. रोजाना तो चिड़ियाघर में बड़ी संख्या में दर्शन जानवरों का दीदार करने आते ही हैं, लेकिन दो अक्टूबर से लेकर आठ अक्टूबर तक वन विभाग की तरफ से पांच से 12 साल तक के बच्चों को मुफ्त चिड़ियाघर की सैर के लिए सौगात दी गई तो इन दिनों बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे चिड़ियाघर आ रहे हैं.
क्या कहते हैं बच्चे? : विभिन्न स्कूलों से चिड़ियाघर घूमने आए तमाम नन्हे-मुन्ने बच्चों ने ईटीवी भारत से बात की और अपने अनुभव साझा किए. पहली बार वन्यजीवों को देखकर वे रोमांचित हुए. बंदर, भालू, शेर, चीता, मगरमच्छ और हिरण देखकर वह काफी रोमांचित हुए. "ईटीवी भारत" से बातचीत करते हुए उनका कहना है कि इन पेंटिंग्स के जरिए हम यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर वन्य जीव सुरक्षित रहेंगे तभी मानव जीवन भी बेहतर हो सकेगा. समाज के लिए वन्य जीव बेहद आवश्यक है. प्रकृति बिना वन्य जीवों के संचालित नहीं हो सकती है, इसीलिए हम सभी का यह दायित्व है कि वन्यजीवों की सुरक्षा करें.
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