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हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस को लगाई फटकार: गैरकानूनी हिरासत पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार, दिए रिहाई के आदेश

हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस को लगाई फटकार: गैरकानूनी हिरासत पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार, दिए रिहाई के आदेश कोर्ट ने प्रक्रियात्मक खामियों पर पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए याची को तुरंत रिहा करने का आदेश द…

ETV Bharat के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 06:04 pm बजे
हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस को लगाई फटकार: गैरकानूनी हिरासत पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार, दिए रिहाई के आदेश

सौजन्य से:- ETV Bharat

हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस को लगाई फटकार: गैरकानूनी हिरासत पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार, दिए रिहाई के आदेश

कोर्ट ने प्रक्रियात्मक खामियों पर पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए याची को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : October 7, 2026 at 10:17 PM IST

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को नोएडा पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त रुख अपनाया. अदालत ने एक व्यक्ति की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर लिया. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने पुलिस के तरीके को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया. कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के सहायक पुलिस आयुक्त और एसएचओ को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको शर्म आनी चाहिए.

एफआईआर दर्ज होने से पहले ही ले लिया हिरासत में: यह पूरा मामला गौतम बुद्ध नगर के फेज-II थाने में दर्ज एक घटना से जुड़ा हुआ है. गत 23 अगस्त को दो गुटों के बीच हिंसा के बाद दीपक नामक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया था. रिकॉर्ड से साफ हुआ कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही याची पुलिस की कस्टडी में था. इसके बाद उसे उसी एफआईआर में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाकर अपनी प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि एफआईआर में उसका नाम तक दर्ज नहीं था.

नोटिस जारी करने की टाइमिंग पर उठे सवाल: हाईकोर्ट ने बीएनएसएस की धाराओं के तहत दिए गए नोटिस के समय पर गहरी आपत्ति जताई. कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 24 अगस्त को नोटिस जारी किया, जबकि याची को एक दिन पहले ही 23 अगस्त को हिरासत में ले लिया गया था. कोर्ट ने सवाल उठाया कि हिरासत में लेने के बाद नोटिस कैसे जारी किया जा सकता है. इस गड़बड़ी पर जवाब देने के लिए एसीपी-2 डीएसपी कमलेश कांत को संबंधित दस्तावेजों के साथ खुद कोर्ट में पेश होना पड़ा.

अदालत ने दिए याची को तुरंत रिहा करने के आदेश: अदालत ने पाया कि पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार भी नहीं दिया था. इसके अलावा जमानत प्रक्रिया के कागजी दस्तावेजों में कई तरह की बड़ी विसंगतियां और फर्जीवाड़ा नजर आया. रिहाई का आदेश होने के बावजूद उसे लगातार पुलिस नियंत्रण में रखा गया था. इन तमाम गैरकानूनी कदमों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी कर दिया.

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