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मानसून अब 50 दिन बाद यूपी से विदा होगा, मौसम विभाग के अनुमान से जानें बरसात का हाल - the monsoon will now withdraw from up in 50 days find out the rainfall outlook based on the meteorological department forecast

मानसून अब 50 दिन बाद यूपी से विदा होगा, मौसम विभाग के अनुमान से जानें बरसात का हाल पूर्वांचल और वाराणसी में मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद यह सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश से विदा हो जाएगा। अलन…

jagran.com के अनुसार15 अगस्त 2026 को 05:55 pm बजे
मानसून अब 50 दिन बाद यूपी से विदा होगा, मौसम विभाग के अनुमान से जानें बरसात का हाल
 - the monsoon will now withdraw from up in 50 days find out the rainfall outlook based on the meteorological department forecast

सौजन्य से:- jagran.com

मानसून अब 50 दिन बाद यूपी से विदा होगा, मौसम विभाग के अनुमान से जानें बरसात का हाल

पूर्वांचल और वाराणसी में मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद यह सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश से विदा हो जाएगा। अलनीनो के प्रभाव ...और पढ़ें

HighLights

- मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक यूपी से विदा होगा।

- अलनीनो के बावजूद कई जगह औसत बारिश हुई।

- विदाई से पहले की बारिश किसानों के लिए महत्वपूर्ण।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वांचल और वाराणसी में मानसून का प्रभाव आमतौर पर साढ़े तीन महीने तक बना रहता है। यह मानसून पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 जून के बाद से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक सक्रिय रहता है।

इस दौरान मानसून स्थानीय हीटिंग और द्रोणिका की स्थितियों के अनुसार उत्तर भारत में बारिश कराता है। अब मानसून का मध्य समय आ चुका है और अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूर्वांचल के रास्ते सोनभद्र जिले से होकर यह उत्तर प्रदेश से पूरी तरह विदाई ले लेगा।

इस बार अलनीनो के प्रभाव के कारण बारिश कम होने की आशंका थी, लेकिन कई स्थानों पर औसत के करीब बारिश हो चुकी है। अब मानसून का आधा सीजन यानी लगभग 50 दिन का समय शेष है। इस लिहाज से मानसून अब चरम पर आने के बाद केवल डेढ़ माह का समय ही शेष है। मानसून अब सितंबर के अंत तक या अक्टूबर के शुरुआती कुछ दिनों तक ही प्रभावी रहेगा। इस दौरान मानसूनी बारिश खेत खलिहानों को राहत प्रदान करेगी।

हालांकि, मौसम विभाग लगातार मानसूनी बारिश का अनुमान लगा रहा है, लेकिन स्थानीय हीटिंग और द्रोणिका की स्थितियां ही पूर्वांचल में राहत दे रही हैं। जब मानसून विदाई की ओर बढ़ेगा, तो यह पाकिस्तान से होते हुए राजस्थान और दिल्ली के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पहले वापस होगा और फिर अक्टूबर के पहले सप्ताह में पूर्वांचल के सोनभद्र जिले के रास्ते उत्तर प्रदेश से पूरी तरह विदा हो जाएगा।

इस वर्ष मानसून की विदाई के समय वातावरण में बादलों की आवाजाही का रुख बना हुआ है। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ के रूप में देखने को मिल रहा है। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि मानसून की विदाई के बाद खेती-किसानी के लिए यह कितना लाभकारी सिद्ध होगा।

इस समय, किसानों को मानसूनी बारिश का इंतजार है, जो उनकी फसलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की विदाई के बाद भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी, जो फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

इस प्रकार, मानसून का यह अंतिम चरण किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी फसलों की स्थिति को निर्धारित करेगा। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है, जो कृषि क्षेत्र के लिए राहत का कारण बनेगी। मानसून का यह समय उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी विदाई से पहले की बारिश उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

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