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चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों में उछाल, गन्ना किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद - ChiniMandi

बिजनौर: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चीनी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने गन्ना किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। किसानों को उम्मीद है कि, राज्य सरकार इस बार गन्ने का मूल्य बढ़ाकर उन्हें ब…

ChiniMandi के अनुसार12 अगस्त 2026 को 06:18 am बजे
चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों में उछाल, गन्ना किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद - ChiniMandi

सौजन्य से:- ChiniMandi

बिजनौर: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चीनी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने गन्ना किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। किसानों को उम्मीद है कि, राज्य सरकार इस बार गन्ने का मूल्य बढ़ाकर उन्हें बेहतर भुगतान दे सकती है। थोक बाजार में चीनी की कीमत लगभग 4,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जो पिछले सात वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।

गन्ना किसानों की नजर चीनी बाजार पर

उत्तर प्रदेश में गन्ना प्रमुख नकदी फसल है और अकेले बिजनौर जिले में लगभग 2.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है। किसान चीनी के बाजार भाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति और किसानों को समय पर भुगतान करने की क्षमता सीधे प्रभावित होती है। चूंकि अगले वर्ष चुनाव होने हैं, इसलिए किसानों को उम्मीद है कि चीनी की मजबूत कीमतों का लाभ उन्हें गन्ने के बढ़े हुए समर्थन मूल्य के रूप में मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने का मूल्य तय करती है, जबकि चीनी मिलें अपने भुगतान का बड़ा हिस्सा चीनी बिक्री से प्राप्त आय पर निर्भर करती हैं।

उत्पादन घटने से चीनी के दाम मजबूत

कई वर्षों तक चीनी की कीमतें लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल या उससे नीचे बनी रहीं। उस समय गन्ने का उत्पादन बढ़ने से चीनी का उत्पादन और भंडार दोनों बढ़ गए थे, जिससे बाजार पर दबाव बना। इसी कारण मिलों ने चीनी उत्पादन कम करने के लिए एथेनॉल और अन्य विकल्पों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। अब स्थिति बदल चुकी है। गन्ने का उत्पादन घटने, चीनी का स्टॉक कम होने और गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में जाने से चीनी की कीमतों को मजबूती मिली है। केंद्र सरकार द्वारा चीनी निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद थोक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यदि मांग इसी तरह बनी रही तो मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है।

कम स्टॉक से किसानों की उम्मीदें बढ़ीं

बिजनौर की चीनी मिलों में इस समय लगभग 20.62 लाख क्विंटल चीनी का भंडार बचा है, जबकि पिछले वर्ष यह 35.50 लाख क्विंटल था। कम स्टॉक की स्थिति मजबूत मांग के बीच चीनी की कीमतों को और सहारा दे सकती है। जिले की मिलों ने इस सीजन में 90,86,458 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया और उनके पास 20,62,856 क्विंटल चीनी शेष है। इन आंकड़ों में चांदपुर चीनी मिल शामिल नहीं है।इस वर्ष बिजनौर की मिलों में पिछले सीजन की तुलना में लगभग 1.30 करोड़ क्विंटल कम गन्ने की पेराई हुई। गन्ने का उत्पादन घटने और पारंपरिक कोल्हू व क्रशरों को अधिक बिक्री होने के कारण मिलों को कम गन्ना मिला, जिससे चीनी उत्पादन भी कम हुआ।

खुदरा बाजार में भी बढ़ी कीमत

खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 52 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे अधिक पहुंच चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा, क्योंकि कुल चीनी खपत में उनकी हिस्सेदारी छह प्रतिशत से भी कम है।

किसानों और मिलों ने जताई उम्मीद

भारतीय किसान यूनियन (गैर-राजनीतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि, पिछले वर्षों की तुलना में इस समय चीनी के दाम काफी बेहतर हैं और मिलें लाभ की स्थिति में हैं। ऐसे में सरकार को गन्ने का मूल्य इस स्तर पर तय करना चाहिए जिससे किसान गन्ने की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हों। वहीं, बिजनौर शुगर मिल के इकाई प्रमुख रविंद्र शुक्ला ने कहा कि, इस वर्ष चीनी की कीमतों में सुधार हुआ है, लेकिन उत्पादन लागत को देखते हुए अभी और बढ़ोतरी की गुंजाइश है। बेहतर चीनी कीमतों से मिलों को किसानों का गन्ना भुगतान तेजी से करने में मदद मिलेगी।

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