यूपी विधानसभा चुनाव: महिलाओं पर दांव, 40 हजार बनाम 50 हजार की तरफ चली सियासत, सपा और भाजपा ने किए ये प्रयोग
यूपी विधानसभा चुनाव: महिलाओं पर दांव, 40 हजार बनाम 50 हजार की तरफ चली सियासत, सपा और भाजपा ने किए ये प्रयोग UP Assembly Elections: यूपी में चुनाव नजदीक आने के साथ महिला वोटरों पर दांव लगाना शुरू हो गया है। सपा और भाजपा द…

सौजन्य से:- Amar Ujala
यूपी विधानसभा चुनाव: महिलाओं पर दांव, 40 हजार बनाम 50 हजार की तरफ चली सियासत, सपा और भाजपा ने किए ये प्रयोग
UP Assembly Elections: यूपी में चुनाव नजदीक आने के साथ महिला वोटरों पर दांव लगाना शुरू हो गया है। सपा और भाजपा दोनों पार्टियों ने इस पर दांव लगाना शुरू कर दिया है।
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विधानसभा चुनाव 2027 में अभी छह महीने से ज्यादा समय है लेकिन इसके लिए बिसात तेजी से सजने लगी है। इस बार महिला मतदाता मुकाबले का अहम केंद्र बनती दिख रही हैं। भाजपा पहले से ही महिला लाभार्थियों का बड़ा आधार तैयार कर चुकी है तो सपा सीधे आर्थिक मदद के वादे के साथ इसमें सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। साफ है कि 2027 का चुनाव महिलाओं के लिए योजनाओं व घोषणाओं की प्रतिस्पर्धा का चुनाव बन सकता है।
चुनाव नजदीक आते देख भाजपा सरकार ने अपने संकल्प पत्र में शामिल महिलाओं से जुड़े वादों को पूरा करो की रफ्तार बढ़ा दी है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त बस यात्रा का एलान किया और बुधवार को इसे लागू कर दिया। हर साल की तरह इस बार भी रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का एलान किया है। नवंबर 2026 तक स्नातक की बेटियों के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना लागू करने की घोषणा की है।
वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे बढ़ाकर संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी आधी आबादी को पूरी तवज्जो दे रही है। सपा ने महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं करना शुरू कर दिया है। बुधवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई घोषणाओं से साफ है कि सपा ने युवाओं व महिलाओं को चुनावी एजेंडे के केंद्र में रखना शुरू कर दिया है।
चुनावी जंग में दोनों दलों के लिए आधी आबादी इतनी अहम हो गई हैं कि भाजपा सरकार की ओर से जहां महिलाओं को 50 हजार रुपये देने की चर्चा शुरू हुई तो सपा ने सत्ता में आने पर महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने की घोषणा कर दी। इससे चुनावी मुकाबला 40 बनाम 50 हजार की लड़ाई में तब्दील हो सकता है।
भाजपा के पास मौजूदा योजनाओं और लाभार्थी नेटवर्क का लाभ है। पार्टी महिला सुरक्षा, उज्ज्वला, आवास, शौचालय, बैंक खाते और प्रत्यक्ष लाभ जैसी योजनाओं के जरिये महिला मतदाताओं तक अपनी पहुंच का दावा करती है। अब भाजपा इनके साथ बड़ा प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जोड़कर पुराने लाभार्थी आधार को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। सपा की चुनौती और अवसर अलग हैं। उसे अपने पारंपरिक पीडीए समीकरण के साथ महिलाओं को जोड़ना है।
निर्णायक शक्ति बन सकती है आधी आबादी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 की लड़ाई में असली मुकाबला ₹40 हजार और संभावित ₹50 हजार का नहीं, बल्कि भरोसे, लाभार्थी अनुभव और भविष्य की उम्मीद का होगा। भाजपा अपनी योजनाओं के जरिये कहेगी जो दिया, वह जमीन पर दिया। सपा का जवाब होगा.. जो नहीं मिला, वह हम देंगे। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की आधी आबादी इस बार चुनावी गणित की निर्णायक शक्ति बन सकती है।
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