छात्राओं को लैपटॉप और साइकिल, महिलाओं को 40 हजार रुपये, अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव के लिए किए ये ऐलान
अखिलेश यादव ने वादा किया कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तो महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये, इंटर पास छात्राओें को लैपटॉप और स्कूल की छात्राओं को साइकिल दी जाएगी। लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बुधवार को म…

सौजन्य से:- Navbharat Times
अखिलेश यादव ने वादा किया कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तो महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये, इंटर पास छात्राओें को लैपटॉप और स्कूल की छात्राओं को साइकिल दी जाएगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बुधवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जहां 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए यूपी रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा वाली ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ की घोषणा की वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी महिलाओं के कल्याण के लिए कई चुनावी वादे किए। अखिलेश यादव ने यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये देने, इंटरमीडिएट पास करने वाली छात्राओं को लैपटॉप देने और स्कूल छात्राओं को साइकिल देने का वादा किया।
सभी दलों की नजर महिला वोटरों पर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होने की संभावना है। चुनाव में अभी सात-आठ माह बाकी हैं, लेकिन राज्य में चुनावी घोषणाओं और वादों का दौर अभी से शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी प्रमुख दलों की नजरें आधी आबादी, यानी महिला और युवा वोटरों पर हैं। राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा सुविधा शुरू कर दी है।
पीडीए में 'पी' को प्रोटेस्ट बताया
समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति वैसे को जाति आधारित पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर केंद्रित है, लेकिन बुधवार को उन्होंने सत्ता पक्ष से मुकाबले के लिए जातियों के बजाय लैंगिक आधार पर आधी जनसंख्या को आकर्षित करने के लिए चुनावी वादे किए। अखिलेश यादव ने 'पीडीए' की परिभाषा समय-समय पर बदलते भी रहते हैं। उन्होंने आज कहा कि, 'जो पीड़ित है, दुखी है, जो अपमानित हो रहा है, वह पीडीए (PDA) है। हम जितनी दया, अपनापन दिखाएंगे, उतना ही पीडीए के लोगों को जोड़ने का काम करेंगे। पीडीए में जो 'पी' है वह प्रोटेस्ट भी है।'
अखिलेश यादव ने कहा कि, 'बिना आधी आबादी के हमारी तरक्की अधूरी है। पहले समाजवादी सरकार में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जो फैसले लिए गए थे, आज भी उत्तर प्रदेश सरकार और देश के लिए उदाहरण बने हुए हैं। हाल ही में जापान का जब एक डेलिगेशन आया तो उसको वही 1090, जो कभी समाजवादी सरकार में शुरू हुआ था, को दिखाकर सरकार ने यह बताना चाहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए वह क्या काम कर रही है।'
स्त्री समृद्धि सम्मान योजना मैनिफेस्टो में शामिल होगी
सपा अध्यक्ष ने कहा कि, 'मैं अपनी माताओं-बहनों को और आधी आबादी को यह भरोसा दिला सकता हूं कि स्त्री समृद्धि सम्मान योजना को हम मैनिफेस्टो में लाने का काम करेंगे और उनकी सुरक्षा को लेकर कोई भी समझौता समाजवादी सरकार में नहीं होगा। स्त्री समृद्धि सम्मान योजना आधी आबादी की पूरी आजादी का संकल्प है। उन्हें हर साल 40 हजार रुपये देकर आगे बढ़ाने का काम समाजवादी सरकार में होगा।'
छात्राओं को दिए जाएंगे लैपटॉप
अखिलेश यादव ने कहा कि, 'बंद किए गए 26 हजार प्राइमरी स्कूल पुनः शुरू किए जाएंगे। छात्राओं को पहले भी साइकिल दी है, भविष्य में भी साइकिल मिलेगी।' उन्होंने कहा कि, 'आजकल सब कुछ स्क्रीन से शुरू होता है। पहले भी समाजवादी पार्टी ने लैपटॉप बांटकर दिखाया था। जो पढ़ने वाले बच्चे थे उनको लैपटॉप दिया था। जो समाजवादी सरकार में लैपटॉप मिला था वह आज भी चल रहा होगा। उस समय जब टेक्नालॉजी के माध्यम से इतना कुछ नहीं चल रहा था, उस समय समाजवादी पार्टी ने लैपटॉप दिए थे। भविष्य में इंटरमीडिएट पास करने वाली बेटी को लैपटॉप देकर आगे बढ़ने का मौका समाजवादी सरकार में दिया जाएगा। '
महिला आरक्षण देने में देरी क्यों?
अखिलेश यादव ने कहा कि, 'भारतीय जनता पार्टी के लिए तो नारी केवल नारा बनकर रह गई है। महिला आरक्षण पास हो चुका है, भारतीय जनता पार्टी क्यों देरी कर रही है, उसको अगले चुनाव में लागू किया जाए। जब रक्षा बंधन के त्योहार पर आप बस चला रहे हो और भी योजनाएं लागू करने का बहाना कर रहे हो, तो महिला आरक्षण लागू करने का भी काम किया जाए।'
बेटियों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय यूपी में
अखिलेश यादव ने कहा कि, 'भाजपा के लोग नारी वंदन की बात बहुत करते हैं। जब वे नारी वंदन की बात करें तो भाजपा के लोगों को याद दिलाईए हाथरस की बेटी। किस तरह से मां-बेटी को जिंदा जला दिया था। वो तस्वीर भी कोई नहीं भूला होगा कि एक बेटी अपनी किताबों को लेकर भाग रही थी, जब उसका घर गिर रहा था। वह बात कोई भी नहीं भूला होगा कि जब एक अग्निकांड में मां के सामने हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री कह रहे थे कि हम भाषण सुनने के मूड में नहीं हैं, किस तरह से खुशी दुबे को जेल भेजकर अपमानित करने का काम किया गया। आंकड़े बताते है सबसे ज्यादा अन्याय बेटियों के ऊपर उत्तर प्रदेश में हो रहा है।'
लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।
सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।
सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।
पत्रकारिता अनुभव
सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।
सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।
सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।
अवॉर्ड/अचीवमेंट्स
बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें
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