होम›खेल›गोरखपुर में स्थापित होगा एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज; चिन्हित की गई 35 एकड़ जमीन
खेल

गोरखपुर में स्थापित होगा एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज; चिन्हित की गई 35 एकड़ जमीन

गोरखपुर में स्थापित होगा एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज; चिन्हित की गई 35 एकड़ जमीन निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) का चयन किया गया है. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team…

ETV Bharat के अनुसार8 अक्टूबर 2026 को 04:04 am बजे
गोरखपुर में स्थापित होगा एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज; चिन्हित की गई 35 एकड़ जमीन

सौजन्य से:- ETV Bharat

गोरखपुर में स्थापित होगा एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज; चिन्हित की गई 35 एकड़ जमीन

निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) का चयन किया गया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : October 8, 2026 at 8:58 AM IST

गोरखपुर: पर्यटन और उद्योग के क्षेत्र में प्रगति करता गोरखपुर अब मत्स्य उत्पादन और इसके अध्ययन के क्षेत्र का भी बड़ा केंद्र बनेगा. योगी सरकार प्राकृतिक जलीय संपदा से समृद्ध पूर्वी उत्तर प्रदेश को 'नीली क्रांति' का सबसे बड़ा केंद्र बनाने का कदम बढ़ा चुकी है. इसी क्रम में गोरखपुर में 35 एकड़ में एक्वा पार्क और फिशरीज कॉलेज खोला जाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, गोरखपुर को मत्स्य उत्पादन, उच्च वैज्ञानिक शोध, विशिष्ट अकादमिक शिक्षा और संगठित विपणन के एक एकीकृत अंतर-क्षेत्रीय हब के रूप में इस केंद्र को विकसित करने को लेकर प्लान किया जा रहा है.

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विश्वस्तरीय फिशरीज कॉलेज, इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर और अत्याधुनिक एक्वा पार्क एवं मॉडल फिश मंडी की स्थापना की रूपरेखा तय हो गई है. यह केंद्र गोरखपुर-वाराणसी रूट पर निर्माणाधीन इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बगल में ताल कंदला में बनाया जाएगा.

मत्स्य विभाग के उप निदेशक बृजेश कुमार ने बताया कि पूर्वांचल में पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक और उद्यम का रूप देने के लिए पूर्णकालिक मत्स्य महाविद्यालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी. इसके अब धरातल पर उतारने के लिए लगभग सभी औपचारिकता पूरी कर ली है.

फिशरीज कॉलेज खोलने के लिए प्रशासन ने ताल नदौर क्षेत्र में 35 एकड़ भूमि चिह्नित की है. प्रस्तावित फिशरीज कॉलेज में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मत्स्य विज्ञान के लिए बीएफएससी/एमएफएससी, जलीय जीव स्वास्थ्य प्रबंधन, आहार व पोषण तथा फिश प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम संचालित होंगे.

इससे स्थानीय युवाओं के लिए वैज्ञानिक मत्स्य पालन में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. साथ हीं पूर्वांचल के मत्स्य पालकों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिल सकेगा. फिशरीज कॉलेज के लिए लोक निर्माण विभाग की तरफ से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया जा चुका है.

गोरखपुर में मत्स्य विकास को लेकर प्रदेश कैबिनेट, अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था ‘वर्ल्ड फिश’ के साथ तीन वर्षीय समझौते को पहले ही हरी झंडी दिखा चुकी है. इसके तहत गोरखपुर के छपिया स्थित सरकारी हैचरी को अत्याधुनिक ब्रीडर हैचरी व इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर के रूप में रूपांतरित किया जाना है.

मत्स्य पालकों को उनके द्वारा तैयार मछलियों की बिक्री एक महत्वपूर्ण पहलू है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए गोरखपुर के ताल कंदला में मॉडल होलसेल फिश मंडी और एकीकृत एक्वा पार्क की रूपरेखा तय की गई है.

जमीन का सर्वे हो चुका है और निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) का चयन किया गया है. इस परियोजना के तहत मछलियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट की व्यवस्था होगी.

यहां अत्याधुनिक कटिंग, पैकेजिंग और हाइजीनिक सेलिंग प्लेटफॉर्म भी होंगे. इस प्रोजेक्ट के पूर्ण होने पर गोरखपुर सहित आसपास के जिलों, पड़ोसी राज्य बिहार और नेपाल सीमा तक एक सुव्यवस्थित कोल्ड-चेन नेटवर्क स्थापित हो सकेगा.

मत्स्य विभाग के उप निदेशक बताते हैं कि प्रस्तावित फिशरीज कॉलेज, वर्ल्ड फिश रिसर्च सेंटर और अत्याधुनिक एक्वा पार्क मिलकर गोरखपुर को मत्स्य क्षेत्र में शिक्षा, शोध, उत्पादन और बाजार का संपूर्ण मॉडल बनाएंगे. यह कदम न केवल मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि युवाओं को नीली क्रांति से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाएगा.

इस केंद्र की स्थापना को लेकर लगातार प्रयासरत उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद का कहना है कि उन्होंने मत्स्य पालकों के लिए जो सपना देखा था, वह इस केंद्र की स्थापना से पूरा होगा. इसकी चर्चा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से होने के साथ अब यह धरातल पर उतरने की तरफ अग्रसर है. करीब 200 करोड़ रुपए इस पर खर्च होगा.

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें