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कैंट के तत्कालीन इंस्पेक्टर पर दर्ज केस में चार्जशीट: प्रयागराज में कोर्ट के आदेश पर भी 14 महीने तक नहीं लिखी थी FIR, 8 महीने चली विवेचना - Prayagraj (Allahabad) News

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Dainik Bhaskar के अनुसार16 अगस्त 2026 को 01:56 am बजे
कैंट के तत्कालीन इंस्पेक्टर पर दर्ज केस में चार्जशीट:  प्रयागराज में कोर्ट के आदेश पर भी 14 महीने तक नहीं लिखी थी FIR, 8 महीने चली विवेचना - Prayagraj (Allahabad) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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कैंट के तत्कालीन इंस्पेक्टर पर दर्ज केस में चार्जशीट:प्रयागराज में कोर्ट के आदेश पर भी 14 महीने तक नहीं लिखी थी FIR, 8 महीने चली विवेचना

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प्रयागराज के कैंट थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। कोर्ट के आदेश के बावजूद एफआईआर दर्ज न करने और बार-बार आदेश के बाद भी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में पेश नहीं करने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। करीब आठ महीने चली विवेचना के बाद एसीपी ने आरोपों को सही पाया और कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

खास बात यह है कि प्रभारी पर कोर्ट के आदेश की अनदेखी के आरोप में उनके ही थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। स्पेशल जज, एससी-एसटी कोर्ट के आदेश पर 23 नवंबर 2025 को यह मुकदमा दर्ज किया गया था। अब विवेचना पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल होने से पुलिस महकमे में भी इस मामले की चर्चा है।

अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए मामला कैंट थाना क्षेत्र के राजापुर निवासी 25 वर्षीय दिनेश चंद्र गौतम से मारपीट और कथित जातिगत उत्पीड़न से जुड़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे दिनेश ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें सोनू यादव और हरिनाथ यादव के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद स्पेशल जज, एससी-एसटी कोर्ट ने मामले को संज्ञेय अपराध की प्रकृति का मानते हुए 21 सितंबर 2024 को कैंट पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था।

इस आदेश की प्रति कैंट थाने के पैरोकार ने 1 अक्टूबर 2024 को रिसीव भी कर ली थी। कोर्ट ने आदेश में एफआईआर दर्ज करने के साथ उसकी प्रति दो दिन के भीतर न्यायालय में पेश करने को कहा था। लेकिन आरोप है कि न एफआईआर दर्ज की गई और न ही कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट या एफआईआर की प्रति भेजी गई।

एक साल बाद पीड़ित फिर पहुंचा कोर्ट कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर दिनेश चंद्र गौतम ने 23 सितंबर 2025 को फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आदेश के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इस पर कोर्ट ने कैंट थाने से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी कि एफआईआर दर्ज की गई या नहीं।

इसके लिए 18 अक्टूबर 2025 तक का समय दिया गया, लेकिन तय तारीख तक पुलिस की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजी गई। इसके बाद अगली तारीख 4 नवंबर 2025 तय हुई। आरोप है कि इस तारीख तक भी कैंट थाने से अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में नहीं पहुंची।

घटना, जिसकी रिपोर्ट नहीं लिखी इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्ज केस की मूल वजह करीब साढ़े तीन साल पुरानी घटना थी। शिकायतकर्ता दिनेश चंद्र गौतम के मुताबिक 2 अप्रैल 2022 की रात करीब 10 बजे वह राजापुर मार्केट में प्रमिल टाइपिंग सेंटर के पास सब्जी लेने गए थे।

आरोप है कि इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर सोनू यादव और उसके रिश्तेदार हरिनाथ यादव ने पीछे से सरिया और लाठी से हमला कर दिया। दिनेश का आरोप है कि हमले के दौरान दोनों ने जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी। शोर मचाने पर दोनों मौके से भाग निकले।

112 पर फोन किया, अस्पताल में मेडिकल भी हुआ दिनेश के मुताबिक घटना के तत्काल बाद उन्होंने 112 पर फोन किया। पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। उन्हें बेली अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल कराया गया। इसके बाद उन्हें कैंट थाने ले जाया गया। दिनेश का आरोप है कि उन्होंने उसी रात कैंट थाने में लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।

इसके बाद उन्होंने 12 अप्रैल 2022 को आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि इसके बाद भी वह कैंट थाना और सीओ कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। करीब एक साल तक कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने 5 अप्रैल 2023 को पुलिस आयुक्त को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी। वहां से भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया।

आखिरकार न्यायालय ने 21 सितंबर 2024 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि इस आदेश के बाद भी कैंट पुलिस ने करीब 14 महीने तक मुकदमा दर्ज नहीं किया।

3 मौके मिले, फिर भी नहीं दी रिपोर्ट इस पूरे मामले में कोर्ट की ओर से कैंट पुलिस को एक नहीं बल्कि कई मौके दिए गए। पहले एफआईआर दर्ज कर उसकी प्रति दो दिन में कोर्ट में पेश करने का आदेश था। बाद में पीड़ित की शिकायत पर कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट मांगी। 13 अक्टूबर 2025 को आदेश देकर 18 अक्टूबर तक स्पष्ट रिपोर्ट देने को कहा गया कि एफआईआर दर्ज हुई या नहीं।

तय समय बीत गया, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई। इसके बाद 4 नवंबर 2025 की तारीख तय हुई। आरोप है कि तब भी कंप्लायंस रिपोर्ट कोर्ट में नहीं पेश की गई। इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया।

8 महीने चली विवेचना, आरोप सही मिले इंस्पेक्टर पर दर्ज मुकदमे की विवेचना करीब आठ महीने तक चली। विवेचना की जिम्मेदारी एसीपी सिविल लाइंस को दी गई थी। विवेचना के दौरान कोर्ट के आदेश, उसकी कैंट थाने में प्राप्ति, एफआईआर दर्ज न होने, अनुपालन रिपोर्ट नहीं भेजे जाने और बाद में न्यायालय की ओर से की गई कार्रवाई समेत पूरे घटनाक्रम की जांच की गई।

विवेचना के दौरान एसीपी ने एफआईआर में लगाए गए आरोपों को सही पाया। इसके बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर सुनील कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई।

23 महीने कैंट थाने के प्रभारी रहे सुनील कुमार 14 फरवरी 2024 से कैंट थाने के प्रभारी के रूप में तैनात थे। वह वर्ष 2006 में उप निरीक्षक के पद पर पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे और वर्ष 2022 में निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। करीब 23 महीने तक कैंट थाने की जिम्मेदारी संभालने वाले सुनील कुमार मूल रूप से सुल्तानपुर के रहने वाले हैं।

उनके कार्यकाल में कैंट थाना एक अन्य चर्चित मामले को लेकर भी सुर्खियों में आया था, जब एक नाबालिग छात्रा के अपहरण के बाद उसके प्रेमी पर उसकी हत्या का आरोप लगा था।

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