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यूपी में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर योगी सरकार का ऐक्शन, पनीर, घी-खोया समेत छह उत्पादों पर रोक

यूपी में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर योगी सरकार का ऐक्शन, पनीर, घी-खोया समेत छह उत्पादों पर रोक यूपी के लोगों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ को लेकर योगी सरकार ने सख्त ऐक्शन लिया है। योगी सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों की खरीद…

Hindustan के अनुसार15 अगस्त 2026 को 04:55 pm बजे
यूपी में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर योगी सरकार का ऐक्शन, पनीर, घी-खोया समेत छह उत्पादों पर रोक

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर योगी सरकार का ऐक्शन, पनीर, घी-खोया समेत छह उत्पादों पर रोक

यूपी के लोगों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ को लेकर योगी सरकार ने सख्त ऐक्शन लिया है। योगी सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों की खरीद और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। योगी सरकार के इस आदेश से डेयरी उत्पादों में हड़कंप मचा है।

Yogi Government: यूपी के लोगों की सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर योगी सरकार ने सख्त ऐक्शन लिया है। यूपी सरकार ने एनालॉग डेयरी के पनीर, घी, खोया समेत छह उत्पादों की खरीद और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सरकार ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे उत्पादों का न तो निर्माण होगा और न ही उनकी बिक्री की जाएगी। सरकार की ओर से जारी किए गए इस प्रतिबंध के दायरे में कई मुख्य और आम इस्तेमाल होने वाले डेयरी प्रोडक्ट भी शामिल हैं। सरकार के इस आदेश के बाद डेयरी संचालकों में हड़कंप मच गया है।

सरकार इस आदेश के बाद प्रदेश भर में नकली और मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी। साथ ही लोगों को शुद्ध दूध से बनी हुई चीजें उपलब्ध हो सकेंगी। बतादें कि प्रदेश भर के कई जिलों से नकली और मिलावटी प्रोडक्ट बेचे जाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसको देखते हुए सरकार ने प्रदेशभर में छापेमारी अभियान भी चलाया। इस अभियान में खाद्य विभाग ने दूध और उससे बने उत्पादों के गुणवत्ता की जांच की। ज्यादातर दुकानों से गुणवत्ता ठीक नहीं मिली थी।

खाद्य विभाग ने 25 इकाइयों पर की थी कार्रवाई

प्रदेश में दूध और दूध से बने पदार्थों, खासकर पनीर की गुणवत्ता जांचने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सघन अभियान चलाया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त द्वारा गठित 24 विशेष टीमों ने सूचना के आधार पर गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर की प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया और 25 इकाइयों पर कार्रवाई की थी। अनियमितताओं के मामले में छह एफआईआर भी दर्ज करवाई गई हैं। विभाग के मुताबिक अभियान के दौरान पाया गया कि तीन इकाइयां क्रियाशील नहीं हैं। कार्रवाई के दौरान पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के साथ ही स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह परिस्थितियों में निर्माण होता पाया गया। औद्योगिक रसायन, रिफाइंड तेल और पामोलिन तेल इस्तेमाल करने के अलावा अस्वच्छ जगह पर पनीर बनाने के लिए ही पांच एफआईआर हुई हैं। एक एफआईआर सरकारी काम में बाधा डालने के लिए भी दर्ज करवाई गई है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद में तीन व मथुरा में दो मामलों में एफआईआर हुई है। इसके अलावा सहारनपुर में भी एक एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

खाद्य नमूने और नष्ट सामग्री

जांच टीमों ने कुल 72 खाद्य नमूने इकट्ठा किए। इन नमूनों को आवश्यक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। विभाग ने बताया कि मानकों के विपरीत बनीं 7686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई, जिसकी कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री और खाद्य सामग्री बनाने में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण जब्त किए गए। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 4.75 लाख रुपये है।

लेखक के बारे में

Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट

पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर

यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका

(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर

आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और

डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।

लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल

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पत्रकारिता का सफर

हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब

एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो

उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने

करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में

प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी

है।

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