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सावधान! बाजारों में नकली पनीर की भरमार, यूपी में 7,686 किलोग्राम खाद्य विभाग ने कराया नष्ट; 6 FIR

जांच के दौरान पनीर बनाने में औद्योगिक प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। कई जगह खाद्य पदार्थों के निर्माण में साफ-सफाई के मानकों का भी पालन नहीं कि…

Navbharat Times के अनुसार15 अगस्त 2026 को 02:55 pm बजे
सावधान! बाजारों में नकली पनीर की भरमार, यूपी में 7,686 किलोग्राम खाद्य विभाग ने कराया नष्ट; 6 FIR

सौजन्य से:- Navbharat Times

जांच के दौरान पनीर बनाने में औद्योगिक प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। कई जगह खाद्य पदार्थों के निर्माण में साफ-सफाई के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था।

सबसे बड़ा आंकड़ा यह रहा कि अभियान के दौरान 7686 किलो खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई, जबकि 2131 किलो खाद्य सामग्री और अपमिश्रक जब्त किए गए। गंभीर मामलों में कुल छह एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं।

पनीर बनाने में केमिकल और तेल के इस्तेमाल का आरोप

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने निर्माण इकाइयों में इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे माल, तैयार उत्पाद और पनीर बनाने की प्रक्रिया की जांच की। इस दौरान कुछ इकाइयों में पनीर निर्माण के लिए औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों के इस्तेमाल के मामले सामने आए।इसके अलावा पामोलिन ऑयल और रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल से संबंधित अनियमितताएं भी पाई गईं। खाद्य सामग्री के निर्माण की परिस्थितियों में साफ-सफाई की कमी भी सामने आई।

अनियमितता मिलने के बाद संबंधित खाद्य सामग्री को मौके पर नष्ट कराया गया और अपमिश्रकों को जब्त किया गया।

7686 किलो माल नष्ट, 2131 किलो जब्त

अभियान के दौरान कुल 72 खाद्य नमूने लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नमूने निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। वहीं, अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ परिस्थितियों में निर्मित पाई गई 7686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई। इसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है।इसके अलावा 2131 किलोग्राम खाद्य सामग्री और अपमिश्रक जब्त किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4.75 लाख रुपये है। यानी पूरे अभियान में कुल 9817 किलो खाद्य सामग्री और अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

छह मामलों में FIR

कार्रवाई के दौरान पनीर निर्माण में औद्योगिक रसायनों तथा पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ बनाने से जुड़े पांच मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों को सरकारी कार्य करने से रोकने के मामले में भी एक एफआईआर दर्ज हुई। इस तरह कुल छह एफआईआर दर्ज की गई हैं।जिलेवार देखें तो गाजियाबाद में तीन और मथुरा में दो मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। सहारनपुर में भी अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई है।

72 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार

अभियान के दौरान लिए गए 72 खाद्य नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। फिलहाल इन नमूनों की अंतिम जांच रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट में यदि खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के विपरीत पाए जाते हैं तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?

पनीर और दूसरे दुग्ध उत्पाद रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं। ऐसे में इनके निर्माण में औद्योगिक रसायनों का इस्तेमाल या अस्वच्छ परिस्थितियों में उत्पादन उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ा मुद्दा है। फिलहाल विभाग की कार्रवाई के बाद असली तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट आने पर सामने आएगी। यदि लिए गए नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं तो संबंधित इकाइयों पर आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि दुग्ध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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