चीनी का उत्पादन घटने पर उठे सवाल, उत्तर प्रदेश में एथेनाल उत्पादन का भी दिख रहा असर - sugar production decreased in up impact of ethanol
चीनी का उत्पादन घटने पर उठे सवाल, उत्तर प्रदेश में एथेनाल उत्पादन का भी दिख रहा असर UP Sugar Production: उत्पादन घटने के पीछे गन्ने की उपज और मिलों को उपलब्ध होने वाले गन्ने की मात्रा में कमी के साथ रिकवरी दर में आई गिरा…

सौजन्य से:- Jagran
चीनी का उत्पादन घटने पर उठे सवाल, उत्तर प्रदेश में एथेनाल उत्पादन का भी दिख रहा असर
UP Sugar Production: उत्पादन घटने के पीछे गन्ने की उपज और मिलों को उपलब्ध होने वाले गन्ने की मात्रा में कमी के साथ रिकवरी दर में आई गिरावट प्रमुख कारणों में है।
HighLights
- गन्ना का रकबा बढ़ा, फिर भी सात वर्ष में 36.85 लाख टन घटा चीनी उत्पादन
- रकबा 26.79 से बढ़कर हुआ 29.51 लाख हेक्टेयर, रिकवरी 11.30 से घटकर 10.19 प्रतिशत पर
- सत्र 2019-20 में 126.37 लाख टन था चीनी उत्पादन, वर्ष 2025-26 में हुआ 89.52 लाख टन
- फसल की कम उपज और रिकवरी की दर में आई घटौती से कम हुई चीनी
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। गन्ना उत्पादन में देश के अव्वल राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में फसल का रकबा बढ़ने के बावजूद चीनी उत्पादन लगातार दबाव में है। पिछले सात वर्ष में फसल का रकबा तो बढ़ा है, परंतु उसके हिसाब से उपज और चीनी रिकवरी की दर ऊपर नहीं चढ़ी, ऐसे में उत्पादन भी घट रहा है।
प्रदेश में पिछले सात वर्ष में कुल चीनी उत्पादन में 36.85 लाख टन की कमी आई है। वर्ष पेराई सत्र 2019-20 में 126.37 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि पिछले पेराई सत्र 2025-26 में 89.52 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ। गन्ने के रकबे की बात करें तो 2019-20 में 26.79 लाख हेक्टयेर में खेती हुई थी और 2024-25 में रकबा 29.51 लाख हेक्टेयर था और 2025-26 में भी रकबा लगभग उतना ही रहा।
उत्पादन घटने के पीछे गन्ने की उपज और मिलों को उपलब्ध होने वाले गन्ने की मात्रा में कमी के साथ रिकवरी दर में आई गिरावट प्रमुख कारणों में है। गन्ने का कुछ हिस्सा खांडसारी व अन्य उत्पादों की ओर जाने और एथेनाल के लिए चीनी के डायवर्जन का भी चीनी उत्पादन पर असर पड़ा है। हालांकि चीनी मिलों के आंकड़ों के हिसाब से एथनाल उत्पादन में प्रदेश में गन्ना क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत से घटकर नौ प्रतिशत पर आ गई है।
सरकार जमाखोरी पर सख्त
चीनी के दाम बढ़ने की आशंकाओं के बीच सरकार प्रदेश भर में जमाखोरी रोकने को सख्ती कर रही है। देश में चीनी उत्पादन घटने को दाम बढ़ने की वजह बताया जा रहा है। प्रदेश की बात की बात करें तो पिछले पेराई सत्र के मुकाबले चीनी उत्पादन में लगभग तीन लाख टन की कमी आई है, परंतु सात वर्ष के आंकड़े देखें तो अंतर ज्यादा दिखता है।
लगातार घटा रकबा
आंकड़ों के अनुसार पेराई सत्र 2023-24 में गन्ने का रकबा 29.66 लाख हेक्टेयर पहुंच गया था। इसके बाद 2024-25 में 29.51 लाख हेक्टेयर रहा। वहीं इस दौरान रिकवरी में उतार-चढ़ाव रहा। चीनी रिकवरी की दर पेराई सत्र 2019-20 में बी-हेवी समेत रिकवरी 11.30 प्रतिशत थी। सत्र 2024-25 में 9.67 प्रतिशत पर आई और 2025-26 में बढ़कर 10.19 प्रतिशत हुई। यानी पिछले सत्र की तुलना में रिकवरी सुधरी, लेकिन 11.30 प्रतिशत स्तर से अभी भी पीछे है। इस बीच चीनी उत्पादन नीचे आता गया।
खांडसारी इकाइयों में इजाफा
चीनी उत्पादन के इस ट्रेंड के पीछे गन्ना उपज के कुछ हिस्से के चीनी मिलों के बजाय खांडसारी इकाइयों की ओर जाने की बात भी कही जाती है। प्रदेश में 380 खांडसारी इकाइयों को लाइसेंस मिले हैं और इनमें से 176 संचालित हो चुकी हैं। इन इकाइयों से किसानों को नकद भुगतान दिया जाता है, ऐसे में किसान इनको प्राथमिकता देते हैं। जबकि इन इकाइयों में रिकवरी रेट में दो से ढाई प्रतिशत की कमी आती है।
रकबा बढ़ने के बाद भी मौसम, गन्ने की गुणवत्ता और कुछ प्रमुख प्रजातियों में रोग का असर भी पेराई योग्य गन्ने की उपलब्धता को प्रभावित करता है। पेराई सत्र 2025-26 में कई मिलों ने गन्ने की कमी के कारण समय से पहले पेराई बंद करने की चिंता भी जताई थी। ऐसे में प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ाने के साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादन, मिलों तक गन्ने की उपलब्धता और रिकवरी सुधारने की भी चुनौती है।
सात वर्ष में ऐसे बढ़ा रकबा
पेराई सत्र - गन्ने का रकबा(लाख हेक्टेयर में)
2019-20 - 26.79
2020-21 - 27.40
2021-22 - 27.60
2022-23 - 28.53
2023-24 - 29.66
2024-25 - 29.51
2025-26 - 29 (अनुमानित)
सात वर्ष में रिकवरी दर और चीनी उत्पादन
पेराई सत्र रिकवरी दर(प्रतिशत में) चीनी उत्पादन(लाख टन में)
2019-20 11.30 126.37
2020-21 10.76 110.59
2021-22 10.03 101.98
2022-23 9.54 104.82
2023-24 10.61 104.13
2024-25 9.67 92.45
2025-26 10.19 89.52
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