होमराजनीतिवाराणसी में SIR से 4 लाख वोटर घटे, 2 लाख नए वोटर जुड़े; जानें कैसे बदला सियासी भूगोल
राजनीति

वाराणसी में SIR से 4 लाख वोटर घटे, 2 लाख नए वोटर जुड़े; जानें कैसे बदला सियासी भूगोल

वाराणसी में SIR से 4 लाख वोटर घटे, 2 लाख नए वोटर जुड़े; जानें कैसे बदला सियासी भूगोल 10 अप्रैल को फाइनल आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में 2730603 मतदाता हैं. पुरुष 1485874 और महिला 1243811 हैं. By ETV Bharat Uttar Pradesh Te…

ETV Bharat के अनुसार23 अगस्त 2026 को 05:55 am बजे
वाराणसी में SIR से 4 लाख वोटर घटे, 2 लाख नए वोटर जुड़े; जानें कैसे बदला सियासी भूगोल

सौजन्य से:- ETV Bharat

वाराणसी में SIR से 4 लाख वोटर घटे, 2 लाख नए वोटर जुड़े; जानें कैसे बदला सियासी भूगोल

10 अप्रैल को फाइनल आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में 2730603 मतदाता हैं. पुरुष 1485874 और महिला 1243811 हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 23, 2026 at 10:22 AM IST

वाराणसी: सियासत में वोटरों की संख्या ही हार-जीत तय करती है, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) ने उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट का चेहरा बदल दिया है. अकेले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लगभग 4 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं. पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हुई इस 'चुनावी सफाई' ने जहां मृत और फर्जी वोटरों का पत्ता साफ किया है, वहीं राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. आइए जानते हैं कि इस ऐतिहासिक अभियान के परिणाम क्या रहे और वर्तमान स्थिति क्या है.

वाराणसी में SIR की प्रकिया पूरी हो चुकी है. इस प्रकिया में जिले कुल लगभग 27 लाख मतदाताओ की सूची तैयार हुई है. दो लाख नए मतदाता वाराणसी में जुड़े है. 10 अप्रैल को फाइनल सूची जारी की गई थी.

वाराणसी में पहले कुल लगभग 31 लाख से ज्यादा वोटर थे, जिनमें से लगभग 4 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटे है. जिला प्रशासन के अनुसार, दो लाख लोग नए वोटर के रूप में जुड़े है. साथ ही लगभग 4 लाख वह वोटर हैं, जो कहीं शिफ्ट हो चुके हैं. या किसी और जगह के मतदाता बन चुके है.

27 लाख हुई मतदाताओं की संख्या: आंकड़ों को देखें तो SIR के बाद वाराणसी जिले में कुल 27 लाख 30 हजार 603 मतदाता हो चुके हैं. SIR के दौरान अनुपस्थित, शिफ्टेड और मृतक लगभग 5 लाख वोटो के नाम पहले हटा दिए गए थे.

इसके बाद नो मार्किंग में शामिल लगभग डेढ़ लाख वोटो की जांच हुई, जिसमें 44 हजार 138 मतदाताओं का नाम हटाया गया और नए वोटर के रूप में 1लाख 94000 वोटरों का नाम जुड़ा. इसके अनुसार पहले की लिस्ट में कुल वोटरों में से लगभग 3 लाख वोटो की संख्या कम हुई है.

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया 28 अक्टूबर को इलेक्शन कमीशन के प्रेस कांफ्रेंस के उपरांत हुई थी. इसमें 10 अप्रैल को फाइनल प्रकाशन एसआईआर का किया गया.

पहले चरण में जो मतगणना प्रपत्र थे, वह लोगों में डिस्ट्रीब्यूशन करके भरकर वापस करने के लिए कहा गया था. वाराणसी की बात करें तो यहां पर 31 लाख 53000 वोटर पहले थे. गणना फेज में 25 लाख 63000 के करीब मतदाताओं ने अपना फार्म वापस भरकर दिया था.

इनमें से लगभग 92 फीसदी लोगों की पुरानी 2002 की मतदाता सूची के साथ मैपिंग थी. जो 8% लोग बचे थे और जिनकी मैपिंग में कुछ त्रुटि थी, उनको नोटिस जारी किया गया था. इस प्रकार SIR का दूसरा नोटिस फेज था, उसमें करीब 94,9000 लोगों को नोटिस जारी किया गया था. स

भी लोगों की सुनवाई भी की गई थी, जो कि पूरी हो गई है. सभी लोगों से नोटिस के अनुरूप डॉक्यूमेंट जमा करवा लिए गए हैं. इस सुनवाई के बाद करीब 45000 ऐसे लोग मिले या तो उन्होंने डॉक्यूमेंट जमा नहीं किया. या वह जिनके द्वारा यह अवगत कराया गया कि उन्होंने कहीं और खुद को मतदाता बना लिया है.

इस प्रकार करीब 45000 लोगों का नाम इस नोटिस पीरियड से हटाया जा रहा है. इस प्रकार यदि हम देखें तो पहले जो लगभग 31 लाख लोग थे, उसमें से सिर्फ 27 लाख लोग जो हैं, वह हमारे मतदाता सूची में आएंगे.

2 लाख नए वोटर जुड़े: वहीं एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने बताया कि SIR की प्रक्रिया द्वारा बहुत बड़ी संख्या में लोगों द्वारा फॉर्म 6 भी जमा किया गया है, जिनके नए नाम जोड़ने की भी प्रक्रिया चल रही है.

इसके साथ ही SIR के दौरान जो लोग ऐसे मिले थे, जिन्होंने अपना घर बदल लिया या शिफ्ट हो गए थे. फार्म 8 के माध्यम से उनकी शिफ्टिंग भी कराई गई है. इस प्रकार पूरे जनपद में यदि हम देखें तो 194000 लोगों के फार्म से भरा गया, जिनका नए वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा गया है.

यह एक बहुत बड़ी प्रक्रिया पूरी की गई है. इसमें राजनीतिक दलों के साथ बैठक करके सभी लोगों को साथ में लेकर की इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न किया गया है. 10 अप्रैल को फाइनल सूची प्रकाशित हुई है. उन्होंने बताया कि जनपद में कुल लगभग 6 लाख नाम कटे हैं और 2 लाख नाम लोगों के नाम जुड़े हैं.

कुल आंकड़ा देखें तो लगभग 4 लाख लोगों के नाम कटे हुए हैं. इनमें शहरी क्षेत्र में ही ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं, क्योंकि वहीं ज्यादा लोग शिफ्ट हो गए हैं. ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की संख्या लगभग बराबर है.

उन्होंने बताया कि अभी भी नए मतदाताओं को जोड़ने का कार्य चल रहा है, जो भी लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ा है, वह ऑनलाइन आवेदन करके अपना नाम जुड़वा सकते हैं.

राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल: SIR की प्रक्रिया को लेकर के जहां सत्ता पक्ष द्वारा बताया गया कि यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई, इसमें फर्जी वोटरों का सफाया हुआ. उनकी तरफ से लगातार टीम लगाई गई थी जो बीएलओ के साथ अलग-अलग वार्ड क्षेत्र में जाकर के लोगों की SIR प्रक्रिया को पूरा करवा रहे थे. वहीं, विपक्षी दलों ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर के सवाल उठाया.

सपा में महिला विंग की वरिष्ठ नेता रीबू श्रीवास्तव कहती हैं कि सरकार ने बहुत जल्दबाजी में SIR की प्रक्रिया को पूरा कराया, जिसका परिणाम रहा कि इतनी बड़ी संख्या में बीएलओ को अपनी जान गवानी पड़ी. वह लोग लगातार फील्ड में जाकर काम कर रहे थे, लेकिन इतना ज्यादा तनाव, दबाव था जिसे झेल नहीं पाए.

उन्होंने कहा कि जब सरकार अभी तक नाम जोड़ ही रही है, तो इस प्रक्रिया को और सहज बनाना चाहिए था. समय उपलब्ध कराना चाहिए था, ताकि किसी पर किसी तरीके का दबाव न हो. निश्चित रूप से SIR की प्रक्रिया सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए गई है.

जनता सब देख रही है. स्थानीय लोगों ने की मदद वही वही एसआईआर की प्रक्रिया में लोगों की मदद करने वाली कुसुम पटेल कहती हैं कि हम लोग लगातार इस प्रक्रिया में बीएलओ के साथ मिलकर के घर-घर काम किए हैं.

हमारे वार्ड में हमने यह सुनिश्चित कराया कि किसी भी व्यक्ति का नाम न कटे. हालांकि कुछ लोगों के दस्तावेज नहीं मिले तो कुछ को नए सिरे से आवेदन करना पड़ा. सभी लोगों के नाम लगभग जुड़ गए हैं और अभी भी जो नए वोटर बने हुए हैं, जिनका नाम नहीं जुड़ पा रहा है. हम उनको जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. बीएलओ द्वारा घर-घर पहुंचने की बात के बाबत उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में बीएलओ का सबसे ज्यादा योगदान रहा है.

दिन रात उन लोगों ने मेहनत की है. ऐसा नहीं था कि वो घर-घर नहीं पहुंचे. वह घर-घर पहुंचे हैं और लोगों को फॉर्म के बारे में बताया भी है. उन पर भी दबाव इतना ज्यादा था कि वह काम के प्रेशर को लेकर के चल रही थी, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी उनकी बहुत मदद की है. यही वजह है कि वाराणसी में सकुशल एसआईआर की प्रकिया पूरी हुई है.

एक नजर आंकड़ों पर: 27 अक्टूबर को कुल मतदाताओं की कुल संख्या 3153705 थी. जिसमें 1699615 पुरुष और 1453939 महिलाएं थीं, 151 थर्ड जेंडर थे. 6 जनवरी 2026 को जो मतदाता सूची जारी की गई, उसमें कुल मतदाताओं की संख्या 2580502 थी.

जिसमें पुरुष-1415247, महिला 1165145 और थर्ड जेंडर 110 थे. इसके बाद 10 अप्रैल को फाइनल आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 2730603 मतदाता हैं. इसमें पुरुष 1485874 और महिला 1243811 हैं. थर्ड जेंडर के 118 मतदाता निर्वाचक नामावली में दर्ज हैं.

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें