कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नई मुसीबत, चिरैया नाले की पुलिया का प्रोटेक्शन वर्क धंसा
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नई मुसीबत, चिरैया नाले की पुलिया का प्रोटेक्शन वर्क धंसा कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड वाले हिस्से में परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक के बाद एक नई मुसीबत सामने आ रही है।…

सौजन्य से:- Hindustan
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नई मुसीबत, चिरैया नाले की पुलिया का प्रोटेक्शन वर्क धंसा
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड वाले हिस्से में परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक के बाद एक नई मुसीबत सामने आ रही है। सड़क धंसने और तारकोल उखड़ने से शुरू हुआ सिलसिला पुल के जोड़ में दरार और क्रैश बैरियर टूटने से होते हुए अब प्रोटेक्शन वर्क तक जा पहुंचा है।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड वाले हिस्से में परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सड़क धंसने और तारकोल उखड़ने से शुरू हुआ सिलसिला पुल के जोड़ में दरार और क्रैश बैरियर टूटने से होते हुए अब प्रोटेक्शन वर्क तक जा पहुंचा है। अभी तक सड़क खराब होने के ज्यादातर मामले कानपुर-लखनऊ वाली लेन में ही आए थे। अब मंगलवार को लखनऊ-कानपुर लेन में चिरैया नाले के ऊपर बनी पुलिस का प्रोटेक्शन वर्क का एक हिस्सा ही धंस गया। इसके चलते पुलिया के नीचे बड़ा खोखलापन नजर आ रहा है।
लखनऊ से कानपुर जाने वाले लेन पर किमी 36.9 और 36.8 के बीच चिरैया नाला के ऊपर बनी पुलिया का प्रोटेक्शन वर्क नीचे की तरफ से धंस गया है। नाले के ठीक बगल में हुए इस धंसाव से वहां बड़ा खोखलापन आ गया है। पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी उचित मरम्मत नहीं करवाई जाती है तो पुलिया का एप्रोच रोड कमजोर हो जाएगा और यह धंस सकता है। ऐसे में यह वाहनों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। NHAI का कहना है कि प्रोटेक्शन वर्क के नीचे कुछ मिट्टी बही है। पेट्रोलिंग टीम को जानकारी मिलते ही वहां पर मरम्मत कार्य शुरू करवा दिया गया है। बताया जाता है कि प्रोटेक्शन वर्क के धंसे हिस्से का मरम्मत कार्य दोपहर तक जारी था। वहां मिट्टी का भराव करते हुए उस हिस्से को ठोस बनाया जा रहा था।
क्यों होता है प्रोटेक्शन वर्क?
पुलिया के आसपास और उसके नीचे बहने वाले पानी से होने वाले मिट्टी के कटाव, मिट्टी के बहने और नींव खुलने से संरचना को बचाने के लिए प्रोटेक्शन वर्क किया जाता है। इसे सुरक्षा निर्माण भी कहा जाता है। इसमें पत्थर की पिचिंग, क्रंकीट की सुरक्षा परत, नदी या नाले के किनारे की सुरक्षा संरचना की जाती है।
सड़क पर जलभराव और क्रैश बैरियर में दरारें
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर तमाम कोशिशों के बावजूद जलनिकासी की समस्या बनी हुई है। सोमवार को हुई बारिश के कारण एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड वाले हिस्से में जगह-जगह जलभराव की समस्या सामने आई। किमी 58.5 पर पियरियां गांव के पास सड़क पर पानी भरा रहा। इससे करीब डेढ़ किमी आगे जाने पर वहां भी एक्सप्रसेवे पर पानी जमा नजर आया। बारिश के चौबीस घंटे बीत जाने के बाद भी एक्सप्रेसवे की सड़क से पानी न हटने से स्पष्ट हो रहा है कि अभी भी इसका ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं हुआ है। इसके चलते भविष्य में सड़क धंसने और तालकोल उखड़ने की समस्या बनी रह सकती है। किमी 55 के पास क्रैश बैरियर के दरकने और टूटने का मामला भी सामने आया। यह पहली बार नहीं है जब क्रैश बैरियर में दरार आई हो। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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