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हाईकोर्ट ने यूपी लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब: याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती, कोर्ट बोला- उत्तर पुस्तिका दिखाएं - Prayagraj (Allahabad) News

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Dainik Bhaskar के अनुसार24 अगस्त 2026 को 08:55 pm बजे
हाईकोर्ट ने यूपी लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब:  याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती, कोर्ट बोला- उत्तर पुस्तिका दिखाएं - Prayagraj (Allahabad) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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हाईकोर्ट ने यूपी लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब:याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती, कोर्ट बोला- उत्तर पुस्तिका दिखाएं

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2024 के अंतिम परिणाम एवं मूल्यांकन-मॉडरेशन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिका राहुल कुमार सिंह एवं अन्य की तरफ से दाखिल की गई है।

मॉडरेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न याचिका में आरोप लगाया गया है कि लिखित परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में परीक्षक-वार भिन्नता को दूर करने के लिए अपनाई गई मॉडरेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई आर.टी.आई. सूचना से यह सामने आया है कि लगभग 6 प्रतिशत मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं का मुख्य परीक्षक द्वारा मॉडरेशन किया गया, जबकि लगभग 94 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाएं इस प्रक्रिया से बाहर रहीं।

पीसीएस मुख्य परीक्षा को लेकर आरोप याचिका में यह भी कहा गया है कि पी.सी.एस. मुख्य परीक्षा 2024 के परिणाम में विभिन्न रोल नंबर श्रृंखलाओं के बीच चयन दर में उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार “00” और “01” श्रृंखला के अभ्यर्थियों की चयन दर लगभग 8.9 प्रतिशत, जबकि “02” से “05” श्रृंखला के अभ्यर्थियों की चयन दर लगभग 4.85 प्रतिशत रही।

अंकों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि आयोग ने मॉडरेशन की विस्तृत पद्धति, परीक्षक-वार मूल्यांकन, कच्चे अंक तथा मॉडरेशन के बाद प्राप्त अंकों से संबंधित पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। याचिका में मांग व्यक्तिगत उत्तर पुस्तिका की मात्र पुनर्मूल्यांकन की मांग के बजाय पूरी मूल्यांकन और मॉडरेशन पद्धति की न्यायिक जांच है।

उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति दी जाए याचिका की सुनवाई के दौरान आयोग की तरफ से मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम के समक्ष जरूरी पत्रजात उपलब्ध कराए गए। आयोग को याचिका में जवाब दाखिल करने का समय देते हुए न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा आर.टी.आई. के माध्यम से अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका देखने के लिए आवेदन किया जाता है, तो उन्हें उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति दी जाए। याचिका पर अधिवक्ता दुर्गा शंकर शुक्ल ने बहस की।

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