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यूपी में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा सेंटर: जापान के यामानाशी से तकनीकी सहयोग, निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

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Dainik Bhaskar के अनुसार25 अगस्त 2026 को 02:55 am बजे
यूपी में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा सेंटर:  जापान के यामानाशी से तकनीकी सहयोग, निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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यूपी में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा सेंटर:जापान के यामानाशी से तकनीकी सहयोग, निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

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उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। गोमती नगर स्थित ताज होटल में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और निवेश को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ। ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा और यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी समेत दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, तकनीक, रिसर्च और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। यामानाशी के मॉडल और पावर-टू-गैस (P2G) तकनीक के आधार पर यूपी में एक पायलट परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया।

यामानाशी मॉडल से यूपी में बनेगा पायलट प्रोजेक्ट

बैठक में जापानी प्रतिनिधिमंडल ने पावर-टू-गैस (P2G) तकनीक का प्रस्तुतीकरण किया। इस तकनीक में नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस कर ग्रीन हाइड्रोजन तैयार किया जाता है। यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी (YHC) और कानाडेविया कॉरपोरेशन के सहयोग से यूपी में उच्च क्षमता वाली पायलट परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसकी फिजिबिलिटी स्टडी फरवरी 2027 तक पूरी करने और मार्च 2027 तक व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।

सालाना 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में हर साल 10 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए निवेश, तकनीकी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2024 के तहत निवेशकों को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें परियोजना लागत पर 10 से 30% तक कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में 100% तक छूट और निजी विकासकर्ताओं के जरिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

उद्योग, ट्रक-बस और खाद उत्पादन में होगा इस्तेमाल

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसके उत्पादन और इस्तेमाल से प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल उद्योगों, भारी वाहनों, बस-ट्रकों और उर्वरक निर्माण समेत कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।

IIT कानपुर और IIT-BHU में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में रिसर्च और नई तकनीक विकसित करने के लिए IIT कानपुर और IIT-BHU वाराणसी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में नई तकनीकों पर शोध, तकनीकी परीक्षण और लैब स्तर की तकनीक को औद्योगिक स्तर पर विकसित करने का काम किया जाएगा।

एक्सप्रेसवे और फ्रेट कॉरिडोर से मिलेगी सप्लाई चेन को मजबूती

सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश की मजबूत कनेक्टिविटी भी ग्रीन हाइड्रोजन के निवेश के लिए बड़ी ताकत है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और अंतर्देशीय जलमार्ग जैसी सुविधाएं हैं। इनके जरिए ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से लेकर उसके भंडारण, परिवहन और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित की जा सकती है। बड़े औद्योगिक आधार और भारी परिवहन क्षेत्र के कारण यूपी में हाइड्रोजन मोबिलिटी की भी संभावनाएं बताई गई हैं।

जापान की तकनीक और निवेश

ए.के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में जापान की तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी नीतिगत और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में हुआ यह समझौता प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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