नोएडा-NCR की तर्ज पर लखनऊ SCR का बड़ा प्लान, 6 जिलों की बदलेगी तस्वीर
उत्तर प्रदेश में लखनऊ और उसके आसपास के जिलों के सुनियोजित विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (U…

सौजन्य से:- Aaj Tak News
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उत्तर प्रदेश में लखनऊ और उसके आसपास के जिलों के सुनियोजित विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UPSCR) के बेस मैप को मंजूरी मिल गई है. इसके बाद अब क्षेत्र के लिए रीजनल प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
यूपीएससीआर में लखनऊ के अलावा सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को शामिल किया गया है. इन छह जिलों को मिलाकर इस क्षेत्र का कुल दायरा करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर है. इसका मकसद इन जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और नए आर्थिक अवसरों से जोड़ना है.
बेस मैप किसी भी बड़े क्षेत्र के विकास की बुनियादी तस्वीर तैयार करता है. इसमें मौजूदा सड़कें, शहर, गांव, जमीन के इस्तेमाल और दूसरी जरूरी जानकारियों को शामिल किया जाता है. इसी आधार पर आगे के विकास की योजनाएं तैयार की जाती हैं.
मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यूपीएससीआर के बेस मैप को मंजूरी दी गई. अब इसे एक्जीक्यूटिव कमेटी के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. अंतिम मंजूरी मिलने के बाद रीजनल प्लान तैयार करने का काम शुरू होगा.
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6 जिलों को जोड़ने की तैयारी
रीजनल प्लान में छहों जिलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने पर खास जोर दिया जाएगा. इसके तहत रीजनल रोड, एलिवेटेड पेरिफेरल रोड, मौजूदा सड़कों का अपग्रेडेशन, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क जैसी परियोजनाओं का प्रस्ताव है. इसका उद्देश्य लखनऊ को आसपास के जिलों से तेजी से जोड़ना है, ताकि लोगों के लिए आने-जाने के साथ-साथ कारोबार और रोजगार के अवसर भी बढ़ें.
उद्योग और रोजगार पर भी फोकस
यूपीएससीआर की योजना सिर्फ सड़क और परिवहन तक सीमित नहीं है. क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक पार्क और फूड पार्क जैसी योजनाओं पर भी काम किया जाएगा. इसके अलावा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के आसपास विकास को बढ़ावा देने की योजना है. इससे उद्योगों और कारोबार को नई जगह मिल सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
30 प्रमुख परियोजनाएं चिन्हित
जीआईएस आधारित क्षेत्रीय महायोजना के लिए परिवहन, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़ी करीब 30 प्रमुख परियोजनाओं की पहचान की गई है. इन परियोजनाओं को यूपीएससीआर के भविष्य के विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
बेस मैप को तैयार करने से पहले 22 विभागों और संस्थाओं से सुझाव और सहमति ली गई. मैप में दर्ज जानकारियां जमीन पर सही हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए छहों जिलों में 2,239 स्थानों पर ग्राउंड ट्रूथिंग की गई. इसके अलावा सैटेलाइट इमेज और अलग-अलग नक्शों से मिले आंकड़ों का भी मौके पर जाकर सत्यापन कराया गया। इससे बेस मैप को ज्यादा सटीक बनाने में मदद मिली.
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गांवों तक पहुंचेंगी बेहतर सुविधाएं
यूपीएससीआर के विकास से सिर्फ बड़े शहरों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य नहीं है. बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क के जरिए गांवों तक भी शहरी सुविधाएं पहुंचाने की योजना है, छहों जिलों के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित होने से लोगों के लिए घर, रोजगार और कारोबार के नए विकल्प खुल सकते हैं. बेहतर रोजगार मिलने पर दूसरे शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, यूपीएससीआर के बेस मैप की मंजूरी लखनऊ और आसपास के छह जिलों के एकीकृत विकास की दिशा में पहला बड़ा कदम है.
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