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कानपुर में एयरबैग न खुलने से युवक की मौत पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, कार कंपनी को देनी होगी कार की कीमत - kanpur airbag death consumer commission orders car company payout

कानपुर में एयरबैग न खुलने से युवक की मौत पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, कार कंपनी को देनी होगी कार की कीमत कानपुर उपभोक्ता आयोग ने सीट बेल्ट लगाने के बावजूद एयरबैग न खुलने से हुई मौत के मामले में कार कंपनी ...और पढ़ें HighLi…

Jagran के अनुसार23 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
कानपुर में एयरबैग न खुलने से युवक की मौत पर उपभोक्ता आयोग का  फैसला, कार कंपनी को देनी होगी कार की कीमत
 - kanpur airbag death consumer commission orders car company payout

सौजन्य से:- Jagran

कानपुर में एयरबैग न खुलने से युवक की मौत पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, कार कंपनी को देनी होगी कार की कीमत

कानपुर उपभोक्ता आयोग ने सीट बेल्ट लगाने के बावजूद एयरबैग न खुलने से हुई मौत के मामले में कार कंपनी ...और पढ़ें

HighLights

- सीट बेल्ट के बावजूद एयरबैग न खुलने से युवक की मौत।

- उपभोक्ता आयोग ने कार कंपनी को हर्जाना देने का आदेश दिया।

- कार की कीमत, ब्याज, क्षतिपूर्ति और वाद खर्च का भुगतान।

जागरण संवाददाता, कानपुर। सीट बेल्ट लगाने पर भी एयरबैग नहीं खुलने से दुर्घटना में मौत होने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार और सदस्य वंदना सिंह ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि उपभोक्ता को कार का बीमित घोषित मूल्य 6,36,794 रुपये कंपनी लौटाए। साथ ही मुकदमा दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक आठ प्रतिशत ब्याज दे। शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए दो लाख रुपये और 20 हजार रुपये वाद खर्च के भी दिए जाएं।

रूप नारायण वर्मा ने 16 मई, 2024 को उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में आरएनजी आटो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वाद दाखिल किया था। इसमें कहा था कि उन्होंने कंपनी के शोरूम से घरेलू उपयोग के लिए 8,06,085 रुपये में कार खरीदी थी। खरीद के समय गाड़ी के बारे में सुरक्षा बंदोबस्त की जानकारी को असत्य बताया गया। इसलिए कार की कीमत के साथ क्षतिपूर्ति कराई जाए।

रूप नारायण के अनुसार, 15 जनवरी, 2023 को उनका बेटा राज वर्मा अपने तीन मित्रों शुभम, अर्पित और प्रदीप को लेकर ड्राइवर के साथ अयोध्या जा रहा था। रास्ते में सामने से नील गाय आने से कार डिवाइडर से टकराते हुए सड़क पर पलट गई। इससे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठे शुभम के सिर में गंभीर चोट आने से उसकी मौत हो गई थी। शुभम के पिता ने कार दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।

शुभम सीट बेल्ट भी लगाए था। यदि दुर्घटना के समय कार में लगा एयरबैग खुल जाता तो वह मरने से बच सकता था। कार के सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर भ्रामक जानकारी दी गई या फिर उन्हें दोषयुक्त कार बिक्री की गई। इसके बाद कई बार नोटिस डाक से भेजने और तामील कराने पर भी कंपनी ने आयोग में अपना पक्ष नहीं रखा। इसलिए आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई कर बीती 18 सितंबर को निर्णय सुनाया है।

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