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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, लोकार्पण के बाद ही सड़क खराब - lucknowkanpur expressway quality issues emerge postlaunch

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, लोकार्पण के बाद ही सड़क खराब लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे लोकार्पण के दूसरे दिन से ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है, जहां पहली बरसात में ही डामर की परतें…

Jagran के अनुसार6 अगस्त 2026 को 02:18 am बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, लोकार्पण के बाद ही सड़क खराब
 - lucknowkanpur expressway quality issues emerge postlaunch

सौजन्य से:- Jagran

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, लोकार्पण के बाद ही सड़क खराब

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे लोकार्पण के दूसरे दिन से ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है, जहां पहली बरसात में ही डामर की परतें बह गईं और सड़ ...और पढ़ें

HighLights

- लोकार्पण के तुरंत बाद एक्सप्रेसवे पर गुणवत्ता के सवाल।

- पहली बरसात में ही डामर की परतें बहीं, सड़क धंसी।

- एनएचएआई और कार्यदायी संस्था पीएनसी पर लीपापोती के आरोप।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपने लोकार्पण (13 जुलाई) के दूसरे दिन से ही चर्चा में रहा। एक्सप्रेसवे पर जो निर्माण सामग्री का प्रयोग होना चाहिए, वह नहीं हुआ। पहली बरसात में ही डामर की परतें बह गई। एक्सप्रेसवे के 45 किलोमीटर ग्रीन फील्ड के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे। चार अगस्त तक जगह जगह सड़क छह बार धंस गई या उखड़ गई।

एक बार तो मुख्य मार्ग से सटे शोल्डर यानी बराबर की कच्ची रोड पर ट्रक पलट गया। अब सब कुछ छिपाने व दबाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों ने लीपापोती शुरू कर दी। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के खिलाफ आरोप पत्र देने की बात कही गई, लेकिन कौन से आरोप लगे, इसकी जानकारी अधिकारी देने से बचते रहे।

ग्रीन फील्ड का जिम्मा जिन एनएचएआइ प्रबंधक के कंधों पर था, उनका तबादला कानपुर चंद सप्ताह पहले हो गया, उनकी जवाबदेही तक तय नहीं हुई। कार्यदायी संस्था पीएनसी को अंत तक प्राधिकरण के उच्चाधिकारी बचाने में लगे रहे, जब मामला हाई प्रोफाइल हुआ तो नान परफार्मर की संस्तुति करने का दावा करते रहे।

एनएचएआइ लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल का तर्क है कि पीएनसी को नान परफार्मर के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ)भेजा गया। ऐसे में सवाल खड़ा होता है क्या मोर्थ कुछ करेगा? अगर कार्रवाई होती है तो क्या बाराबंकी से बहराइच एक्सप्रेसवे का काम जो 7100 करोड़ का है, पीएनसी से वापस लिया जाएगा।

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इस पर क्षेत्रीय प्रबंधक का तर्क है कि बाराबंकी-बहराइच के टेंडर में पीएनसी एल-वन आई है, इसलिए उसे दिया गया है। वहीं सवाल खड़ा होता है कि जब नान परफार्मर कंपनी घोषित हाेगी यानी एक्सप्रेसवे बनाने के योग्य कंपनी नहीं है तो फिर बाराबंकी-बहराइच कैसे बना सकती है? वहां भी गुणवत्ता, अर्थवर्क व ड्रेनेज से जैसे मुद्दे खड़े होंगे। पीएनसी को लखनऊ में एक फ्लाइओवर का काम भी मिला है।

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लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता व खुर्रमनगर फ्लाइओवर बनाने में योगदान देने वाले एन राम कहते हैं कि अगर ग्रीन फील्ड पर पानी रुकेगा तो नुकसान होना तय है। अर्थ वर्क करते समय हर तीस सेंटीमीटर पर मिट्टी डालने के बाद कंपेक्टर चलाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा ड्रेनेज ऐसा हो कि चंद बूंदे भी बरसात की गिरे तो ड्रेनेज के जरिए सीधे निकल जाए। अगर इन्हें नजरअंदाज किया गया है तो एक्सप्रेसवे पर समस्या बनी रह सकती है।

वहीं उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक संदीप गुप्ता के मुताबिक गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ हाे रहा है। लोएस्ट बिड के चक्कर में कंपनियां कास्ट कटिंग करती हैं। मानकों की अनदेखी होती है। इसके कारण एक्सप्रेसवे चाहे एनएचएआइ के हो या राज्य सरकार द्वारा बनवाएं गए, वहं धंसेंगे ही।

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