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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में नई खामी, पुल के ज्वाइंट में भी पड़ीं लंबी दरारें

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में नई खामी, पुल के ज्वाइंट में भी पड़ीं लंबी दरारें कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आए दिन सवालों के घेरे में है। अब गंगा एक्सप्रेसवे के पास इस पुल के ज्वाइंट वाले हिस्से में लंबी दरारें आ गई हैं। पुल की…

Hindustan के अनुसार18 अगस्त 2026 को 01:55 am बजे
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में नई खामी, पुल के ज्वाइंट में भी पड़ीं लंबी दरारें

सौजन्य से:- Hindustan

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में नई खामी, पुल के ज्वाइंट में भी पड़ीं लंबी दरारें

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आए दिन सवालों के घेरे में है। अब गंगा एक्सप्रेसवे के पास इस पुल के ज्वाइंट वाले हिस्से में लंबी दरारें आ गई हैं। पुल की सड़क के किनारे कंक्रीट वाले हिस्से से होकर यह दरार काफी लंबी और गहरी है।

UP News: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब गंगा एक्सप्रेसवे के पास इस हाईवे पर किलोमीटर 55.4 पर स्थित पुल के ज्वाइंट वाले हिस्से में लंबी दरारें आ गई हैं। पुल की सड़क के किनारे कंक्रीट वाले हिस्से से होकर यह दरार काफी लंबी और गहरी है। यह कई स्थानों पर एक इंच तो कुछ स्थानों पर आधा इंच के आसपास है। दरार के आसपास कई जगह सतह भी उखड़ गई है।

एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और तारकोल उखड़ने के साथ ही क्रैश बैरियर के दरकने की घटनाओं के बीच पुल पर दरारें पड़ने यह नई खामी सामने आई है। महज एक महीने पहले यातायात के लिए खोले गए इस हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर करीब 15 जगह सड़क धंसने और 24 स्थानों पर स्लिपेज की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। उन्नाव में जुलाई के अंत में सड़क की ऊपरी परत में करीब 40 मीटर तक स्लिपेज की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद बारिश में कई स्थानों पर सड़क के किनारे और नीचे से पानी के रिसाव ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए।

बारिश ने फिर दिखाया एक्सप्रेसवे का जख्म

करीब 63 किलोमीटर लंबे और लगभग 4200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक सुविधाओं और तेज यातायात के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद शुरुआती दौर में ही सड़क और जल निकासी से जुड़ी खामियां सामने आना गंभीर विषय है। अब पुल पर दरार मिलने से सवाल यह है कि क्या यह केवल सतही दरार है या इसके पीछे संरचनात्मक कारण हैं। पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि इस दरार की अविलंब जांच कर सुधार जाना जरूरी है। अगर यह सतह पर है तो चिंता की बात नहीं है।

ग्रीन फील्ड के दोनों किनारों को किया जाएगा पक्का

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड वाले हिस्से में एक्सप्रेसवे पर भविष्य में एक और लेन बढ़ाए जाने के लिए छोड़े गए हिस्से को पक्का किया जाएगा। यहां पर कच्ची मिट्टी पर बिछाई गई बजरी और रोड़ी पर सीमेंट का लेपन कर उसे एक्सप्रेसवे की सड़क की सतह से मिलाया जाएगा। यह कवायद बारिश के पानी को एक्सप्रेसवे की सड़क की सतह के निचले हिस्से की मिट्टी तक जाने से रोकने के लिए किया जाएगा।

एक्सप्रेसवे के किमी 64 पर 26 जुलाई को सड़क धंसने की पहली घटना सामने आने के बाद एनएचएआई ने उस हिस्से में तकरीबन 100 मीटर तक सड़क को उखाड़ कर नए सिरे से बनवा दिया था। इस मरम्मत कार्य को करवाने के बाद एनएचएआई ने राहत की सांस ली भी नहीं थी कि एक के बाद एक कर के एक्सप्रेसवे 29 जुलाई तक पांच और स्थानों पर धंस गया। कई स्थानों पर स्लिपेज(सड़क की तारकोल के नीचे की मिट्टी खिसकना) की समस्या आ गई थी।

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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