वाराणसी में आवास योजनाओं का हिसाब मांगने पर खुली फाइलों की परतें, तीन सवाल आगे सरके - layers of files regarding housing schemes in varanasi were uncovered after a demand for accountability
वाराणसी में आवास योजनाओं का हिसाब मांगने पर खुली फाइलों की परतें, तीन सवाल आगे सरके वाराणसी में आवास एवं विकास परिषद की योजनाओं पर आरटीआई से मांगी गई जानकारी में परिषद ने जमीन, खर्च और लंबित कार्यों जैसे अहम सवालों के सी…

सौजन्य से:- Jagran
वाराणसी में आवास योजनाओं का हिसाब मांगने पर खुली फाइलों की परतें, तीन सवाल आगे सरके
वाराणसी में आवास एवं विकास परिषद की योजनाओं पर आरटीआई से मांगी गई जानकारी में परिषद ने जमीन, खर्च और लंबित कार्यों जैसे अहम सवालों के सीधे जवाब नहीं दिए, बल्कि उन्हें आगे बढ़ा दिया। नगर निगम की आरटीआई प्रतिक्रिया में सुस्ती भी पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर सवाल उठाती है।
HighLights
- आवास परिषद ने जमीन, खर्च, लंबित कार्यों पर सीधे जवाब नहीं दिए।
- आरटीआई में मांगी गई वाराणसी की आवास योजनाओं की विस्तृत जानकारी।
- नगर निगम आरटीआई जवाब देने में अन्य विभागों से काफी सुस्त।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद से वाराणसी की जमीन, आवासीय-वाणिज्यिक योजनाओं, संपत्तियों के आवंटन, राजस्व और विकास कार्यों पर खर्च का हिसाब मांगा गया। जवाब में कुछ सूचनाएं जरूर सामने आईं, लेकिन परिषद की जमीन कितनी है, योजनाओं पर कितना खर्च हुआ और कितने काम लंबित हैं जैसे अहम सवालों का सीधा जवाब नहीं मिला।
इन्हें संबंधित निर्माण खंड और अधिशासी अभियंता को अग्रसारित कर दिया गया। वहीं संपत्तियों की बिक्री से तीन वर्षों में हुई आय का वर्षवार और योजनावार आंकड़ा भी सामने नहीं आया। यानी आरटीआइ से जानकारी मांगी गई, लेकिन जवाब ने पूरी तस्वीर साफ करने के बजाय कई सवालों को दूसरी मेज तक पहुंचा दिया।
वाराणसी में परिषद की वर्तमान, प्रस्तावित और पूर्व संचालित योजनाओं की सूची, उनके क्षेत्रफल, स्वीकृति वर्ष, लागत और मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी गई थी। परिषद ने इसे निर्माण खंड वाराणसी-एक/दो, जवाहर नगर भेलूपुर से संबंधित बताते हुए अग्रसारित कर दिया।
इसी तरह परिषद के स्वामित्व, अधिग्रहण या कब्जे वाली कुल जमीन और उसके विकसित, अविकसित व खाली हिस्से का योजनावार ब्यौरा भी सीधे उपलब्ध कराने के बजाय निर्माण खंड के पाले में डाल दिया गया। यानी परिषद के पास वाराणसी में कितनी जमीन है, इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
हालांकि संपत्तियों के आवंटन से जुड़ी जानकारी में परिषद ने बताया कि कबीर नगर की सभी 741 और जवाहर नगर की सभी 76 संपत्तियां आवंटित हो चुकी हैं। पाण्डेयपुर की 720 में से 716 संपत्तियां आवंटित हैं और चार शेष हैं। 2023-24 से 2025-26 तक संपत्तियों की बिक्री व आवंटन से मिले राजस्व का वर्षवार व योजनावार विवरण मांगा गया था, लेकिन इसका स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया।
वहीं सड़क, नाली, सीवर, पानी, बिजली और पार्क पर स्वीकृत व खर्च धनराशि तथा लंबित कार्यों की जानकारी भी संबंधित अधिशासी अभियंता को भेज दी गई। आरटीआइ ने सवालों के जवाब देने के बजाय कई अहम सवालों की फाइल आगे बढ़ा दी। इससे सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
काम में फिसड्डी, सूचना देने में भी पीछे नगर निगम
आरटीआइ के आंकड़े बता रहे हैं कि सूचना देने की रफ्तार में भी नगर निगम की चाल अपने कामों जैसी ही सुस्त है। 28 जुलाई को दाखिल नगर निगम की आरटीआइ संख्या एनजीएनवीआर/आर/2026/60241 और नौ अगस्त की एनजीएनवीआर/आर/2026/60272 अभी प्रक्रिया में हैं।
वहीं दूसरी ओर वाराणसी विकास प्राधिकरण की 17 जून की आरटीआइ 22 जुलाई को निस्तारित हो चुकी है। इसी तरह गाजीपुर पुलिस की 31 मार्च की आरटीआइ उसी दिन निस्तारित हुई और आवास एवं विकास परिषद की आठ अगस्त की आरटीआइ 14 अगस्त को निस्तारित हो गई।
यानी दूसरे विभाग सूचना देने में आगे निकल गए और नगर निगम अब भी फाइल को ‘प्रोसेस’ में लेकर बैठा है। जिस नगर निगम से शहर की सड़क, नाली, सफाई और विकास कार्यों की रफ्तार की उम्मीद है, वही सूचना देने में भी पीछे छूटता नजर आ रहा है। सवाल यह कि जब आरटीआई का जवाब देने में इतनी सुस्ती है तो शहर के सवालों का जवाब देने और काम कराने की रफ्तार कितनी होगी।
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