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अनुराग पांडेय बोले- मेरा राजनीति से कोई लेनादेना नहीं: कानपुर में यूपी बार काउंसिल के उपाध्यक्ष ने कहा- इस सरकार में ब्यूरोक्रेट्स हावी - Kanpur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार16 अगस्त 2026 को 12:55 am बजे
अनुराग पांडेय बोले- मेरा राजनीति से कोई लेनादेना नहीं:  कानपुर में यूपी बार काउंसिल के उपाध्यक्ष ने कहा- इस सरकार में ब्यूरोक्रेट्स हावी - Kanpur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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अनुराग पांडेय बोले- मेरा राजनीति से कोई लेनादेना नहीं:कानपुर में यूपी बार काउंसिल के उपाध्यक्ष ने कहा- इस सरकार में ब्यूरोक्रेट्स हावी

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उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव के वोटों की गिनती जारी है। अब तक कानपुर के अधिवक्ता अनुराग पांडेय को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। भाजपा के कानूनी सेल के राज्य संयोजक प्रशांत सिंह अटल उनसे पीछे हैं। हालांकि अभी काउंटिंग चल रही है।

अनुराग पांडेय मौजूदा समय में बार काउंसिल के उपाध्यक्ष भी हैं। वह भाजपा की कानपुर महापौर प्रमिला पांडेय के बेटे हैं, लेकिन खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं मानते। उनका कहना है कि वह सिर्फ अधिवक्ताओं के हित की राजनीति करते हैं, जो पार्टी अधिवक्ताओं के हित में काम करेगी, वह उसी का समर्थन करेंगे।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अनुराग पांडेय ने अधिवक्ता प्रोटेक्शन बिल, कल्याण निधि और अधिवक्ताओं पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने यह भी कहा कि ब्यूरोक्रेट्स कई बार मुख्यमंत्री को सही जानकारी नहीं देते। अपने फायदे के लिए अधिवक्ताओं को आपस में लड़ाते हैं। पढ़िए पूरी बातचीत…

सवाल: किस रणनीति से प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिवक्ताओं के वोट मिले?

जवाब: यूपी बार काउंसिल के चुनाव में हर जिले के अधिवक्ता वोट करते हैं। मेरी रणनीति हमेशा साफ रही है। मैं बिना किसी स्वार्थ के वकीलों की मदद करता रहा हूं। शायद इसी भरोसे की वजह से मुझे इतने वोट मिले। इसके लिए मैं प्रदेश के सभी अधिवक्ताओं का दिल से धन्यवाद करता हूं।

सवाल: अगर यूपी बार काउंसिल में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो अधिवक्ताओं के लिए क्या करेंगे?

जवाब: यूपी बार काउंसिल में दो प्रमुख पद होते हैं- चेयरमैन और वाइस चेयरमैन। जब चेयरमैन मौजूद नहीं होते हैं तो वाइस चेयरमैन ही चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते हैं। मैं इस समय बतौर चेयरमैन आपसे बात कर रहा हूं।

अधिवक्ताओं के लिए मेरी पहली प्राथमिकता अधिवक्ता प्रोटेक्शन बिल को पास कराना होगी। इसके साथ ही मेडिकल स्कीम को और बेहतर कराने की कोशिश करूंगा। अधिवक्ता कल्याण निधि को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कराने का प्रयास रहेगा।

मेरा लक्ष्य है कि अगले चुनाव में जब मैं अधिवक्ताओं के बीच वोट मांगने जाऊं, तब तक कल्याण निधि को 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक कराने की दिशा में काम कर चुका हूं।

सवाल: आपकी माता जी भाजपा की नेता और महापौर हैं, लेकिन आप अक्सर भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं?

जवाब: लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं। जब मैं उपाध्यक्ष बना, उस दौरान हापुड़ में वकीलों पर लाठीचार्ज हुआ था। इसके विरोध में वहां मुख्यमंत्री का पुतला भी फूंका गया। हमारा काम अधिवक्ताओं के हित की बात करना है।

मेरा किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। मेरी माता जी किसी भी पार्टी में रहें, मैं उनका बेटा हूं और उनके चुनाव लड़ने पर उनके साथ खड़ा रहूंगा। मैं किसी पार्टी का विरोध नहीं करता, मैं सिर्फ गलत नीतियों का विरोध करता हूं। मेरा साफ मानना है कि जो अधिवक्ताओं के हित की बात करेगा, वही उत्तर प्रदेश में राज करेगा।

आगामी विधानसभा चुनाव में जो भी पार्टी अधिवक्ताओं के हित की बात करेगी, मैं उसका साथ दूंगा। मैं किसी भी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं हूं और न ही बनूंगा। मैं अधिवक्ता हूं और अधिवक्ताओं के हित के लिए ही काम करता रहूंगा।

सवाल: कहा जाता है कि इस सरकार में अधिवक्ताओं पर सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई?

जवाब: अधिवक्ता हमेशा से समाज और देश के लिए आगे रहे हैं। अगर किसी अधिवक्ता के साथ गलत होता है तो मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा और उसके लिए आवाज उठाऊंगा।मौजूदा सरकार में ब्यूरोक्रेट्स ज्यादा हावी हैं और कई बार अधिकारियों की ओर से मुख्यमंत्री को सही जानकारी नहीं दी जाती।

एक अधिवक्ता के चैंबर तोड़े जाने के मामले में जब हम मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे तो पता चला कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। अधिकारियों को अपने फायदे के लिए अधिवक्ताओं को आपस में नहीं लड़ाना चाहिए। सभी अधिकारी ऐसे नहीं हैं, बहुत से अच्छे अफसर भी हैं।

सवाल: आपकी माता जी भाजपा नेता, भाई पत्रकार और आप वकील हैं, घर में कभी आपसी टकराव नहीं होता?

जवाब: मेरी मां जिस भी पार्टी से चुनाव लड़ेंगी, मैं उनका साथ दूंगा। मेरा किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। मैं सिर्फ अधिवक्ताओं के हित की बात करता हूं। अयोध्या में विपक्ष के एक नेता ने मदद मांगी थी, तो मैंने उनकी मदद की, क्योंकि वह हमेशा अधिवक्ताओं के लिए खड़े रहे हैं।

माता, भाई और मेरे बीच घर और बाहर की जिंदगी अलग है। घर में हम परिवार हैं और हमारे बीच बहुत प्यार है।

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