मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं, कलाकारों से बोले सीएम योगी
मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं, कलाकारों से बोले सीएम योगी स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक में विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों से सीएम योगी ने कहा, आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सक…

सौजन्य से:- Hindustan
मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं, कलाकारों से बोले सीएम योगी
स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक में विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों से सीएम योगी ने कहा, आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।
CM Yogi: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधान भवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विभिन्न राज्यों के कलाकारों से अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान सीएम योगी ने गायकों से कहा कि आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं। योगी ने कहा कि भारत की विविधता में एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है तथा कलाकार देश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक वाहक हैं।
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए कलाकारों से उनके अनुभव साझा किए तथा प्रदेश में भ्रमण की उनकी इच्छाओं के बारे में जानकारी ली। कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को अपने देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जानने का प्रयास करना चाहिए। कलाकार विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति को एक-दूसरे तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं और यही सांस्कृतिक आदान-प्रदान राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाता है।
बुलडोजर बाबा कहने पर मुस्कुराए सीएम योगी
छत्तीसगढ़ के कुलभूषण चंद्राकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उन्हें अयोध्या जाने का अवसर मिला था, लेकिन अब वह नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक हैं। सीएम ने कहा कि तब की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है। आज की अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है। कुलभूषण ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री योगी को 'बुलडोजर बाबा' के नाम से जाना जाता है। इस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और कहा कि बुलडोजर पसंद है ना आपको? आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन कम से कम गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।
श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी
मथुरा के राजेश प्रसाद शर्मा ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए कहा कि आज उनसे बात करके बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने मथुरा को तीन बड़े महोत्सव देने के लिए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकार केवल गायन, वादन, नृत्य और नाटक करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे परंपरा और लोक संस्कृति के वाहक हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों में अतीत छिपा होता है और भविष्य उसी अतीत से प्रेरणा लेता है। अयोध्या का दीपोत्सव और रामनवमी, बरसाना का रंगोत्सव, मथुरा में जन्माष्टमी, बुंदेलखंड में आल्हा की परंपरा और प्रयागराज के माघ मेले को नई ऊंचाई देने का उद्देश्य लोक परंपराओं को मजबूत करना है। हर क्षेत्र और हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और लोक गाथाएं अगली पीढ़ी तक पहुंचें।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।
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