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यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन? मुलायम सिंह यादव भी थे मंत्री, रिक्शे से राजभवन पहुंचे थे सादगी की मिसाल

यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन? मुलायम सिंह यादव भी थे मंत्री, रिक्शे से राजभवन पहुंचे थे सादगी की मिसाल यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन? Indepandance Day News : क्या आप जानते हैं कि यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौ…

prabhatkhabar.com के अनुसार15 अगस्त 2026 को 11:55 am बजे
यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन? मुलायम सिंह यादव भी थे मंत्री, रिक्शे से राजभवन पहुंचे थे सादगी की मिसाल

सौजन्य से:- prabhatkhabar.com

यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन? मुलायम सिंह यादव भी थे मंत्री, रिक्शे से राजभवन पहुंचे थे सादगी की मिसाल

यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन?

Indepandance Day News : क्या आप जानते हैं कि यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन थे? उन्होंने अपनी सादगी से सभी का दिल जीत लिया था. उनकी सरकार में मुलायम सिंह यादव जैसे दिग्गज भी मंत्री रह चुके हैं.

Indepandance Day News : कहते हैं कि राजनीति में वक्त कब करवट बदल दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. उत्तर प्रदेश की सियासत में भी एक ऐसा दौर आया था, जब जनता पार्टी की लहर में एक ऐसे यादव नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली, जिसका नाम आज की राजनीति में उतना चर्चित नहीं है. दिलचस्प बात यह है कि बाद में यूपी की राजनीति में बड़ा नाम बने मुलायम सिंह यादव भी उनकी सरकार में मंत्री रहे थे.

यूपी के पहले यादव मुख्यमंत्री कौन थे?

उत्तर प्रदेश में यादव समाज से मुख्यमंत्री बनने की बात होते ही आमतौर पर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव का नाम सामने आता है. लेकिन इतिहास के पन्ने पलटें तो इन दोनों से काफी पहले एक यादव नेता यूपी की सत्ता संभाल चुका था. साल 1977 में राम नरेश यादव मुख्यमंत्री बने और करीब पौने दो साल तक प्रदेश की कमान संभाली.

आपातकाल के बाद बदला देश का राजनीतिक माहौल

यह वह समय था जब देश में आपातकाल के बाद राजनीति पूरी तरह बदल चुकी थी. कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना हुआ था और जनता पार्टी की लहर चल रही थी. लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली. इसके बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो पार्टी ने भारी बहुमत हासिल कर लिया.

मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कई दावेदार

अब असली सवाल मुख्यमंत्री के नाम को लेकर था. पार्टी के भीतर कई दावेदार थे और अलग अलग गुट अपने पसंदीदा नेता को आगे बढ़ाना चाहते थे. एक तरफ दलित नेता को समर्थन मिल रहा था, तो दूसरी तरफ एक यादव नेता के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही थी. आखिरकार विधायकों के बीच मतदान हुआ और यादव नेता मुख्यमंत्री चुन लिए गए.

पहली बार लोकसभा पहुंचे और उसी साल बने CM

उनकी राजनीतिक कहानी इसलिए भी खास थी क्योंकि वह बहुत लंबे समय तक सत्ता की सीढ़ियां चढ़कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंचे थे. जिस साल वह पहली बार लोकसभा पहुंचे, उसी साल उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया.

मुलायम सिंह यादव भी उनकी सरकार में थे मंत्री

उनकी सरकार में आगे चलकर यूपी की राजनीति के सबसे बड़े यादव चेहरों में शामिल हुए मुलायम सिंह यादव भी मंत्री थे. उन्हें सहकारिता और पशुपालन जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी. यानी जिस नेता ने बाद में कई बार यूपी की सत्ता संभाली, उसने भी अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दौर में इसी सरकार में मंत्री के तौर पर काम किया था.

मुख्यमंत्री होकर भी नहीं छोड़ी सादगी

मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उनकी पहचान सादगी के लिए बनी रही. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए वह राजभवन तक रिक्शे से पहुंचे थे. पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने इसी तरह सादगी दिखाई. यही वजह थी कि पूर्वांचल में उनकी छवि एक जमीन से जुड़े और सामान्य जीवन जीने वाले नेता की बनी.

जनता पार्टी में बढ़ने लगे आपसी मतभेद

लेकिन राजनीति में सब कुछ हमेशा एक जैसा नहीं चलता. जनता पार्टी के भीतर आपसी मतभेद बढ़ने लगे. सबसे बड़ा विवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेताओं की भूमिका को लेकर खड़ा हुआ. पार्टी के अंदर एक गुट चाहता था कि संघ से जुड़े नेताओं के संबंध खत्म हों, जबकि दूसरा पक्ष इसके खिलाफ था.

बहुमत का संकट और गिर गई सरकार

यह विवाद धीरे धीरे इतना बढ़ा कि सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो गया. कुछ मंत्रियों ने सरकार से दूरी बना ली. इसके बाद संघ की शाखाओं को लेकर एक सरकारी आदेश ने राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया. अगले ही दिन मुख्यमंत्री बहुमत साबित नहीं कर सके और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

मुख्यमंत्री पद के बाद भी जारी रहा राजनीतिक सफर

मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद भी उनका राजनीतिक सफर खत्म नहीं हुआ. उन्होंने अलग अलग राजनीतिक दौर देखे और बाद में कांग्रेस में भी शामिल हुए. वह राज्यसभा पहुंचे, विधानसभा चुनाव जीते और अंत में मध्य प्रदेश के राज्यपाल की जिम्मेदारी भी संभाली.

89 की उम्र में निधन, लेकिन यूपी की सियासत में आज भी जिंदा है उनका नाम

22 नवंबर 2016 को 89 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. लेकिन यूपी की राजनीति में उनका नाम आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि वह उस दौर के पहले यादव मुख्यमंत्री थे, जब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की राजनीति शुरू भी नहीं हुई थी. उनकी कहानी बताती है कि राजनीति में आज का बड़ा चेहरा भी कभी किसी दूसरे दौर के नेता की सरकार में मंत्री बनकर अपनी शुरुआत कर सकता है.

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