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योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना का कमाल, 16 हजार महिलाओं ने वसूला 3500 करोड़ का बिजली बिल; कमाए 45 करोड़ - up vidyut sakhi scheme 16k women collect 3500 cr earn 45 cr

योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना का कमाल, 16 हजार महिलाओं ने वसूला 3500 करोड़ का बिजली बिल; कमाए 45 करोड़ योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना ने उत्तर प्रदेश के गांवों में हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। 16 हजार से…

Jagran के अनुसार12 अगस्त 2026 को 04:18 pm बजे
योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना का कमाल, 16 हजार महिलाओं ने वसूला 3500 करोड़ का बिजली बिल; कमाए 45 करोड़ - up vidyut sakhi scheme 16k women collect 3500 cr earn 45 cr

सौजन्य से:- Jagran

योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना का कमाल, 16 हजार महिलाओं ने वसूला 3500 करोड़ का बिजली बिल; कमाए 45 करोड़

योगी सरकार की 'विद्युत सखी' योजना ने उत्तर प्रदेश के गांवों में हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। 16 हजार से अधिक सखियों ने 3500 करोड़ रुपये से अ ...और पढ़ें

HighLights

- 16 हजार विद्युत सखियों ने 3500 करोड़ रुपये का बिल वसूला।

- महिलाओं ने कमीशन के रूप में 45.4 करोड़ रुपये कमाए।

- योजना से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और उपभोक्ताओं को सुविधा मिली।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में अब बिजली का बिल केवल घर का खर्च नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के स्वावलंबन और सम्मानजनक कमाई का जरिया बन चुका है। योगी सरकार की नीतियों के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 16 हजार 'विद्युत सखियों' ने अब तक 1.53 करोड़ (1,53,62,709) बिजली बिल जमा कराकर रिकॉर्ड 3,500 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है। इस पारदर्शी व्यवस्था के बदले इन ग्रामीण महिलाओं के हाथों में 45.4 करोड़ रुपये की सीधी कमीशन आय पहुंची है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला भागीदारी की नई पटकथा लिखी है।

रोजगार और जनसुविधा का अनूठा 'विद्युत सखी' मॉडल

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के संयुक्त सहयोग से चल रहा यह कार्यक्रम रोजगार और जनसुविधा का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। प्रदेश में अब तक 31,681 महिलाओं को 'विद्युत सखी' के रूप में चिन्हित कर उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ई-वॉलेट रिचार्ज कर गाँव-गाँव जाकर उपभोक्ताओं का ऑनलाइन बिल जमा कर रही हैं। भुगतान होते ही उपभोक्ता के मोबाइल पर त्वरित पुष्टि संदेश (SMS) पहुँच जाता है।

उपभोक्ताओं के समय और पैसे दोनों की बचत

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण उपभोक्ताओं को मिला है। पहले ग्रामीणों को बिल जमा करने के लिए दूर-दराज के शहरों, बिजली दफ्तरों या जन सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उनका समय और बस का किराया दोनों खर्च होता था। अब विद्युत सखियां घर-घर जाकर सुविधा दे रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को लाइन में लगने की झंझट से मुक्ति मिली है और राजस्व संग्रह भी समय पर हो रहा है।

हर बिल पर कमीशन: तय व्यवस्था से बनी नियमित आय

विद्युत सखियों की आय बिल कलेक्शन से मिलने वाले निश्चित कमीशन पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर विद्युत सखी को 20 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 12 रुपये का सीधा कमीशन दिया जाता है। अब तक वितरित 45.4 करोड़ रुपये का कुल कमीशन यह साबित करता है कि यह योजना स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए एक स्थायी, सुरक्षित और नियमित स्वरोजगार का माध्यम बन चुकी है।

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त्रिस्तरीय फायदा: महिला सशक्तिकरण, उपभोक्ता राहत और विभाग को राजस्व

विद्युत सखी मॉडल आज त्रिकोणीय लाभ (Triple Benefit) का प्रतीक बन चुका है। पहली बात—महिलाओं को अपने ही गाँव में सुरक्षित रोजगार मिला है; दूसरी—उपभोक्ताओं को घर के पास पारदर्शी सेवा मिल रही है; और तीसरी—बिजली विभाग का बकाया और राजस्व संग्रह बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सुचारू हो गया है। यह व्यवस्था अब केवल बिल कलेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में वित्तीय साक्षरता और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सबसे मजबूत कड़ी साबित हो रही है।

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