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Ground Report: 4200 करोड़ का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, 20 दिन में पांचवीं मरम्मत, अब तीन इंजीनियरों पर एक्शन

तेज रफ्तार सफर और बेहतर कनेक्टिविटी के दावे के साथ शुरू हुआ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बार-बार मरम्मत को लेकर चर्चा में है. उन्नाव के पास सड़क की सतह पर दोबारा स्लिपेज सामने आने के…

Aaj Tak News के अनुसार4 अगस्त 2026 को 04:18 pm बजे
Ground Report: 4200 करोड़ का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, 20 दिन में पांचवीं मरम्मत, अब तीन इंजीनियरों पर एक्शन

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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तेज रफ्तार सफर और बेहतर कनेक्टिविटी के दावे के साथ शुरू हुआ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बार-बार मरम्मत को लेकर चर्चा में है. उन्नाव के पास सड़क की सतह पर दोबारा स्लिपेज सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को परियोजना से हटा दिया है और उन्हें दो साल के लिए एनएचआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है. हालांकि एनएचआई ने साफ किया है कि एक्सप्रेसवे के डिजाइन या निर्माण गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है और समस्या सिर्फ सड़क की ऊपरी बिटुमिनस सतह में स्लिपेज की है. प्राधिकरण का दावा है कि यातायात पूरी तरह सुरक्षित है और प्रभावित हिस्से की मरम्मत 6 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी.

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एनएचआई के मुताबिक 26 जुलाई 2026 को नियमित रूट पेट्रोलिंग के दौरान उन्नाव में कोरारी टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर आगे, किलोमीटर संख्या 64 पर सड़क की सतह में स्लिपेज दिखाई दिया. सूचना मिलते ही एनएचआई और निर्माण एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची. जांच के बाद अगले ही दिन 27 जुलाई को प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर दी गई.

मरम्मत के कुछ दिन बाद लगातार हुई भारी बारिश के कारण आसपास के हिस्सों में भी सड़क की सतह पर दोबारा स्लिपेज सामने आया. इसके बाद रियायतग्राही कंपनी ने फिर से सुधार कार्य शुरू किया. फिलहाल करीब तीन किलोमीटर हिस्से में बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक को सिंगल लेन से निकाला जा रहा है. करीब 200 से 300 मीटर लंबे हिस्से में मरम्मत का काम जारी है, जिससे यात्रियों को धीमी गति से गुजरना पड़ रहा है.

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20 दिन में कई बार मरम्मत के बाद NHAI का बड़ा एक्शन

एनएचआई का कहना है कि मानसून और लगातार बारिश के कारण काम की रफ्तार प्रभावित हुई है, लेकिन 6 अगस्त तक प्रभावित हिस्से की मरम्मत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही जिन स्थानों पर भविष्य में स्लिपेज की संभावना है, वहां भी निवारक और सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने.

परियोजना की निगरानी में लापरवाही मिलने पर निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है. तीनों अधिकारियों को अगले दो वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचआई और एनएचआईडीसीएल की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.

बार-बार मरम्मत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एनएचआई ने स्पष्ट किया है कि समस्या एक्सप्रेसवे के डिजाइन, पुल या निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी नहीं है. शुरुआती तकनीकी जांच में पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं. स्लिपेज केवल सड़क की ऊपरी बिटुमिनस लेयर और पेवमेंट में सामने आया है. एनएचआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरम्मत का पूरा खर्च संबंधित रियायतग्राही कंपनी उठाएगी. परियोजना अभी रखरखाव अवधि में है, इसलिए इस सुधार कार्य पर केंद्र सरकार या एनएचआई पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा.

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तीन किलोमीटर हिस्से में बैरिकेडिंग, सिंगल लेन से गुजर रहे वाहन

प्राधिकरण का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु है. राष्ट्रीय राजमार्गों की नियमित निगरानी, समयबद्ध रखरखाव और किसी भी तकनीकी समस्या पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है. एनएचआई का दावा है कि यात्रियों की सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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