नई टेक्नोलॉजी से दूर हो रही गोरखपुर सबसे बड़ी समस्या; जलभराव से बचाव के लिए कई योजनाएं
नई टेक्नोलॉजी से दूर हो रही गोरखपुर सबसे बड़ी समस्या; जलभराव से बचाव के लिए कई योजनाएं जिन इलाकों में पहले जलभराव कई दिनों तक रहता था, अब बारिश थमने के डेढ़-दो घंटे के भीतर पानी निकलने लगा है. By ETV Bharat Uttar Pradesh…

सौजन्य से:- ETV Bharat
नई टेक्नोलॉजी से दूर हो रही गोरखपुर सबसे बड़ी समस्या; जलभराव से बचाव के लिए कई योजनाएं
जिन इलाकों में पहले जलभराव कई दिनों तक रहता था, अब बारिश थमने के डेढ़-दो घंटे के भीतर पानी निकलने लगा है.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 7:35 AM IST
गोरखपुर: बारिश में जलभराव गोरखपुर की सबसे बड़ी समस्या है. कटोरेनुमा भौगोलिक स्थिति और चारों तरफ नदियों की वजह से शहर का पानी निकालना मुश्किल हो जाता है. शहर किनारे बने बंधे जहां नदियों के बाढ़ से बचाते हैं, वहीं जल निकासी में बाधक भी बनते हैं. हालांकि नगर निगम और जीडीए की कोशिशों से हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं.
जिन इलाकों में पहले जलभराव कई दिनों तक बना रहता था, वहां अब बारिश थमने के डेढ़ से दो घंटे के भीतर पानी निकलने लगा है. नगर निगम ने मानसून आने के पहले बड़े नालों से लेकर छोटे नालों तक की सफाई कराकर तैयारी को परख लिया है. इसके साथ ही उन इलाकों को भी चिन्हित किया है, जहां सबसे ज्यादा वाटर लॉगिंग की समस्या रहती है. इसके लिए नगर निगम ने अस्थाई पंपों की व्यवस्था की है.
नगर आयुक्त अजय जैन ने बताया कि शहर में जल निकासी के लिए पंपिंग स्टेशनों का सहारा लिया जा रहा है. करीब दो दर्जन ऑटोमेटिक पंप लगाए गए हैं, जो जलभराव होते ही सक्रिय हो जाते हैं.
इसके अलावा अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम (UFMS) के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां तत्काल राहत के उपाय किए जा रहे हैं. इसका असर शहर के कई प्रमुख इलाकों में दिखाई देने लगा है.
गोरखपुर में नगर निगम ने 59 हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं. चिन्हित स्थानों पर पंपिंग सेट की व्यवस्था की गई है, ताकि बारिश के दौरान होने वाली जलजमाव से तुरंत निपटा जाए. गोरखपुर के पाश इलाके में भी वॉटर लॉगिंग की समस्या विकराल रही है.
मुख्य रूप से विजय चौक, इलाहीबाग, जिला अस्पताल परिसर व आसपास की सड़कें, धर्मशाला चौराहा, भगत चौराहा समेत दर्जनों मोहल्लों और राप्ती कापलेक्स में तेज बारिश के बाद जलभराव की स्थिति अभी भी चुनौती बनी हुई है.
नगर निगम में मानसून की बारिश से निपटने के लिए ऑटोमेटिक पंप स्टेशन भी सक्रिय किए हैं, जिसमें 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इसमें टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है.
अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल वॉटर लॉगिंग वाले स्थानों को चिन्हित करने के साथी ऑटो मोड में कंट्रोल रूम को सूचित करता है. सूचना के बाद नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी त्वरित ढंग से वाटर लागिंग वाले क्षेत्र में अलर्ट होकर के पानी निकासी की समुचित व्यवस्था कर समस्या को दूर करते हैं.
मानसून की बारिश में अगर शिकायतों पर गौर करें तो कंट्रोल रूम में अब तक तकरीबन 100 शिकायतें रजिस्टर्ड की गई हैं, जिसका निस्तारण किया गया है. इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी व्हाट्सएप और फोन कॉल के जरिए सूचना मिली, जिसका निस्तारण नगर निगम के कर्मचारियों ने समयबद्ध ढंग से किया. गोरखपुर को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई योजनाओं को मंजूरी दी है.
कई योजनाओं का प्रस्ताव: मुख्यमंत्री की निगरानी में 495 करोड़ की लागत से गोड़धोइया नाला परियोजना, गोरखपुर की जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने पर काम चल रहा है. परियोजना के तहत पक्का नाला बनने के बाद लगभग 17 वार्डों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है.
इसके साथ ही पुराने शहर के इलाकों, खासकर इलाहीबाग और बिछिया-कूड़ाघाट क्षेत्र में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के लिए करीब 144 करोड़ रुपए की नई योजना को मंजूरी दी गई है.
124 करोड़ से बनेगा गुलरिहा-चिलुआताल नाला: जल निकासी की एक और बड़ी योजना के तहत गुलरिहा से चिलुआताल तक करीब 12.36 किलोमीटर लंबे आरसीसी नाले के निर्माण का प्रस्ताव है. इस परियोजना पर लगभग 124 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.
प्रस्तावित नाले की जल निकासी क्षमता करीब 3200 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) बताई जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, इसके निर्माण से भारी बारिश के दौरान भी पानी का तेज बहाव संभव होगा. परियोजना से करीब 40 हजार लोगों को सीधे तौर पर जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है.
सेंसर बताएंगे पानी का स्तर: जलभराव से तत्काल निपटने के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है. ऑटोमेटिक वाटर लेवल सेंसर और अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल के जरिए जलस्तर पर नजर रखी जा रही है, ताकि पानी बढ़ते ही संबंधित टीम को सूचना मिल सके और पंपिंग व निकासी की कार्रवाई तेजी से शुरू की जा सके.
नगर निगम और जीडीए की इन कोशिशों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा असर यह है कि जलभराव की समस्या की अवधि पहले के मुकाबले काफी कम हुई है.
हालांकि, शहर को पूरी तरह जलभराव मुक्त बनाने की चुनौती अभी बाकी है. फिलहाल, गोरखपुर में बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि जो पानी पहले हफ्तों तक सड़कों और मोहल्लों में जमा रहता था, वह अब कई इलाकों में घंटों के भीतर निकलने लगा है.
बड़े ड्रेनेज प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद शहर की जल निकासी व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है. गोरखपुर के लिए नासूर हो चुके जलजमाव की समस्या से नगर निगम के किए इंतजामों पर नगर के स्थानीय नागरिक शैलेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि जलजमाव से राहत तो मिली है, लेकिन नालियों के निर्माण में बरती जा रही लापरवाही से शत-प्रतिशत लाभ नहीं मिल पा रहा है.
बिछिया कॉलेज ही रहने वाली पूर्वी सिंह ने बताया की नाले के निर्माण के चलते, जो पानी हफ्तों लगा रहता था, अब उसमें काफी सुधार हुआ है. वाटर लागिंग की समस्या समाप्त हो गई है, लेकिन खुले नालों की वजह से जिसमें पानी जमा है, इसमें बीमारी फैलने की आशंका है.
पावर हाउस रोड डोमखाना के रहने वाले प्रदीप ने बताया कि बीते साल तक यहां बारिश के दिनों में बाढ़ जैसे हालात हो जाते थे, लेकिन नाले के निर्माण के साथ ही वह दिन खत्म हो गए. अब बारिश होती है तो पानी कुछ घंटे में नाले के जरिए निकल जाता है.
प्रमोद पाल का कहना है कि यह शहर बारिश के दिनों में जलजमाव की समस्या से जूझता रहा है. पहले महीनों तक पानी जमा रहता था, लेकिन नाला निर्माण के बाद स्थिति बेहद सुधरी है. पानी तो लगता है लेकिन कुछ देर में निकल जाता है.
नगर निगम की तैयारी: नगर आयुक्त अजय जैन ने बताया कि इस बार बारिश के पानी से होने वाले जल जमाव से निपटने के लिए नगर निगम में 4 महीने पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी. तैयारी के क्रम में 14 बड़े नाले जिसमें से कई नाले बरसों से साफ नहीं हुए थे, उनकी सफाई नीचे के तह से की गई.
इसके अलावा छोटे बड़े 324 नालों की सफाई कराई गई. 59 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए जो हॉटस्पॉट की श्रेणी में आते थे. वहां पर 59 पंप और अस्थाई रूप से लगाए गए. वहां बाकायदा कर्मचारियों की तैनाती की.
इसके अलावा 21 स्थाई पंप है जहां 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती 3 शिफ्ट में की गई, ताकि 24 घंटे अलर्ट मोड में रहें. आम लोगों तक पहुंच बनाने के लिए नगर निगम ने कंट्रोल रूम बनाया है, जिसमें करीब 100 से अधिक शिकायत मिलीं. सभी का निस्तारण कर दिया गया.
फिलहाल नगर निगम किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरीके से तैयार है. नगर निगम में टेक्नोलॉजी का भी उपयोग किया है जिसमें अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल की स्थापना करते हुए हॉटस्पॉट वाले एरिया में सेंसर लगा करके वहां की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी और नालों की सफाई और कर्मचारियों की तैनाती के जरिए चुनौती से पार पाने की कोशिश है. हालांकि, उनका इम्तिहान होना भी बाकी है.
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