कानपुर में भाजपाइयों का 'कुर्सी कांड'! बैठने को लेकर मारपीट, एक के कान से निकला खून तो दूसरे के फटे कपड़े
कानपुर में भाजपा के प्रदेश महामंत्री और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रभारी शंकर लाल लोधी के स्वागत समारोह में उस वक्त हंगामा मच गया,…

सौजन्य से:- AajTak
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कानपुर में भाजपा के प्रदेश महामंत्री और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रभारी शंकर लाल लोधी के स्वागत समारोह में उस वक्त हंगामा मच गया, जब पार्टी कार्यालय में मंच पर बैठने को लेकर दो पदाधिकारियों के बीच जमकर मारपीट हो गई.
पहले कहासुनी हुई और फिर देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया. कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दोनों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन विवाद कुछ देर बाद दोबारा भड़क गया. मामला यहीं नहीं थमा. दोनों पदाधिकारियों को कार्यालय से बाहर भेजे जाने के बाद भी उनके बीच मारपीट की स्थिति बनी रही. इस दौरान एक पदाधिकारी के कान में चोट लगने और खून निकलने की जानकारी सामने आई. घटना के बाद संगठन में भी हलचल मच गई. क्षेत्रीय अध्यक्ष ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है.
बुधवार को कानपुर के केशव नगर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रदेश महामंत्री एवं कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभारी शंकर लाल लोधी के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था. क्षेत्र प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका कानपुर का पहला दौरा बताया जा रहा है. कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी थी. स्वागत कार्यक्रम को लेकर कार्यालय में उत्साह का माहौल था. मंच पर नेताओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी. इसी दौरान मंच पर सीट को लेकर पूर्व जिला मंत्री शिवपूजन सविता और जिला सह-मीडिया प्रभारी डॉ. विनय सिंह राठौर के बीच कहासुनी शुरू हो गई. शुरुआत में आसपास मौजूद लोगों ने इसे सामान्य विवाद समझा, लेकिन कुछ ही देर में दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी.
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देखते ही देखते हाथापाई में बदली बहस
मंच पर विवाद बढ़ने के बाद दोनों पदाधिकारी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए. बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई. कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की. झड़प के दौरान दोनों के कपड़े तक फट गए. स्वागत समारोह में मौजूद पार्टी नेताओं के सामने अचानक हुए इस घटनाक्रम से कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई. मामला बिगड़ता देख भाजपा दक्षिण जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह अन्य पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने दोनों को समझाकर अलग किया. इसके बाद लगा कि विवाद शांत हो गया है और कार्यक्रम को सामान्य तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा. लेकिन कुछ देर बाद स्थिति फिर बिगड़ गई.
दोबारा भिड़े दोनों पदाधिकारी
बताया गया कि पहली झड़प के बाद भी दोनों के बीच तनाव कम नहीं हुआ. कुछ समय बाद दोनों फिर आमने-सामने आ गए और विवाद दोबारा मारपीट में बदल गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पार्टी पदाधिकारियों ने दोनों को कार्यक्रम स्थल से बाहर भेज दिया. संगठन के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और स्वागत समारोह का माहौल देखते हुए पदाधिकारियों ने किसी तरह स्थिति को संभालने की कोशिश की. हालांकि, कार्यालय से बाहर निकलने के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
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कार्यालय के बाहर भी हुआ विवाद
दोनों पदाधिकारियों के बाहर आने के बाद भी उनके बीच कहासुनी और मारपीट की स्थिति बनी रही. इसी दौरान डॉ. विनय सिंह राठौर के कान में चोट लगने और खून निकलने की जानकारी सामने आई. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच बहस और धक्का-मुक्की होती दिखाई दे रही है. एक अन्य वीडियो में कानपुर दक्षिण के जिलाध्यक्ष मामले को शांत कराने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद यह मामला पार्टी के स्थानीय संगठन में चर्चा का विषय बन गया. स्वागत समारोह जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम में दो पदाधिकारियों के बीच हुई मारपीट ने संगठन के अनुशासन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.
क्षेत्रीय अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
घटना की जानकारी मिलने के बाद कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए साफ किया कि पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता. संगठन की ओर से पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया गया है. इसके लिए पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है. समिति में क्षेत्रीय मंत्री सुनील तिवारी, दक्षिण जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह, उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित, ग्रामीण जिलाध्यक्ष उपेंद्र पासवान और क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अशोक राजपूत को शामिल किया गया है.
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तीन दिन में देनी होगी रिपोर्ट
पांच सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की जांच कर **तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट** सौंपने को कहा गया है. समिति घटना से जुड़े तथ्यों, दोनों पदाधिकारियों की भूमिका और विवाद की शुरुआत के कारणों की जानकारी जुटाएगी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जांच में यदि किसी पदाधिकारी की भूमिका अनुशासनहीनता में सामने आती है तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. क्षेत्रीय अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि मामला केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगा. जांच में दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. गंभीर अनुशासनहीनता साबित होने पर संगठन से निष्कासन तक की कार्रवाई संभव बताई जा रही है.
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