गठबंधन नहीं होता है तो विकल्प के रूप में उतरेंगे, रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर लखनऊ में चिराग का ऐलान
लोकतंत्र में विकल्पों की बात कार्यक्रम में लोजपा रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि मेरा मानना है, लोकतंत्र में जितने अधिक विकल्प होते हैं, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होता है। लोगों के पास जितने अधिक विकल्प होते हैं,…

सौजन्य से:- Navbharat Times
लोकतंत्र में विकल्पों की बात
कार्यक्रम में लोजपा रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि मेरा मानना है, लोकतंत्र में जितने अधिक विकल्प होते हैं, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होता है। लोगों के पास जितने अधिक विकल्प होते हैं, हमारा लोकतंत्र उतना ही मजबूत होता है। इसलिए, यदि कोई गठबंधन नहीं बनता है, तो मैं निश्चित रूप से खुद को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करूंगा। आखिरकार, यह उत्तर प्रदेश के लोगों को निर्णय लेना है।चिराग ने कहा कि मैंने अपने नेता और पिता राम विलास पासवान जी के निधन के तुरंत बाद 2020 में ऐसी ही स्थिति का अनुभव किया, जब बिहार में गठबंधन नहीं बन सका। मेरे प्रधानमंत्री के प्रति मेरी प्रतिबद्धता इतनी मजबूत थी, मैं किसी वैकल्पिक गठबंधन में शामिल नहीं हुआ। अपने दम पर चुनाव लड़ा, बिहार के लोगों के एक बड़े वर्ग ने हमारा समर्थन किया। हमें 6 फीसदी से अधिक वोट मिले, जिससे मेरी पार्टी को राजनीतिक महत्व मिला।
कल से राजनीति की बात
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आज मैं यहां एक बेटे की भूमिका में हूं। आज मैं सभी राजनीतिक मामलों को एक तरफ रखूंगा। कल से हम राजनीति करेंगे और सभी राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे, लेकिन आज मैं किसी की भावनाओं को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखूंगा। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल, अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता और उत्तर प्रदेश के कई मंत्री और विधायक यहां आए हैं। पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, यह मेरे और मेरी पार्टी के लिए बहुत मायने रखता है।विपक्ष के प्रदर्शन पर भी बोले
चिराग पासवान ने INDIA गठबंधन के विरोध को लेकर कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन करने की इजाजत है। आप जरूर प्रदर्शन करें और लोकतंत्र इससे मजबूत ही होता है। जितना सशक्त विपक्ष दिखता है या जितना सक्रिय विपक्ष दिखता है, उतनी ही सरकार या सत्ता पक्ष के लोगों की जवाबदेही बनती है। ऐसे में आप सवाल कीजिए पर उन सवालों के जवाब भी जानने का प्रयास कीजिए, क्योंकि जानकारी के अभाव में आप सिर्फ हंगामा ही करते रहेंगे। यह जानकारी सड़क से नहीं मिलने वाली है।चिराग ने कहा कि आपने एक दिन प्रदर्शन किया और अपनी बातों को अपने समर्थकों तक पहुंचाने में आप सफल रहे। अब जानिए भी कि जो सवाल आप उठा रहे हैं, उसके जवाब क्या हैं। उसके लिए बहुत साधारण प्रक्रिया है कि आप चुनाव आयोग से संपर्क कीजिए, समय मांगिए। मुख्य चुनाव आयुक्त खुद आपके सवालों के जवाब देंगे।
आस्था को बताया निजी मामला
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि मेरा भी व्यक्तिगत रूप से मानना है, आस्था पूरी तरह से निजी मामला है। किसी की आस्था पर सार्वजनिक चर्चा नहीं होनी चाहिए और न ही किसी को दूसरे की आस्था पर टिप्पणी करनी चाहिए। मैं खुद आस्तिक हूं और महादेव का बड़ा भक्त हूं। लेकिन, मेरी आस्था सिर्फ़ मेरे लिए है। निजी प्रार्थनाओं, एकांत और मेरी अपनी भक्ति भावना के लिए है। ऐसे में अगर कोई और इस पर टिप्पणी करता है और इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश करता है, तो मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा।चिराग ने कहा कि इसलिए, जो बात मैं अपने लिए स्वीकार नहीं करूंगा, उस पर मैं किसी और के मामले में भी टिप्पणी नहीं करूंगा। वे राम मंदिर जाना चाहते हैं या नहीं। उनकी आस्था है या नहीं, इसका भारतीय राजनीति या उत्तर प्रदेश की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति विकास के रास्ते पर आगे बढ़नी चाहिए। जाति, धर्म या व्यक्तिगत आस्था जैसे मुद्दे असल मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं और भ्रमित करते हैं। जब आपके पास असल मुद्दे नहीं होते, तो आप ऐसे मामले उठाते हैं।
पीएम मोदी का किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पीएम नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हम अक्सर कई घटनाओं और मौकों को ऐतिहासिक कहते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि असल में यही एक ऐतिहासिक पल है। पिछले 25 सालों से मेरे प्रधानमंत्री लगातार सरकार के मुखिया के तौर पर सेवा कर रहे हैं] पहले गुजरात और फिर भारत में एक जनसेवक की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसा मौका बहुत कम लोगों को मिलता है, न सिर्फ़ भारत के इतिहास में बल्कि दुनिया भर में।चिराग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय इतिहास में भी ऐसे बहुत कम नाम हैं, जिन्होंने राज्य या सरकार के स्तर पर लगातार 25 सालों तक नेतृत्व की भूमिका निभाई हो। मेरे लिए यह पल और भी खास है क्योंकि मेरे पिता की पीढ़ी और मेरी पीढ़ी, दोनों को ही प्रधानमंत्री की कैबिनेट का हिस्सा बनने और उनके काम करने के तरीके से सीखने का सौभाग्य मिला है। मेरे पिता ने लंबे समय तक उनकी कैबिनेट में सेवा की, और पिछले दो सालों से मैं इस ज़िम्मेदारी को आगे बढ़ा रहा हूं।
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