'बबुआ भी यही करते थे, 7 बजे तो महफिल जम जाती थी, सीएम योगी का अखिलेश यादव पर तंज, कहा- बस बजट की लूट थी
सीएम योगी हथकरघा दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जो काम आज हो रहे हैं, वो 2017 से पहले भी हो सकते थे, लेकिन सरकारों के पास सोचने का समय नहीं था। हेमेंद्र त्रिपाठी, लखनऊ: यूपी के मुख्यमंत्री यो…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सीएम योगी हथकरघा दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जो काम आज हो रहे हैं, वो 2017 से पहले भी हो सकते थे, लेकिन सरकारों के पास सोचने का समय नहीं था।
हेमेंद्र त्रिपाठी, लखनऊ: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। सीएम योगी ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ लोग हमेशा बच्चे ही बने रहते हैं। उन्हें प्रदेश की जनता के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता। सीएम योगी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर लोक भवन सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने संत कबीर राज्य स्तरीय हैंडलूम पुरस्कार बांटे और कहा कि हथकरघा हमारी सांस्कृतिक पहचान है। आज का दिन, केवल एक दिवस नहीं है बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है।
इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों के साथ उनके जीवन में जो शब्द जुड़ जाता है, वो उससे पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं। कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। बबुआ भी यही करते थे। 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम जाते थे और 7 बजे महफिल जम जाती थी, तो फिर वो प्रदेश के बारे में कहां सोचते। यही वजह थी कि 2017 से पहले यूपी में आए दिन दंगे होते थे, महीनों कर्फ्यू लगा रहता था और इंसेफेलाइटिस से, डेंगू से मासूमों की मौतें होती थीं।'
2017 से पहले वीरान रहते थे बाजार- सीएम योगी
सीएम योगी ने अखिलेश सरकार के दौर की खामियां गिनाते हुए कहा, '2017 से पहले प्रदेश में बिजली, सड़क और कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बदहाल थी। जब बाजार वीरान रहते हैं, तो उसका सीधा असर 70 प्रतिशत कार्य-बल वाली महिलाओं और स्थानीय कारीगरों पर पड़ता है। पहले की सरकारों की रूचि केवल विकास के बजट की लूट में थी। वहीं, आज भाजपा सरकार में बेसिक स्कूलों में साफ पानी, टॉयलेट, फ्री यूनिफॉर्म और बैग मिल रहे हैं। आज पीएम मोदी के 'निपुण भारत अभियान' को धरातल पर उतारा जा रहा है।'
भदोही के कालीन का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, 'आज मैं भदोही में कालीन क्लस्टर देखता हूं, जो 2017 के पहले मृतप्राय हो चुका था, लेकिन आज वह दुनिया के बाजार में करोड़ों का एक्सपोर्ट कर रहे हैं। 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी के मंत्र ने पूरे देश को पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक एकता के सूत्र में बांधा था। यह वही दौर था, जब महात्मा गांधी का आजादी के आंदोलन में पदार्पण नहीं हुआ था, लेकिन स्वदेशी ने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। आज हथकरघा और हस्तशिल्प उसी स्वदेशी की मुख्य ताकत हैं।'
लेखक के बारे मेंधर्मेंद्र कुमारधर्मेंद्र कुमार, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में सीनियर जर्नलिस्ट/असिस्टेंट एडिटर हैं। मार्च 2024 से धर्मेंद्र का पत्रकारिता का सफर टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के एनबीटी ऑनलाइन के साथ शुरू हुआ। इस समय धर्मेंद्र के पास, भारत की राजनीति का द्वार कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश और देवभूमि उत्तराखंड के स्टेट एडिटर की जिम्मेदारी है। हालांकि, वह इससे पहले एनबीटी ऑनलाइन में क्राइम सेक्शन, गुड न्यूज और जंगल न्यूज जैसे सेक्शन भी संभाल चुके हैं। 14 साल के करियर में धर्मेंद्र ने पत्रकारिता की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल से की। यहां उन्होंने जर्नलिज्म की बारीकियां सीखते हुए होम पेज संभाला और जॉब सेक्शन की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी ली।
यूपी में बीएसपी के कमबैक की खबरें हों, सपा के पीडीए समीकरण की या फिर बीजेपी की हिंदुत्ववादी राजनीति की, धर्मेंद्र ने गहराई से खबरों का विश्लेषण किया है। इनके अलावा धर्मेंद्र कुमार ने गुड न्यूज सेक्शन में कई यूनिक स्टोरी की हैं। इनमें आईआरएस अधिकारी और अपने करियर में 7 सरकारी नौकरी पाने वाले संदीप राणा की इंटरव्यू स्टोरी भी शामिल है। क्राइम सेक्शन कवर करते हुए उन्होंने अपराध से जुड़े वीडियो भी किए, जिनमें अलग-अलग पहलुओं के साथ घटना को बयां किया गया।
पत्रकारिता अनुभव
धर्मेंद्र ने 2011 से अमर उजाला डिजिटल के साथ पत्रकारिता का करियर शुरू किया। यहां 5 साल 7 महीने की लंबी पारी के बाद वह वनइंडिया-डेलीहंट के साथ जुड़े। वन इंडिया में भी करीब साढ़े सात साल का लंबा सफर तय करने के बाद वह एनबीटी ऑनलाइन के साथ जुड़े और फिलहाल यूपी-उत्तराखंड स्टेट एडिटर के पद पर हैं।
धर्मेंद्र ने दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स किया है। कोर्स के दौरान उन्होंने दो रिसर्च प्रोजेक्ट 'नक्सलवाद पर हिंदी अखबारों का नजरिया' और 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह- एक विचार'प्रस्तुत किए।... और पढ़ें
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