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सरकार की आधुनिक तकनीक के दावों की उड़ीं धज्जियां, सफर शुरू होते ही जगह-जगह धंसा 57 करोड़किमी वाला Lucknow-Kanpur Expressway - lucknow kanpur route starts sinking within 2 weeks of inauguration 40 patches in 22 days

सरकार की आधुनिक तकनीक के दावों की उड़ीं धज्जियां, सफर शुरू होते ही जगह-जगह धंसा 57 करोड़/किमी वाला Lucknow-Kanpur Expressway लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई भारी लापरवाही अब उजागर हो चुकी है। प्रति किलोमीटर57…

Jagran के अनुसार5 अगस्त 2026 को 07:18 pm बजे
सरकार की आधुनिक तकनीक के दावों की उड़ीं धज्जियां, सफर शुरू होते ही जगह-जगह धंसा 57 करोड़किमी वाला Lucknow-Kanpur Expressway - lucknow kanpur route starts sinking within 2 weeks of inauguration 40 patches in 22 days

सौजन्य से:- Jagran

सरकार की आधुनिक तकनीक के दावों की उड़ीं धज्जियां, सफर शुरू होते ही जगह-जगह धंसा 57 करोड़/किमी वाला Lucknow-Kanpur Expressway

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई भारी लापरवाही अब उजागर हो चुकी है। प्रति किलोमीटर57 करोड़ के भारी-भरकम बजट और आधुनिक तकनीक के दावों के साथ ...और पढ़ें

HighLights

- 13 जुलाई को हुआ था उद्घाटन, 14 से शुरू हो गया था सफर

- 26 जुलाई को सबसे पहले सड़क धंसने की आई थी समस्या

- प्रति किमी 57 करोड़ खर्च, 45 किमी सड़क पर 22 दिन में 40 पैबंद

जागरण संवाददाता, कानपुर। Lucknow Kanpur Expressway: एनएचएआई की कार्रवाई से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में लापरवाही बरती गई। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और भारी भरकम खर्च के बावजूद सफर शुरू होने के 22 दिन के अंदर ही एक्सप्रेसवे की सड़क की कलई खुलकर सामने आ गई। शुरुआत से ही सफर के दौरान जर्क की समस्या सामने आई थी, लेकिन धीरे-धीरे और भी कमियां दिखने लगीं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी 64 पर 200 मीटर मरम्मत स्थल क्षेत्र में चल रहा कार्य। जागरण

एक्सप्रेसवे पर 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अगर भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर खर्च 591 करोड़ रुपये हटा दिए जाएं तो एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रति किमी औसतन लगभग 57 करोड़ रुपये लगे हैं। अब हालत यह है कि उन्नाव से लखनऊ के बीच 63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के 45 किमी ग्रीन फील्ड हिस्से में 40 जगह छोटे-बड़े पैबंद यानी पैचवर्क के निशान हैं। सड़क की सतह असमान होने से वाहन जैसे ही रफ्तार पकड़ता है, तेज झटके महसूस होने लगते हैं।

लोकार्पण के दौरान एक्सप्रेसवे पर खड़े डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम आदित्यनाथ योगी। इंटरनेट मीडिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। इसे अत्याधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय निर्माण और भविष्य की स्मार्ट सड़क परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था। दूसरे दिन से सफर शुरू हो गया तो लगा कि टोल ज्यादा है, पर पुराने हाईवे की अपेक्षा इस पर सफर ज्यादा आसान होगा। हालांकि शुरुआत से ही पुल-पुलिया के एक्सपेंशन ज्वाइंट की गड़बड़ियां सफर का मजा खराब कर रही थीं।

कानपुर -लखनऊ एक्सप्रेस वे पर सड़क धंसने के कारण मार्ग परिवर्तन होने पर एकल मार्ग से आते जाते वाहन। संजय यादव

26 जुलाई को पहली बार सड़क धंसी तो जैसे सिलसिला शुरू हो गया। अब तक छह स्थानों पर सड़क धंस चुकी है। उन्नाव से लखनऊ लेन पर 27 और उधर से वापस आने में 13 जगह पैचवर्क हैं। सबसे ज्यादा सड़क धंसने की समस्या उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर आई है।

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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर रूट डायवर्जन क्षेत्र में किमी 64 पर लखनऊ से उन्नाव लेन पर चल रहा पैचिंग कार्य। जागरण

लगातार सामने आ रही कमियों के बाद जानकार निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच की भी जरूरत बता रहे हैं। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ल का कहना है कि केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। सड़क की सबग्रेड, बेस लेयर, ड्रेनेज व्यवस्था, कम्पेक्शन और निर्माण प्रक्रिया की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इसी प्रकार की समस्याएं दोबारा न उभरें।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी 64 पर 200 मीटर मरम्मत स्थल क्षेत्र में बरसात के पानी से बचाने के लिए डाले गए प्लास्टिक तिरपाल। जागरण

पद से हटाए जाने से पहले एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल वर्मा ने बताया कि केवल ग्रीन फील्ड हिस्से में समस्या आई है। कार्यदायी संस्था को अभी केवल 40 प्रतिशत भुगतान किया गया है, आगामी 15 सालों में 60 प्रतिशत भुगतान का अनुबंध है। एक्सप्रेसवे पर सभी कमियों को कार्यदायी संस्था के द्वारा ही खर्च वहन किया जाएगा।

प्रतिबंध के बाद भी कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे से गुजरते दो पहिया वाहन चालक। संजय यादव

आधुनिक तकनीक के दावे 'गड्ढों' में दब गए

एक्सप्रेसवे के निर्माण में आटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (एआइएमजीसी) तकनीक का उपयोग किया गया। दावा था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में पहली बार इस तकनीक से सड़क निर्माण किया गया है। यदि निर्माण सामग्री की मात्रा या गुणवत्ता में कोई अंतर आता है तो मशीन संकेत देती है। निर्माण के दौरान जीपीएस और थ्री-डी तकनीक की मदद से समतलता और ऊंचाई की भी लगातार निगरानी की गई थी। यह भी कहा गया था कि इस तकनीक से बनी सड़क पर एक दशक तक बड़े गड्ढे या गंभीर खराबी नहीं आएगी।

प्रतिबंध के बाद भी कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे से गुजरते दो पहिया वाहन चालक। संजय यादव

जानकार बोले, निर्माण और निगरानी में हुई लापरवाही

दैनिक जागरण की टीम के साथ सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके. शुक्ल ने एक्सप्रेसवे पर सफर किया। उन्हें करीब 37 वर्षों तक सड़क निर्माण परियोजनाओं पर काम करने का अनुभव है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर मिट्टी की पर्याप्त रोलिंग नहीं हुई, जिससे सबग्रेड पूरी तरह स्थिर नहीं हो सकी। ऐसे में बारिश के दौरान नमी बढ़ने और भारी वाहनों का दबाव पड़ने से सड़क धंसी है।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर टोल बैरियर के पास सकरा प्रवेश द्वार । जागरण

सड़क निर्माण सैंपल पास करने वालों ने दिखाई नरमी

मिट्टी की परतों का समुचित संपीड़न (कम्पेक्शन) नहीं होता तो बाद में सड़क की ऊपरी सतह पर दरारें और धंसाव दिखाई देने लगते हैं। निर्माण के साथ ही निगरानी की कमी दिखती है। ओवरलोड वाहनों का लगातार संचालन भी सड़क धंसने की वजह हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क निर्माण के दौरान सैंपल पास करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर टोल बैरियर के पास सकरा प्रवेश द्वार । जागरण

अभी चल रहा काम

किमी संख्या 63 के पास सड़क धंसने के साथ ही फट गई थी। इसकी मरम्मत हो गई है। किमी संख्या 64 के 200 मीटर में उन्नाव-लखनऊ क्षेत्र में चल रही मरम्मत का काम शेष लगभग 120 मीटर पैच पर बुधवार को भी पूरा नहीं हो सका। निर्माण एजेंसी ने कच्चे पैच के बरसाती पानी को सुखाने को लिए यहां 10 बड़े पंखा लगवाए हैं। यहां बुधवार को मरम्मत का काम जारी रहा।

पीएनसी के साथ 15 साल का अनुबंध, केवल 40 प्रतिशत हुआ भुगतान

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण आगरा की कंपनी पीएनसी ने किया है। इस कंपनी के साथ एनएचएआई ने 15 साल का अनुबंध किया है। इस अनुबंध के तहत 15 साल में कंपनी को तीन हजार करोड़ रुपये किस्तों में एनएचएआई देगा। निर्माण होने के बाद तक शर्तों के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत यानी नौ सौ करोड़ रुपये का भुगतान एनएचएआई ने किया है, शेष रकम अगले 15 सालों में छह-छह माह के अंतराल में 20 प्रतिशत किस्तों में देने का अनुबंध है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे के निर्माण की कुल लागत भूमि अधिग्रहण तक की जोड़कर 4200 करोड़ है, जबकि निर्माण की लागत तीन हजार करोड़ हैं।

आइआइटी खड़गपुर से कराई जाएगी जांच

एनएचएआई के चेयरमैन संतोष यादव के निर्देश पर दिल्ली से आई तीन सदस्यीय टीम एक्सप्रेसवे की जांच करने के लिए मंगलवार को पहुंची थी। रिपोर्ट तो नहीं आई है, लेकिन टीम ने पानी के रिसाव के चलते एक्सप्रेसवे धंसने की आशंका व्यक्त की थी। सड़क की जांच आइआइटी खड़गपुर के प्रोफेसरों से भी कराई जाएगी। इसके लिए एनएचएआई मुख्यालय से पत्र भेज दिया गया है।

एनएचएआई के जिम्मेदार अधिकारी

ये नई समस्याएं

- लखनऊ से उन्नाव लेन पर किमी 67 पर तीन स्थानों तक नई पैचिंग होने के बाद भी सड़क का दबा हिस्सा भारी वाहनों को उछाल दे रहा है।

- सड़क किनारे छोड़े गए एक दर्जन स्थानों पर मिट्टी, बहने कटने और धंसने की समस्या बन रही है। वाहनों के पहिये धंस रहे हैं।

- आजाद मार्ग टोल से चढ़ने के साथ किमी 68.6 गांव बदरका के निकट सड़क का तीन मीटर हिस्सा बीच से उठा मिला है।

- लखनऊ जाने वाली लेन पर किमी संख्या 50.4 पर तीन मीटर चौड़ाई व चार मीटर लंबाई में सड़क दबी है। जिससे वाहनों को बड़ा उछाल मिल रहा है।

- किमी संख्या 57.5 गांव बीकामऊ के पास सड़क तीन मीटर तब दब गई है। पुलिया पर किमी 55.6 किमी गांव रायपुर में एक फीट रोड दबी है।

यहां कराई गई पैचिंग

लखनऊ जाने वाली लेन पर किमी संख्या 63, 63.9 से 64.1 के बीच तीन स्थानों पर, बंथर गांव के पास किमी संख्या 61.6 पर 150 मीटर मार्ग पर पैचिंग की गई है। किमी 60.4 पर पूरी लेन पैचिंग है। वहीं किमी 60.5 से कमी संख्या 60 तक चार सौ मीटर नई पैंचिंग है। इसी लेन पर किमी 58.4 पर पूरी लेन पर पैच वर्क किया गया है।

यहां भी सड़क दबी

किमी 49 पर बेहटा नथई गांव के पास एक मीटर, 48.9 पर 100 मीटर, 46.8 पर 30 मीटर, 46.2 पर पुलिया में पैचिंग, 39.7 पर 50 मीटर पैच गांव उम्मेद खेड़ा, 62.3 गांव सुरजनखेड़ा लेन लखनऊ से उन्नाव पर सड़क दबी है।

लखनऊ की ओर पुलिया व डिवाडर फटा, पूरी रोड पर गहरी दरार

उन्नाव लखनऊ लेन में किमी 48 पर 100 मीटर की पुलिया में दोनों छोर पर 9-9 फीट दीवार फट गई है। यह समस्या इसी स्थान पर तिरछे आकार में फटी एक ओर की पूरी सड़क के कारण आई है। जहां सड़क फटने के बाद यहां गहरी दरार बन गई है। जिससे मार्ग के किनारे की उक्त पुलिया की दीवारें फटने के साथ डिवाइडर फट गया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पुलिया के दोनों किनारों पर यह समस्या आई है। जिसमें दोनों किनारों पर दरार के बाद 100 मीटर की पुलिया के बीच शेष 80 मीटर का मार्ग हिस्सा कभी भी भयानक रूप से दब सकता है।

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