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यूपी में चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 50,000 रुपये की सहायता योजना पर विचार: रिपोर्ट

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार महिलाओं के लिए 50,000 रुपये की नकद सहायता योजना शुरू करने पर विचार क…

The Wire - Hindi के अनुसार15 अगस्त 2026 को 09:55 am बजे
यूपी में चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 50,000 रुपये की सहायता योजना पर विचार: रिपोर्ट

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार महिलाओं के लिए 50,000 रुपये की नकद सहायता योजना शुरू करने पर विचार कर रही है.

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि प्रस्तावित योजना के तहत महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल 50,000 रुपये तीन चरणों में भेजे जा सकते हैं. इनमें से 20,000 रुपये की पहली किस्त विधानसभा चुनाव से पहले दिए जाने की संभावना है, जबकि बाकी 30,000 रुपये 10,000-10,000 रुपये की तीन किस्तों में दिए जा सकते हैं.

हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक इस योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. भाजपा की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

योजना से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भाजपा पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के अलावा कुछ नहीं बचा है और उत्तर प्रदेश की महिलाएं इस तरह के कथित ‘गलत पैसे’ को स्वीकार नहीं करेंगी.

समाचार : भाजपा का एक और जुमला यूपी की महिलाओं को देंगे 20000

विचार : भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के सिवा कुछ नहीं बचा है। वो भी भाजपा की पाप की कमाई है, जिसे उप्र की धार्मिक महिलाएँ कभी नहीं लेंगी। उप्र की जागरूक महिलाएं पूछ रही हैं जिन दूसरे राज्यों में महिलाओं को पैसे…

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 13, 2026

सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार पिछले 10 वर्षों से महिलाओं को इसी तरह की आर्थिक सहायता देती रही होती, तो अब तक प्रत्येक लाभार्थी के खाते में 5 लाख रुपये पहुंच चुके होते. उन्होंने कहा कि 20,000 रुपये इस राशि का केवल चार प्रतिशत है और आरोप लगाया कि महिलाओं के हिस्से का 96 प्रतिशत पैसा भाजपा ने हड़प लिया.

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर में चोरी और बच्चों पर हमलों के बाद भाजपा के पास न तो नैतिकता बची है और न ही साहस.

दूसरे राज्यों में भी महिलाओं के लिए नकद योजनाएं

उल्लेखनीय है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं इससे पहले कई राज्यों में चुनावी राजनीति का हिस्सा रही हैं. मध्य प्रदेश में भाजपा की ‘लाडली बहना योजना’ 2023 के विधानसभा चुनाव में चर्चा में रही थी.

महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘लाडकी बहिन योजना’ शुरू की गई थी. बिहार में 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ शुरू की. दिल्ली में भी भाजपा सरकार ने इस साल अगस्त से ‘लक्ष्मी योजना’ शुरू की है.

इससे पहले बीबीसी ने भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की 2024-25 की राज्य वित्त रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि केंद्रीय बैंक ने राज्यों को बढ़ते सब्सिडी बोझ को लेकर आगाह किया है.आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्यों को सब्सिडी पर होने वाले ख़र्च को नियंत्रित और तर्कसंगत बनाना चाहिए, ताकि इससे अधिक उत्पादक मदों पर होने वाला ख़र्च प्रभावित न हो.

अखिलेश यादव भी कर चुके हैं आर्थिक सहायता का वादा

गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने मार्च 2026 में नोएडा के दादरी से सपा के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए महिलाओं को हर साल 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था.

उन्होंने कहा था कि अगर सपा सत्ता में आती है तो उसकी सरकार यह सहायता उपलब्ध कराएगी.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब छह महीने बाद होने हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए चुनावी मैदान में होंगे.

मालूम हो कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में अक्सर खुद को ‘डबल इंजन सरकार’ के रूप में पेश करती है, जिसका मतलब राज्य और केंद्र, दोनों में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव उसके लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में महीनेभर चले विरोध प्रदर्शनों के बीच द गार्डियन में इतिहासकार मुकुल केसवन ने भी उत्तर प्रदेश चुनाव की अहमियत का ज़िक्र किया था.

उन्होंने लिखा था कि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि अगर जंतर-मंतर का गतिरोध नहीं सुलझा तो भाजपा को राजनीतिक समर्थन में बड़ा नुकसान हो सकता है.

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