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​ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: लखनऊ की पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल पुराने केस में दोषी को सुनाई कड़ी सजा

ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: लखनऊ की पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल पुराने केस में दोषी को सुनाई कड़ी सजा नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की जेल, 60 हजार का जुर्माना By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August 15, 2026…

ETV Bharat के अनुसार15 अगस्त 2026 को 08:51 am बजे
​ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: लखनऊ की पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल पुराने केस में दोषी को सुनाई कड़ी सजा

सौजन्य से:- ETV Bharat

ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: लखनऊ की पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल पुराने केस में दोषी को सुनाई कड़ी सजा

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की जेल, 60 हजार का जुर्माना

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 15, 2026 at 1:38 PM IST

लखनऊ: विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के 10 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी विजय कुमार राठौर को 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 60,000 का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है. 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत मलिहाबाद पुलिस और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी और सटीक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया.

साल 2014 का है मामला: अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना वर्ष 2014 की है. रहीमाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मोहज्जीपुर निवासी विजय कुमार राठौर पुत्र अशर्फी लाल के खिलाफ नाबालिग को बहला-फुसलाकर अगवा करने और दुष्कर्म करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366 , 376 के अलावा पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया था. विशेष न्यायालय (पॉक्सो-3), लखनऊ के न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विजय कुमार राठौर को दोषी करार दिया.

ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत हुई पुख्ता पैरवी: मलिहाबाद के प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर गंभीर अपराधों में त्वरित सजा दिलाने के लिए 'ऑपरेशन कन्विक्शन' चलाया जा रहा है. इस मामले में मलिहाबाद पुलिस और पैरोकार आरक्षी मनोज कुमार ने अभियोजन पक्ष के साथ मिलकर अदालत में समयबद्ध गवाही और अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने आरोपी को सख्त सजा सुनाई. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और अभियुक्त द्वारा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा में समायोजित किया जाएगा.

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