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क्या यूपी चुनाव में साइकिल पंचर कर 'हाथ' मजबूत करेगी कांग्रेस? 5 बड़े संकेत

Xप्लेन: क्या यूपी चुनाव में साइकिल पंचर कर 'हाथ' मजबूत करेगी कांग्रेस? 5 बड़े संकेत कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी है. यूपी में संगठन लगभग खत्म हो चुका है. कोई मजबूत OBC चेहरा नहीं है. कांग्रेस का अगला ब…

ABP News के अनुसार21 अगस्त 2026 को 02:55 pm बजे
क्या यूपी चुनाव में साइकिल पंचर कर 'हाथ' मजबूत करेगी कांग्रेस? 5 बड़े संकेत

सौजन्य से:- ABP News

Xप्लेन: क्या यूपी चुनाव में साइकिल पंचर कर 'हाथ' मजबूत करेगी कांग्रेस? 5 बड़े संकेत

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी है. यूपी में संगठन लगभग खत्म हो चुका है. कोई मजबूत OBC चेहरा नहीं है. कांग्रेस का अगला बड़ा कदम OBC चेहरे को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाना हो सकता है.

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी से ही गरमा गया है. सबसे बड़ी बात ये है कि कांग्रेस ने इस बार अपनी पुरानी रणनीति से हटकर कुछ नया करने का फैसला किया है. पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित से हटकर अब अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वोट बैंक को साधने की पूरी तैयारी कर ली है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस अब अखिलेश यादव की साइकिल का पंचर करने की रणनीति बना रही है. लेकिन सवाल ये है कि क्या कांग्रेस ये मुश्किल काम कर पाएगी...

एक्सपर्ट्स के बताए 5 संकेतों से समझें कि साइकिल को पंचर करने की जुगत मिला रही कांग्रेस...

पहला संकेत: CWC बैठक में राम मंदिर का मुद्दा

19 अगस्त 2026 को दिल्ली में हुई CWC की बैठक में कांग्रेस ने बड़ा रणनीतिक फैसला लिया. पार्टी ने तय किया कि राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे को घर-घर ले जाया जाएगा. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राम मंदिर से 'चंदे की चोरी' अब 'घर-घर चोरी' का मुद्दा बन गया है. CWC ने राम मंदिर चंदे के मुद्दे को लेकर देशभर में प्रदर्शन का फैसला किया है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले को लेकर वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया.

यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस अब हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी को उसी के हथियार से जवाब देने की कोशिश कर रही है. राम मंदिर आंदोलन को लेकर बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है, लेकिन कांग्रेस अब चंदा चोरी के जरिए बीजेपी की साख को चुनौती दे रही है.

दूसरा संकेत: लखनऊ में OBC बैठक की चाल

21 अगस्त 2026 को कांग्रेस ने लखनऊ स्थित अपने प्रदेश मुख्यालय में OBC नेताओं की बड़ी बैठक बुलाई. इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के OBC विंग के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया.

इससे पहले 18 जुलाई 2026 को भी कांग्रेस OBC प्रकोष्ठ की जिला स्तरीय बैठक लखनऊ में हुई थी. यानी कांग्रेस OBC वोटरों को साधने के लिए लगातार मंथन कर रही है.

तीसरा संकेत: राहुल गांधी की OBC नेताओं से मीटिंग

18 अगस्त 2026 को नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में OBC कांग्रेस के सात राज्यों के करीब 300 जिला अध्यक्षों के साथ बड़ी बैठक की. इस मीटिंग में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा के OBC कांग्रेस जिला अध्यक्ष शामिल हुए. OBC कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद भी बैठक में मौजूद रहे.

राहुल गांधी ने OBC नेताओं से कहा, 'शेर सब्र करता है, जल्दबाजी नहीं' और जातिगत जनगणना के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की अपील की. राहुल ने साफ कहा, 'सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना होगा. OBC के अधिकारों के मुद्दे को मजबूती से उठाना होगा.'

चौथा संकेत: सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत

कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए यूपी में सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस की एक सीरीज शुरू करने का फैसला किया है. 22 अगस्त को कानपुर में और 23 अगस्त को झांसी में कार्यक्रम होंगे. यह अभियान दलित और पिछड़ा वर्ग समुदायों पर फोकस करेगा. कांग्रेस का मकसद उन मतदाताओं तक पहुंचना है जो सालों से पार्टी से दूर हो गए हैं.

इस अभियान को 'बहुजन विचार' अभियान का नाम दिया गया है. OBC विंग के अध्यक्ष मनोज यादव ने घोषणा की कि कांग्रेस अगले एक महीने में पूरे उत्तर प्रदेश में सेमिनार और पदयात्रा आयोजित करेगी.

पांचवां संकेत: जाति जनगणना का मुद्दा

कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है. पार्टी ने 22 अगस्त से जाति जनगणना में OBC कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर अभियान शुरू करने का ऐलान किया है. राहुल गांधी OBC विभाग को संबोधित करते हुए जाति जनगणना और OBC कैटेगरी के लिए समर्पित प्रावधानों की मांग कर रहे हैं. पार्टी का नारा है- 'जितनी आबादी, उतना हक.'

OBC कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद ने कहा कि पार्टी शाहू महाराज की विरासत को आगे बढ़ा रही है, जो आरक्षण नीतियों के अग्रदूत थे.

कांग्रेस का पुराना वोट बैंक क्या था?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक तीन खंभों पर टिका था- मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित. यह समीकरण कई दशकों तक काम करता रहा, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह समीकरण बिखर गया. मुस्लिम वोट समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर चला गया. ब्राह्मण वोट बीजेपी के पाले में आ गया. दलित वोट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ रहा. हालांकि हाल के चुनावों में दलित वोटों में बिखराव देखने को मिला है.

इस ट्रायंगल के टूटने के बाद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में लगभग नाममात्र की होकर रह गई. अब पार्टी ने एक नया समीकरण बनाने की कोशिश शुरू की है- OBC, दलित और अल्पसंख्यक के साथ.

यूपी में OBC वोट बैंक क्यों है इतना अहम?

उत्तर प्रदेश की आबादी में OBC वर्ग की हिस्सेदारी करीब 45 से 50 प्रतिशत मानी जाती है. इसमें गैर-यादव OBC (जो करीब 35-40% हैं) सबसे बड़ा समूह है. दलित आबादी करीब 21% और मुस्लिम आबादी करीब 19% है.

2014 के बाद बीजेपी का उदय गैर-यादव OBC वोटरों की बदौलत हुआ. यानी OBC वोट ही सत्ता की चाबी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के OBC सपोर्ट बेस में सिर्फ 7-8% की कटौती भी उसके लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

कांग्रेस के पैंतरे का असर किस पर पड़ेगा?

अगर कांग्रेस OBC वोटरों को साधने में कामयाब रही, तो इसका सीधा नुकसान सपा और बीजेपी दोनों को हो सकता है.

- सपा के लिए खतरा: सपा का पारंपरिक वोट बैंक यादव (OBC) और मुस्लिम है. अगर कांग्रेस गैर-यादव OBC वोटरों को अपनी ओर खींचती है, तो सपा को बड़ा झटका लग सकता है. सपा और कांग्रेस दोनों 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति करते हुए OBC और दलित वोटरों को साधने के प्रयासों में जुटी हैं.

- बीजेपी के लिए खतरा: अगर कांग्रेस इन वोटरों में सेंध लगाने में कामयाब रही, तो यह बीजेपी के लिए बड़ा संकट होगा. बीजेपी ने भी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और OBC वोटरों को बचाए रखने की कोशिश कर रही है.

हालांकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठन लगभग खत्म हो चुका है. पार्टी के पास कोई मजबूत OBC चेहरा नहीं है. पार्टी का अगला बड़ा कदम किसी प्रभावशाली OBC चेहरे को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाना हो सकता है.

क्या पुरानी साइकिल में नया पंचर काम करेगा?

कांग्रेस की कोशिश है कि वह OBC वोटरों को अपनी ओर खींचकर उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाए. पार्टी ने जाति जनगणना, सामाजिक न्याय सम्मेलन, ऐतिहासिक नेताओं की विरासत और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे कई मुद्दों को एक साथ उठाया है.

यूपी चुनाव 2027 में OBC वोट सबसे अहम भूमिका निभाएगा. कांग्रेस को सभी उपजातियों को एक साथ लाना होगा, जो आसान नहीं है. साथ ही, पार्टी को एक मजबूत OBC चेहरा भी देना होगा जो इन वोटरों को भरोसा दिला सके.

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