यूपी में कुपोषण पर करारी चोट, 46 से घटकर 31.5 फीसदी पर पहुंची बच्चों में नाटेपन की दर; THR मॉडल बना मिसाल - ups thr scheme child stunting rate drops to 315
यूपी में कुपोषण पर करारी चोट, 46 से घटकर 31.5 फीसदी पर पहुंची बच्चों में नाटेपन की दर; THR मॉडल बना मिसाल उत्तर प्रदेश में 'टेक होम राशन' (THR) योजना कुपोषण के खिलाफ एक प्रभावी हथियार साबित हुई है, जिससे बच्चों में नाटेप…

सौजन्य से:- Jagran
यूपी में कुपोषण पर करारी चोट, 46 से घटकर 31.5 फीसदी पर पहुंची बच्चों में नाटेपन की दर; THR मॉडल बना मिसाल
उत्तर प्रदेश में 'टेक होम राशन' (THR) योजना कुपोषण के खिलाफ एक प्रभावी हथियार साबित हुई है, जिससे बच्चों में नाटेपन की दर 46.3% से घटकर 31.5% हो गई है ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जारी अभियान अब सिर्फ राशन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक और सटीक पोषण का सशक्त माध्यम बन चुका है। 'टेक होम राशन' (THR) योजना के तहत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 7 विशेष उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण शामिल हैं। ऊर्जा, प्रोटीन और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर ये उत्पाद लाभार्थियों को उनकी उम्र और आवश्यकता के अनुरूप उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बच्चों में नाटेपन की दर में रिकॉर्ड गिरावट
उत्तर प्रदेश सरकार के इस व्यवस्थित मॉडल का सकारात्मक असर अब स्वास्थ्य मानकों पर साफ दिखने लगा है। बच्चों में नाटेपन की दर, जो वर्ष 2015-16 में 46.3 प्रतिशत थी, घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन (Wasting) जैसी गंभीर समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि सही समय पर सही पोषण पहुंचाने की रणनीति जमीन पर असर दिखा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्र: सेहत की निगरानी और परामर्श भी
टीएचआर योजना को पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए इसे आंगनबाड़ी सेवाओं से पूरी तरह जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां न केवल पोषण सामग्री वितरित कर रही हैं, बल्कि बच्चों के नियमित वजन और विकास की निगरानी भी कर रही हैं। इसके साथ ही माताओं को संतुलित आहार का महत्व समझाकर जागरूक किया जा रहा है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को समझकर उन्हें लगातार स्वास्थ्य संबंधी सहयोग देना है।
4,000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका महिला सशक्तिकरण से जुड़ाव है। टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी 'उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपी गई है। वर्तमान में 4,000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों का संचालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई है।
गुणवत्ता और स्वच्छता पर सख्त पहरा
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर कड़े निर्देश लागू किए गए हैं। बच्चों को भोजन परोसने से पहले प्रतिदिन दो वयस्कों द्वारा स्वाद और गुणवत्ता की जांच अनिवार्य की गई है। पिछले 9 वर्षों में तकनीक-आधारित निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और महिला समूहों की सहभागिता ने पोषण अभियान को एक पारदर्शी और जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।
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