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कानपुर में कितने में बनता है वो बेल्ट, जिसकी बाहर कीमत 3000 रुपये है!

जब भी कानपुर की बात होती है तो यहां के लेदर मार्केट की काफी चर्चा होती है. कई यूट्यूब वीडियो में दावा किया जाता है कि वहां काफी सस्ता…

Aaj Tak News के अनुसार3 सितंबर 2026 को 10:31 am बजे
कानपुर में कितने में बनता है वो बेल्ट, जिसकी बाहर कीमत 3000 रुपये है!

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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जब भी कानपुर की बात होती है तो यहां के लेदर मार्केट की काफी चर्चा होती है. कई यूट्यूब वीडियो में दावा किया जाता है कि वहां काफी सस्ता लेदर का सामान मिलता है और वहां कई महंगे ब्रांड के सामान भी बनते हैं. कई लोग दावा करते हैं कि यहां जो 200 रुपये में सामान बनता है, वो मार्केट में 3000 रुपये तक बिकता है. लेकिन, आज लेदर फैक्ट्री के मालिक से जानते हैं कि आखिर इन दावों में कितनी सच्चाई है और लेदर मार्केट में कितना सस्ता सामान मिलता है.

हाल ही में कानपुर की एक लेदर फैक्ट्री में द लल्लनटॉप की टीम पहुंची और उन्होंने फैक्ट्री मालिकों से पता किया कि आखिर लेदर कैसे बनता है और यहां बनने वाले प्रोडक्ट कितने सस्ते होते हैं. फैक्ट्री मालिक और वहां काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि कानपुर में बड़ी संख्या लेदर का काम होता है और यहां बेल्ट से लेकर बैग, जूते सब बनाए जाते हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि पहले लेदर आता है, फिर उसके कई प्रोसेस से गुजारा जाता है, जिसमें कलरिंगआदि शामिल है. इसके साथ ही बार-बार लेदर को प्रेस किया जाता है और सॉफ्ट बनाया जाता है.

यहां बफेलो से लेकर बोवाइन लेदर आता है, जिसके सामान बनाए जाते हैं. इसके बाद हर लेदर के हिसाब से अलग-अलग आइटम बनते हैं. अच्छे से प्रोडक्ट बनने के बाद उनका क्वालिटी चेक भी किया जाता है और कुछ भी डिफेक्ट होता है तो उसे बाहर कर दिया जाता है. खास बात ये है कि इन डिफेक्ट प्रोडक्ट की रेट काफी कम हो जाती है और इसका सिर्फ 10 फीसदी ही पैसा मिलता है यानी 90 फीसदी कम रेट ये सामान बाजार में जाता है. अगर बेल्ट पर हल्का दाग भी रह जाता है तो ये डिफेक्ट प्रोडक्ट में सस्ता मिलता है.

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300 का बेल्ट कितने में बिकता है?

इस दौरान फैक्ट्री मालिक ने बताया कि यहां जिस बेल्ट को बनाने की कोस्ट 300-400 रुपये पड़ती है, वो भारत में मार्केट में जाने के बाद 2000-3000 रुपये तक बिकता है. वहीं, उन्होंने बताया कि यहां ही महंगे-महंगे ब्रांड के आइटम भी बनते हैं और खास बात ये है कि उनमें और दूसरे प्रोडक्ट में ज्यादा फर्क नहीं होता है. बस ब्रांड की  वैल्यू और उसके टैग की वजह से उनकी रेट काफी ज्यादा होती है.

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