लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से लोगों का डगमगाया भरोसा, 30% गाड़ियां फिर पुराने हाईवे पर लौटीं
- NCR - उत्तर प्रदेश- लखनऊ - वाराणसी - बरेली - मुरादाबाद - मेरठ - आगरा - अलीगढ़ - प्रयागराज - गोरखपुर - कानपुर - बाराबंकी - आजमगढ़ - बलिया - भदोही - चंदौली - गाजीपुर - जौनपुर - मऊ - मिर्जापुर - सोनभद्र - बस्ती - कुशीनगर…

सौजन्य से:- Hindustan
- NCR
- उत्तर प्रदेश- लखनऊ
- वाराणसी
- बरेली
- मुरादाबाद
- मेरठ
- आगरा
- अलीगढ़
- प्रयागराज
- गोरखपुर
- कानपुर
- बाराबंकी
- आजमगढ़
- बलिया
- भदोही
- चंदौली
- गाजीपुर
- जौनपुर
- मऊ
- मिर्जापुर
- सोनभद्र
- बस्ती
- कुशीनगर
- देवरिया
- महाराजगंज
- संतकबीरनगर
- सिद्धार्थनगर
- बागपत
- शामली
- बिजनौर
- बुलंदशहर
- हापुड़
- मुजफ्फर नगर
- सहारनपुर
- बदायूं
- लखीमपुरखीरी
- पीलीभीत
- शाहजहांपुर
- एटा
- फिरोजाबाद
- मैनपुरी
- मथुरा
- अंबेडकर नगर
- अमेठी
- गौरीगंज
- श्रावस्ती
- बलरामपुर
- बहराइच
- फैजाबाद
- गोंडा
- रायबरेली
- फतेहपुर
- सीतापुर
- सुल्तानपुर
- औरैया
- अकबरपुर
- बिल्ल्होर
- ललितपुर
- महोबा
- कानपुर देहात
- चित्रकूट
- बांदा
- इटावा
- फर्रुखाबाद
- कन्नौज
- हमीरपुर
- हरदोई
- झांसी
- उरई
- उन्नाव
- हाथरस
- अमरोहा
- रामपुर
- संभल
- गंगापार
- कौशाम्बी
- प्रतापगढ़ - कुंडा
- बिहार
- उत्तराखंड
- झारखंड
- अन्य राज्य
By Pawan Kumar Sharmaप्रमुख संवाददाता, कानपुर
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन होने के कुछ दिन बाद से ही सवालों के घेरे में है। बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत, डायवर्जन और अधिक टोल शुल्क के कारण इस एक्सप्रेसवे पर चलने वाले लोगों का भरोसा उठ रहा है। 30 प्रतिशत गाड़ियां फिर से पुराने हाईवे पर लौट गई हैं।
Lucknow-Kanpur Expressway: तेज रफ्तार और कम समय में सफर का वादा करने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद से ही सवालों के घेरे में है। यह एक्सप्रेसवे कानपुर-लखनऊ यात्रियों की पहली पसंद तो बना, लेकिन बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत, डायवर्जन और अधिक टोल शुल्क के कारण अब बड़ी संख्या में लोग दोबारा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग का रुख करने लगे हैं। शुरुआत में एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने वाले करीब 30 फीसदी वाहन फिर पुराने हाईवे पर लौट आए हैं। हालांकि एनएचएआई से जुड़े लोग दुश्वारियों को कारण नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या एक्सप्रेसवे पर चलकर उसका जायजा लेने वालों की थी। छह महीने बाद औसत ट्रैफिक का आकलन होगा।
14 जुलाई को एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद से अब तक पांच बार सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर बार मरम्मत के लिए बैरिकेडिंग और डायवर्जन लगाना पड़ा। इससे तेज और सुगम यात्रा का दावा प्रभावित हुआ है।जाजमऊ के लेदर कारोबारी फरहान का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल करीब 290 रुपये है, जबकि पुराने हाईवे से सफर करने पर लगभग 100 रुपये टोल देना पड़ता है। लखनपुर के अमित त्रिवेदी ने बताया कि नीचे पुराने हाईवे से ही आवागमन बेहतर है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सतह फिर खराब हुई; जांच के आदेश, 3 इंजीनियरों पर ऐक्शन
63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान एनएचएआई ने दावा किया था कि यहां पर हो रहे काम का सीधे मंत्रालय स्तर पर निगरानी की जा रही है। देश में पहली बार ऐसी स्वचलित इंटेलीजेंट मशीनों (एआईएमसी) का इस्तेमाल काम की रफ्तार, साइट पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की जानकारी मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए की गई थी। दावा था कि चार हजार करोड़ से अधिक लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर अगले 10 साल तक गड्ढे होंगे और न ही सड़क धंसेगी।
कांवड़ियों के लिए खुशखबरी, इस एक्सप्रेसवे पर नहीं लगेगा टोल
सिक्सलेन रोड, कम ट्रैफिक होने के कारण और एनएचएआई के सालाना फास्टैग पास धारक वाहन चालक अब भी एक्सप्रेसवे को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि बार-बार की तकनीकी दिक्कतों ने यात्रियों का भरोसा जरूर प्रभावित किया है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह दुरुस्त होने और लगातार निर्बाध संचालन के बाद ही लोग दोबारा बड़ी संख्या में इसकी ओर लौटेंगे। एनएचएआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पहले रोजाना औसतन 22 से 24 हजार वाहन गुजरते थे, अब यह संख्या 18 से 20 हजार बची है।
दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स हुआ महंगा; जानें कितना बढ़ा
एनएचएआई के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने बार-बार सड़क धंसने को लेकर सोशल मीडिया पर की गई शिकायतों के बाद कहा है कि फिलहाल जो भी दिक्कतें थीं, उनकी मरम्मत का काम पूरा करा लिया गया है और एक्सप्रेस-वे पर यातायात सामान्य है।
Loading videos...
और देखें
Loading videos...
और देखें
पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News, UP News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News, और lucknow Weather अपडेट हिंदी में पढ़ें। साथ ही UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Election 2027 Candidates से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।
लेटेस्ट Hindi News, UP News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News, और lucknow Weather अपडेट हिंदी में पढ़ें। साथ ही UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Election 2027 Candidates से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।
अगला लेख
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

UP के मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं मिलेगी, योगी सरकार ने ऐक्ट में संशोधन को मंजूरी दी

लखनऊ विश्वविद्यालय में तीसरा कैंपस खोलने की कवायद तेज, प्रमुख सचिव को लेटर लिख किया कैबिनेट से मंजूरी का आग्रह - lucknow university third campus land cabinet approval key

प्रयागराज में राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम 8 अगस्त को, 1.5 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण का दावा


