लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से लोगों का डगमगाया भरोसा, 30% गाड़ियां फिर पुराने हाईवे पर लौटीं
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से लोगों का डगमगाया भरोसा, 30% गाड़ियां फिर पुराने हाईवे पर लौटीं कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन होने के कुछ दिन बाद से ही सवालों के घेरे में है। बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत, डायवर्जन और अध…

सौजन्य से:- livehindustan.com
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से लोगों का डगमगाया भरोसा, 30% गाड़ियां फिर पुराने हाईवे पर लौटीं
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन होने के कुछ दिन बाद से ही सवालों के घेरे में है। बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत, डायवर्जन और अधिक टोल शुल्क के कारण इस एक्सप्रेसवे पर चलने वाले लोगों का भरोसा उठ रहा है। 30 प्रतिशत गाड़ियां फिर से पुराने हाईवे पर लौट गई हैं।
Lucknow-Kanpur Expressway: तेज रफ्तार और कम समय में सफर का वादा करने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद से ही सवालों के घेरे में है। यह एक्सप्रेसवे कानपुर-लखनऊ यात्रियों की पहली पसंद तो बना, लेकिन बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत, डायवर्जन और अधिक टोल शुल्क के कारण अब बड़ी संख्या में लोग दोबारा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग का रुख करने लगे हैं। शुरुआत में एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने वाले करीब 30 फीसदी वाहन फिर पुराने हाईवे पर लौट आए हैं। हालांकि एनएचएआई से जुड़े लोग दुश्वारियों को कारण नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या एक्सप्रेसवे पर चलकर उसका जायजा लेने वालों की थी। छह महीने बाद औसत ट्रैफिक का आकलन होगा।
14 जुलाई को एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद से अब तक पांच बार सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर बार मरम्मत के लिए बैरिकेडिंग और डायवर्जन लगाना पड़ा। इससे तेज और सुगम यात्रा का दावा प्रभावित हुआ है।जाजमऊ के लेदर कारोबारी फरहान का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल करीब 290 रुपये है, जबकि पुराने हाईवे से सफर करने पर लगभग 100 रुपये टोल देना पड़ता है। लखनपुर के अमित त्रिवेदी ने बताया कि नीचे पुराने हाईवे से ही आवागमन बेहतर है।
एआई मशीनें जांचती थीं निर्माण गुणवत्ता
63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान एनएचएआई ने दावा किया था कि यहां पर हो रहे काम का सीधे मंत्रालय स्तर पर निगरानी की जा रही है। देश में पहली बार ऐसी स्वचलित इंटेलीजेंट मशीनों (एआईएमसी) का इस्तेमाल काम की रफ्तार, साइट पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की जानकारी मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए की गई थी। दावा था कि चार हजार करोड़ से अधिक लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर अगले 10 साल तक गड्ढे होंगे और न ही सड़क धंसेगी।
फिटनेस के बाद बढ़ सकता ट्रैफिक
सिक्सलेन रोड, कम ट्रैफिक होने के कारण और एनएचएआई के सालाना फास्टैग पास धारक वाहन चालक अब भी एक्सप्रेसवे को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि बार-बार की तकनीकी दिक्कतों ने यात्रियों का भरोसा जरूर प्रभावित किया है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह दुरुस्त होने और लगातार निर्बाध संचालन के बाद ही लोग दोबारा बड़ी संख्या में इसकी ओर लौटेंगे। एनएचएआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पहले रोजाना औसतन 22 से 24 हजार वाहन गुजरते थे, अब यह संख्या 18 से 20 हजार बची है।
अब यातायात सामान्य
एनएचएआई के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने बार-बार सड़क धंसने को लेकर सोशल मीडिया पर की गई शिकायतों के बाद कहा है कि फिलहाल जो भी दिक्कतें थीं, उनकी मरम्मत का काम पूरा करा लिया गया है और एक्सप्रेस-वे पर यातायात सामान्य है।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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