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गोरखपुर में 20 साल में 2600 ध्वस्तीकरण आदेश, कार्रवाई की रफ्तार पर उठ रहे सवाल - gorakhpur illegal construction gdas 2600 demolition orders questioned

गोरखपुर में 20 साल में 2600 ध्वस्तीकरण आदेश, कार्रवाई की रफ्तार पर उठ रहे सवाल गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 20 साल में 7300 नोटिस जारी कर 2600 ध्वस्तीकरण आदेश दिए, लेकिन इनकी कार्रवाई की रफ्तार ...और पढ़ें HighLights - जीड…

Jagran के अनुसार23 सितंबर 2026 को 11:04 am बजे
गोरखपुर में 20 साल में 2600 ध्वस्तीकरण आदेश, कार्रवाई की रफ्तार पर उठ रहे सवाल
 - gorakhpur illegal construction gdas 2600 demolition orders questioned

सौजन्य से:- Jagran

गोरखपुर में 20 साल में 2600 ध्वस्तीकरण आदेश, कार्रवाई की रफ्तार पर उठ रहे सवाल

गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 20 साल में 7300 नोटिस जारी कर 2600 ध्वस्तीकरण आदेश दिए, लेकिन इनकी कार्रवाई की रफ्तार ...और पढ़ें

HighLights

- जीडीए ने 20 साल में 7300 नोटिस और 2600 ध्वस्तीकरण आदेश दिए।

- 540 सीलिंग आदेश पारित हुए, 112 मामले अदालतों में विचाराधीन हैं।

- मेरठ की कार्रवाई के बाद गोरखपुर में भी समीक्षा की मांग उठी।

अरुण चन्द, गोरखपुर। मेरठ जैसा हाल गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) क्षेत्र का भले नहीं है, लेकिन अवैध निर्माण की फेहरिस्त यहां भी बड़ी है। सरकारी कागजों में भले यह संख्या थोड़ी कम लगे लेकिन भौतिक रूप से अधिक है। कहीं आवासीय मानचित्र स्वीकृत कराकर संबंधित इमारत का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है तो कहीं मानचित्र की अनदेखी है। मेरठ के सेंट्रल मार्केट के क्रम में अब अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम काेर्ट ने जिस तरह की सख्ती दिखाई है, यहां भी कई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

जीडीए की ओर से वर्ष 2006 से 2026 के बीच अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों में 7300 नोटिस जारी किए गए हैं। इस दौरान 540 सीलिंग और 2600 ध्वस्तीकरण आदेश भी पारित हुए। अवैध निर्माण से जुड़े 112 प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। आंकड़े यह बताते हैं कि कार्रवाई के लिए नोटिस और आदेश जारी करने की प्रक्रिया लगातार चलती रही, लेकिन सवाल यह भी है कि इन आदेशों का आगे क्या हुआ।

ध्वस्तीकरण और सीलिंग के आदेश अपने आप में अंतिम कार्रवाई नहीं होते। इनके बाद न्यायालय में चुनौती, स्थगन आदेश, अपील, मानचित्र स्वीकृति अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं सामने आ सकती हैं। इसलिए 2600 ध्वस्तीकरण आदेशों को सीधे कार्रवाई के लिए तैयार निर्माण मानना सही नहीं होगा। फिर भी दो दशक तक पुराने मामलों का बने रहना इस बात की जरूरत जरूर सामने लाता है कि प्रत्येक आदेश की वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज और नियमित रूप से समीक्षा की जाए।

नोटिस से आदेश तक पहुंची कार्रवाई, आगे की तस्वीर साफ नहीं

जीडीए के आंकड़ों के अनुसार 20 वर्षों में 7300 नोटिस जारी किए गए। इनमें से 540 मामलों में सीलिंग और 2600 में ध्वस्तीकरण के आदेश पारित हुए। यानी नोटिस जारी होने के बाद सभी मामलों में ध्वस्तीकरण या सीलिंग का आदेश नहीं हुआ। इसके पीछे संबंधित भवन स्वामी की आपत्ति, दस्तावेज, सुनवाई और मामले की प्रकृति जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन सवाल आदेश पारित होने के बाद की निगरानी व्यवस्था का है।

कानून के जानकारों का मानना है कि किसी मामले में यदि न्यायालय से रोक है तो उसकी जानकारी अद्यतन रहनी चाहिए। रोक हटने के बाद कार्रवाई के लिए मामला स्वत: सामने आए, इसकी भी व्यवस्था होनी चाहिए। इसी तरह जिन मामलों में भवन स्वामी को वैधानिक प्रक्रिया के तहत राहत मिली हो, उनका रिकार्ड भी अलग होना चाहिए। इससे पुराने आदेशों की वास्तविक संख्या और कार्रवाई योग्य मामलों की संख्या में अंतर साफ हो सकेगा।

मेरठ की कार्रवाई से गोरखपुर के लिए भी सीख

मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सितंबर 2026 में अवैध संपत्तियों के विरुद्ध ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। इससे पहले वहां बड़े पैमाने पर भवनों का सर्वे भी शुरू किया गया था।

गोरखपुर की स्थिति मेरठ से अलग है और वहां के आदेशों को यहां के सभी मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन मेरठ की कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर सामने रखा है- अवैध निर्माण पर कार्रवाई केवल आदेश जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी हो।

निरंतर कार्रवाई कर रहा प्राधिकरण: अभिनव गोपाल

जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल का कहना है कि उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 के प्रविधानों के अंतर्गत गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा शहर में नियमानुसार सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने और अवैध निर्माणों व अतिक्रमणों पर रोक लगाने के लिए निरंतर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अधिनियम की धारा 26, धारा 27 (ध्वस्तीकरण) और धारा 28 (सीलिंग) के तहत बिना मानचित्र स्वीकृत कराए किए गए निर्माणों पर प्राधिकरण द्वारा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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उन्होंने आम जनमानस से अपील की है कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व प्राधिकरण से मानचित्र अवश्य स्वीकृत कराएं। बिना स्वीकृति के किया गया कोई भी निर्माण अवैध श्रेणी में आएगा, जिस पर सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

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