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उत्तर प्रदेश Switch to English उत्तर प्रदेश ने PMMVY रजिस्ट्रेशन का 102.13% लक्ष्य पूरा किया चर्चा में क्यों? वित्तीय वर्ष 2026–27 में 31 जुलाई, 2026 तक उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत पं…

drishtiias.com के अनुसार8 अगस्त 2026 को 12:18 pm बजे
उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

सौजन्य से:- drishtiias.com

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उत्तर प्रदेश ने PMMVY रजिस्ट्रेशन का 102.13% लक्ष्य पूरा किया

चर्चा में क्यों?

वित्तीय वर्ष 2026–27 में 31 जुलाई, 2026 तक उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत पंजीकरण लक्ष्य का 102.13% प्राप्त कर निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है।

मुख्य बिंदु:

- रिकॉर्ड उपलब्धि: उत्तर प्रदेश ने 31 जुलाई, 2026 तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत पंजीकरण लक्ष्य का 102.13% प्राप्त कर देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया।

- 3,97,567 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लक्ष्य के विरुद्ध राज्य में 4,06,058 लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया।

- कार्यान्वयन: यह उपलब्धि महिला एवं बाल विकास विभाग, आँगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं तथा आशा (ASHA) कार्यकर्त्ताओं के समन्वित प्रयासों से प्राप्त हुई।

- राज्य ने मिशन मोड अभियान चलाते हुए नियमित समीक्षा बैठकों, ऑनलाइन निगरानी तथा विशेष पंजीकरण अभियानों के माध्यम से गाँवों और शहरी वार्डों में पात्र महिलाओं की पहचान कर उनका पंजीकरण सुनिश्चित किया।

- वित्तीय सहायता: वित्तीय वर्ष 2026–27 में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 2,61,369 किस्तों के ज़रिये 86.55 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।

- पात्र लाभार्थियों को प्रथम संतान के लिये दो किस्तों में 5,000 रुपये तथा द्वितीय संतान के बालिका होने पर 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

- डिजिटल कार्यान्वयन: आवेदन, सत्यापन, अनुमोदन तथा भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाती है।

- फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS): लाभार्थी के चेहरे का आधार से मिलान कर FRS के माध्यम से लाभ वितरण में पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता सुनिश्चित की जाती है।

- डिजिटल निगरानी: प्रत्येक आवेदन की डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणाली के माध्यम से नियमित निगरानी की जाती है, ताकि पात्र महिलाओं को समय पर लाभ का हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।

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केंद्र ने SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून को लागू करने के लिये उत्तर प्रदेश को फंड जारी किया

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि उसने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन हेतु केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत वर्ष 2019–20 से उत्तर प्रदेश को 747.17 करोड़ रुपये जारी किये हैं। इस सहायता का उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के संरक्षण तथा कल्याण को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु:

- केंद्रीय सहायता: केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2019–20 से उत्तर प्रदेश को 747.17 करोड़ रुपये जारी किये हैं।

- लाभार्थी: केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत 1.43 लाख से अधिक अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान की गई है।

- उद्देश्य: इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य अत्याचारों की रोकथाम, त्वरित न्याय सुनिश्चित करना तथा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास उपलब्ध कराना है।

- निधियों का उपयोग: इस राशि का उपयोग राहत एवं मुआवज़ा, पीड़ितों के पुनर्वास, विशिष्ट विशेष न्यायालयों की स्थापना, अभियोजन तंत्र को सुदृढ़ करने, जन-जागरूकता कार्यक्रमों तथा क्षमता निर्माण के लिये किया जाता है।

- विधिक ढाँचा: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों से कानूनी संरक्षण प्रदान करता है तथा दोषियों के लिये कड़े दंड का प्रावधान करता है।

- संस्थागत व्यवस्था: अधिनियम के अंतर्गत प्रभावी क्रियान्वयन के लिये विशेष न्यायालयों की स्थापना, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति तथा राज्य एवं ज़िला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समितियों के गठन का प्रावधान किया गया है।

- सरकार की प्रतिबद्धता: यह योजना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सामाजिक न्याय, समानता तथा उनके संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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अरुणाचल प्रदेश ने ई-भविष्य पेंशन प्रणाली शुरू की

चर्चा में क्यों?

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को समयबद्ध सेवानिवृत्ति लाभ सुनिश्चित करने तथा पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिये ई-भविष्य पेंशन स्वीकृति एवं ट्रैकिंग प्रणाली नामक पूर्णतः पेपरलेस डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है।

मुख्य बिंदु:

- लॉन्च: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने ई-भविष्य पेंशन स्वीकृति एवं ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की।

- यह पहल मुख्यमंत्री पेमा खांडू के डिजिटल सुशासन के दृष्टिकोण के अनुरूप शुरू की गई है।

- प्रशिक्षण कार्यक्रम: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा 25 पायलट विभागों के अधिकारियों के लिये तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

- इस प्लेटफॉर्म का विकास लेखा परीक्षा एवं पेंशन विभाग के लिये किया गया है।

- विशेषताएँ: यह प्रणाली पेंशन प्रक्रिया का पूर्ण डिजिटलीकरण करती है, कागज़ी कार्यवाही को कम करती है, विलंब एवं त्रुटियों को न्यूनतम बनाती है तथा पेंशन मामलों की वास्तविक समय निगरानी की सुविधा प्रदान करती है।

- उद्देश्य: इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पेंशन स्वीकृति एवं प्रसंस्करण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं दक्ष बनाना तथा सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभों का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना है।

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दक्षिण भारत की पहली चिप इकाई आंध्र में स्थापित हुई

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के तारलुवाडा में दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर पैकेजिंग सुविधा का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के अंतर्गत ASIP टेक्नोलॉजीज़ द्वारा प्रवर्तित यह परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु:

- दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई: यह इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के अंतर्गत स्वीकृत दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई है।

- परियोजना का स्थान: यह इकाई आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम ज़िले के तारलुवाडा में 30 एकड़ भूमि पर स्थापित की जा रही है।

- निवेश: इस परियोजना में कुल लगभग 2,387 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिसमें प्रथम चरण में 460 करोड़ रुपये से अधिक का प्रारंभिक निवेश तथा आगामी चरणों में 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश प्रस्तावित है।

- विनिर्माण का प्रमुख क्षेत्र: यह इकाई उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तथा सिस्टम-इन-पैकेज (SiP) समाधान का निर्माण करेगी। SiP तकनीक के अंतर्गत अनेक सेमीकंडक्टर घटकों को एक ही कॉम्पैक्ट पैकेज में एकीकृत किया जाता है, जिससे उच्च-प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विकसित किये जा सकते हैं।

- प्रौद्योगिकी साझेदारी: इस परियोजना का क्रियान्वयन ASIP टेक्नोलॉजीज़ द्वारा दक्षिण कोरिया की APACT कंपनी लिमिटेड के सहयोग से किया जा रहा है, जिससे भारत को उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग प्रौद्योगिकी प्राप्त होगी।

- उत्पादन क्षमता: इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 96 मिलियन सेमीकंडक्टर पैकेज होगी, जिनका उपयोग मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार तथा औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाएगा।

- सामरिक महत्त्व: यह परियोजना भारत की बैकएंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करेगी, आयात पर निर्भरता कम करेगी, उच्च कौशल वाले रोज़गार सृजित करेगी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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