यूपी में मकान मालिक नहीं बढ़ा सकेंगे 'मनमाना' किराया, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कीं 2021 ऐक्ट की पांच धाराएं
यूपी में अब मकान मालिक 'मनमाना' किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किराएदारी विनियमन एक्ट-2021 की पांच धाराओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। लखनऊः अब मकान मालिक 'मनमाने' तरीके से किरा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
यूपी में अब मकान मालिक 'मनमाना' किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किराएदारी विनियमन एक्ट-2021 की पांच धाराओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया है।
लखनऊः अब मकान मालिक 'मनमाने' तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। न ही वर्षों पुराने किराएदारों को आसानी से निकाल सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किराएदारी विनियमन अधिनियम-2021 की पांच अहम धाराओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। इनमें धारा-8, 9, 10, 38 और 42 शामिल हैं। यह निर्णय न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इंद्र भूषण साहनी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट द्वारा नए कानून की इन धाराओं के रद्द होने के बाद पुराना कानून यानी उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम-1972 उस सीमा तक स्वतः प्रभाव में आ जाएगा, जहां 2021 के कानून की धाराओं को असंवैधानिक घोषित करने से रिक्तता आई है।
'केंद्र और राज्य दोनों बना सकते हैं कानून'
कोर्ट ने कहा कि किराएदारी समवर्ती सूची का विषय है। ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। लेकिन राज्य का कानून पहले से लागू केंद्रीय कानून से टकराता है तो संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है। यूपी के 2021 के कानून को यह संवैधानिक मंजूरी नहीं मिली थी। इसी आधार पर संबंधित धाराओं को असंवैधानिक करार दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में किराया विधिवत तय हो चुका है, जिन किराएदारी समझौतों पर अमल हो चुका है, वे केवल इस फैसले के कारण स्वतः खत्म नहीं होंगे।
समझें, अब क्या होगा
2021 के कानून की धारा-8 में यह व्यवस्था थी कि मकान का देय किराया किराएदारी समझौते के मुताबिक होगा। धारा-9 में किराया संशोधन की व्यवस्था थी। मसलन, किसी मकान का किराया 2021 से पहले 5,000 रुपये महीना था तो मकान मालिक धारा-9 का हवाला देते हुए एकतरफा बढ़ोतरी कर 7,000 या 10,000 रुपये कर सकता था।
1972 के ऐक्ट की व्यवस्था लागू होगी
लेकिन अब 1972 के ऐक्ट की व्यवस्था लागू होगी। इसमें किराए के मामले में 'मानक किराए' की व्यवस्था थी। कुछ परिस्थितियों में मकान का किराया कानून में निर्धारित तरीके से तय किया जाता था। मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकता था। इसका मतलब यह भी नहीं है कि अब सारे किराएदारों का किराया एक तय प्रतिशत के हिसाब से लागू हो जाएगा। किराया तय करने में किराएदारी की तारीख, भवन की स्थिति, पहले से तय किराया आदि का ध्यान रखा जाएगा।
हर साल 5 या 7 प्रतिशत बढ़ोतरी नहीं?
2021 के कानून में पुराने किराएदारों के लिए आवासीय परिसर के किराए में 5 प्रतिशत और गैर-आवासीय परिसर में 7 प्रतिशत सालाना संशोधन की व्यवस्था थी। अब धारा-9 के रद्द होने के बाद 2021 के कानून के आधार पर यह बढ़ोतरी नहीं की जा सकती। यानी किसी दुकान का किराया 10,000 रुपये है तो सिर्फ 2021 के कानून का हवाला देकर उसे हर साल 7 प्रतिशत बढ़ाना अब वैधानिक आधार नहीं होगा। किराया बढ़ाने के लिए किरायेदारी समझौते और 1972 के कानून का रेफरेंस लेना होगा।
रेंट अथॉरिटी नहीं तय करेगी किराया
धारा-10 के तहत किराए के विवाद में रेंट अथॉरिटी को किराया निर्धारित करने की शक्ति दी गई थी। इस धारा के रद्द होने के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किराए को लेकर विवाद होने पर अब मामले को पुराने लागू कानून और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा। इसके तहत पुराने मानक किराए पर बढ़ोतरी की गणना की जाती थी।
लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

यूपी में सपा को बड़ा झटका! 14 अक्टूबर को BJP में शामिल होंगे ये तीन विधायक

2027 चुनाव से पहले BSP का बड़ा दांव, कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन - bsps lucknow power show on kanshiram parinirvan diwas

17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत: नई जेलों के निर्माण से बढ़ाई जा रही बंदी क्षमता, 6 जिलों में जेल निर्माण जारी; 2026-27 में बजट बढ़कर ₹2,877 करोड़ हुआ


