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UP: सरकारी कागजों में 20 साल से ‘मृत’, अब लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव! संतोष मूरत को आजाद अधिकार सेना ने बनाया प्रत्याशी

सरकारी रिकॉर्ड में मृत होने के बावजूद संतोष खुद को जिंदा साबित करने के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों से लेकर अदालतों और अलग-अलग शहरों के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्होंने इसी संघर्ष को राजनीतिक मंच देने के लिए…

Navbharat Times के अनुसार12 अगस्त 2026 को 01:18 pm बजे
UP: सरकारी कागजों में 20 साल से ‘मृत’, अब लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव! संतोष मूरत को आजाद अधिकार सेना ने बनाया प्रत्याशी

सौजन्य से:- Navbharat Times

सरकारी रिकॉर्ड में मृत होने के बावजूद संतोष खुद को जिंदा साबित करने के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों से लेकर अदालतों और अलग-अलग शहरों के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्होंने इसी संघर्ष को राजनीतिक मंच देने के लिए चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।

शिवपुर से प्रत्याशी घोषित किए गए संतोष मूरत

आजाद अधिकार सेना ने संतोष मूरत सिंह को वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी का कहना है कि संतोष का मामला सरकारी व्यवस्था और भ्रष्टाचार की उस तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और उसे दो दशक से अपनी जिंदगी का प्रमाण देने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।पार्टी के मुताबिक संतोष मूरत सिंह लंबे समय से संवैधानिक और कानूनी रास्तों के जरिए खुद को सरकारी रिकॉर्ड में जीवित साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि उनके संघर्ष और पीड़ा को आवाज देने के उद्देश्य से उन्हें विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया गया है।

नाना पाटेकर के यहां करते थे काम

संतोष मूरत सिंह के मुताबिक वह मुंबई में अभिनेता नाना पाटेकर के यहां काम करते थे। इसी दौरान उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनके रिश्तेदारों द्वारा उनकी जमीन पर कब्जा किए जाने का आरोप भी सामने आया। संतोष का कहना है कि इसके बाद से ही वह खुद को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा साबित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।करीब दो दशक से चल रही इस लड़ाई में वह लखनऊ, दिल्ली समेत देश के अलग-अलग शहरों में अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के सामने अपनी फरियाद रख चुके हैं।

गले में तख्ती लेकर कहते हैं- ‘मैं जिंदा हूं’

संतोष मूरत सिंह वाराणसी कचहरी के आसपास अक्सर गले में एक तख्ती लगाए नजर आते हैं। इस तख्ती पर लिखा होता है- ‘मैं जिंदा हूं।’ उनका यह अंदाज लोगों का ध्यान खींचता रहा है। वह लंबे समय से इसी तख्ती के जरिए अपने मामले को लोगों और प्रशासन के सामने रखते रहे हैं।संतोष का दावा है कि उनके मामले में कई बार अधिकारियों और बड़े नेताओं की ओर से सरकारी दस्तावेजों में उन्हें दोबारा जीवित दर्ज कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन करीब दो दशक बीत जाने के बावजूद रिकॉर्ड में उनकी स्थिति नहीं बदली।

पहले भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं

सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के बावजूद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे संतोष मूरत सिंह पहले भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। अब आजाद अधिकार सेना ने उन्हें शिवपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है।उनकी उम्मीदवारी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वाराणसी की राजनीति में एक अलग तरह की चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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