होमविकासयूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय
विकास

यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय

यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने सभी नियमों को एक जगह समेटते हुए 12 संशोधनों को दोबारा प्रकाशित किया है। इस नए नियम से बिल्डर, खरीदार और ए…

Hindustan के अनुसार18 अगस्त 2026 को 02:55 pm बजे
यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी-रेरा ने एक जगह समेटे सभी नियम, बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने सभी नियमों को एक जगह समेटते हुए 12 संशोधनों को दोबारा प्रकाशित किया है। इस नए नियम से बिल्डर, खरीदार और एजेंटों के लिए नियम समझना आसान होगा। खरीदारों की राशि पर कड़ी निगरानी, विज्ञापनों में आवश्यक जानकारी और शिकायतों की नई प्रक्रिया शामिल है।

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने रियल एस्टेट क्षेत्र के नियमों को और स्पष्ट करते हुए सभी संशोधनों को एक जगह समेट दिया है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 संशोधनों के साथ दोबारा प्रकाशित किया है। इससे बिल्डर, खरीदार और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नियमों को समझना आसान होगा।

खरीदारों के पैसे पर कड़ी निगरानी

बिल्डर को प्रत्येक परियोजना के लिए तीन बैंक खाते रखने होंगे। खरीदारों से मिली रकम का 70 प्रतिशत अलग खाते और 30 प्रतिशत लेन-देन खाते में जाएगा। परियोजना से जुड़े ऋण की रकम भी अलग खाते में रखी जाएगी। इन खातों का हर वित्तीय वर्ष में लेखा-परीक्षण कराना और रिपोर्ट वेबसाइट पर डालना होगा। खरीदारों से परियोजना की रकम नकद नहीं ली जा सकेगी।

विज्ञापन में छिपेगी नहीं जरूरी जानकारी, यह हुए प्रमुख बदलाव

विज्ञापन में रेरा पंजीकरण संख्या, वेबसाइट और क्यूआर कोड अनिवार्य। परियोजना के संग्रह खाते, शुभारंभ की तारीख और एजेंट का पंजीकरण नंबर बताना होगा। स्वीकृत नक्शे में दर्ज नाम ही परियोजना के लिए इस्तेमाल होगा। कब्ज़ा देते समय निर्धारित प्रारूप में कब्ज़ा प्रस्ताव देना होगा। बिल्डर को वास्तुकार, अभियंता, चार्टर्ड अकाउंटेंट और ग्राहक संबंध प्रबंधक की जानकारी देनी होगी।

गैर-पंजीकृत परियोजना के खरीदार भी कर सकेंगे शिकायत

गैर-पंजीकृत परियोजना में मकान या भूखंड खरीदने वाले लोग भी अब रेरा की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत कर सकेंगे। शिकायत के साथ परियोजना और बिल्डर से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देनी होगी।

देरी पर लगेगा शुल्क

त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट देर से जमा करने पर 15 हजार रुपये, सालाना लेखा-परीक्षण रिपोर्ट में देरी पर 25 हजार रुपये और एजेंट की त्रैमासिक रिपोर्ट देर से देने पर 10 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है।

परिवार को हस्तांतरण सिर्फ 1,000 रुपये

आवंटी की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य के नाम फ्लैट या भूखंड हस्तांतरित करने पर अधिकतम 1,000 रुपये शुल्क लगेगा। परिवार से बाहर हस्तांतरण पर अधिकतम 25 हजार रुपये शुल्क निर्धारित है।

एजेंटों की जवाबदेही भी तय

एजेंटों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जरूरी होगा। उन्हें अपने अभिलेख व्यवस्थित रखने और हर तीन महीने में लेन-देन की रिपोर्ट जमा करनी होगी।

रखरखाव की रकम पर भी निगरानी

रखरखाव के लिए जमा राशि अलग खाते में रखनी होगी। साझा क्षेत्रों की जिम्मेदारी आवंटियों की संस्था को मिलने पर पूरी रकम उसे सौंपनी होगी। इसका इस्तेमाल केवल साझा क्षेत्रों और सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत और जरूरी बदलाव में किया जा सकेगा तथा लेखा-परीक्षण भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा परियोजना का पंजीकरण बढ़ाने, वापस लेने और जरूरत पड़ने पर दूसरे प्रमोटर को जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। सभी समेकित नियम प्राधिकरण की वेबसाइट के विधिक अनुभाग में उपलब्ध हैं।

सामान्य प्रश्न

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureauहिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें