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स्वयं सहायता समूह गठन में प्रदेश में दूसरे स्थान पर प्रयागराज

स्वयं सहायता समूह गठन में प्रदेश में दूसरे स्थान पर प्रयागराज प्रयागराज में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए चलाए गए अभियान में, जिले ने 1,759 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर दूसरा स्थान हासिल किया। इससे 23,559 महिलाओं…

Hindustan के अनुसार25 अगस्त 2026 को 06:55 am बजे
स्वयं सहायता समूह गठन में प्रदेश में दूसरे स्थान पर प्रयागराज

सौजन्य से:- Hindustan

स्वयं सहायता समूह गठन में प्रदेश में दूसरे स्थान पर प्रयागराज

प्रयागराज में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए चलाए गए अभियान में, जिले ने 1,759 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर दूसरा स्थान हासिल किया। इससे 23,559 महिलाओं को जोड़ा गया है। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। पहले स्थान पर बहराइच और तीसरे पर गाजीपुर रहा।

प्रयागराज। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए चलाए गए अभियान में स्वयं सहायता समूहों के गठन के मामले में प्रयागराज प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है। पांच से 20 अगस्त तक चले विशेष अभियान के दौरान जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत 1,759 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। इन समूहों से 23,559 महिलाओं को जोड़ा गया है। समूहों के गठन से महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य दिया गया था। इसके तहत जिले में अभियान चलाकर गांव-गांव महिलाओं को समूहों से जोड़ने का काम किया गया। आंकड़ों के अनुसार बहराइच प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। वहां 2,348 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 23,592 महिलाओं को जोड़ा गया। प्रयागराज ने 1,759 समूह बनाकर 23,559 महिलाओं को जोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं 1,746 नए समूहों के गठन और 19,774 महिलाओं को जोड़ने के साथ गाजीपुर तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद 1,899 समूहों में 19,127 महिलाओं को जोड़ने वाला जिला चौथे स्थान पर रहा। पांचवें स्थान पर आजमगढ़ रहा, जहां 1,624 नए स्वयं सहायता समूहों में 16,828 महिलाएं शामिल हुईं। अधिकारियों के मुताबिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। समूहों के जरिए उन्हें आर्थिक गतिविधियां शुरू करने, बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है。

पहले से 25 हजार महिलाएं समूह से जुड़कर कर रहीं हैं काम

जिले में पहले से ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर 25 हजार से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। इसमें बैंक सखी, विद्युत सखी, महिला मेठ, कृषि सखी जैसी तमाम योजनाओं से इन्हें जोड़ा गया है। अब नए समूह का गठन होने के बाद महिला रोजगार की दिशा में काम और आगे बढ़ेगा। महिलाओं को जोड़ने का लाभ पूरे परिवार को मजबूत बनाना होगा। इसे लखपति दीदी योजना को आगे बढ़ने के लिए भी देखा जा रहा है।

महिलाओं को जोड़ने का प्रयास

अभियान के तहत 23 हजार से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। हमारा प्रयास है कि पात्र और जरूरतमंद महिलाओं को समूहों से जोड़ा जाए, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलें।

-हर्षिका सिंह, सीडीओ

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