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Dainik Bhaskar के अनुसार25 अगस्त 2026 को 07:55 am बजे
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत 5 पर FIR:  प्रयागराज में सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने पर कार्रवाई - Prayagraj (Allahabad) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत 5 पर FIR:प्रयागराज में सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने पर कार्रवाई

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सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज गोरखपुर के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत पर चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ कैंट थाने में FIR दर्ज हुई है। इनमें CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है। आरोप है कि हाईकोर्ट में विवाद विचाराधीन होने के बावजूद फर्जी नियुक्ति पत्र और सर्कुलर तैयार कर कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त करने की कोशिश की गई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

प्रोफेसर एस. डोमिनिक राजकुमार ने बताया कि कॉलेज का संचालन सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से होता है। वादी का कहना है कि सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है।

हाईकोर्ट में विचाराधीन है प्रबंध समिति का विवाद शिकायत में कहा गया है कि सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसी बीच सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। आरोप है कि इसके बावजूद चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल और रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। रैना सैमुअल को कार्यवाहक प्राचार्य बनाने का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने एक फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किया, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया। आरोप है कि प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर इस सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए गए। इनमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी शिकायत में बताए गए हैं। जानकारी होने पर दो सदस्यों ने वापस लिए हस्ताक्षर शिकायत के अनुसार, बाद में प्रो. अरुण सालिक मोजेस और रेवरेंट प्रवीण मेसी को कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो दोनों ने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र निरस्त करने की मांग की। शिकायतकर्ता ने इसे कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और अन्य सदस्यों को उसमें शामिल करने की कोशिश का आधार बताया है। पहले भी फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि आरोपियों ने प्रयागराज के अशोक नगर स्थित साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जा रहा था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पहले भी इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच में सामने आएगा फर्जी दस्तावेज का सच वादी का कहना है कि मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसके लिए साइबर कैफे, कंप्यूटर और इंटरनेट से तैयार किए गए कथित दस्तावेजों की जांच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ जरूरी है। यह भी बताया कि उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया। पुलिस ने शुरू की जांच कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया, शिकायतकर्ता ने फर्जीवाड़े, जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाया है। जांच पड़ताल कराई जा रही है।

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